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Jhajjar-Bahadurgarh News: ई-टेंडरिंग के खिलाफ धरना प्रदर्शन जारी, अन्य संस्थाएं भी आने लगी समर्थन में
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झज्जर। ई-टेंडरिंग को लेकर जिले में सरपंचों का धरना प्रदर्शन जारी है। शहर और बेरी के खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालयों पर सरपंचों ने धरना प्रदर्शन कर विरोध जताया। बेेरी में भारतीय किसान यूनियन की महिला पदाधिकारी भी पहुंची और सरपंचों को समर्थन दिया। साल्हावास व मातनहेल खंडों में वीरवार को कोई धरना प्रदर्शन नहीं किया गया।
झज्जर खंड कार्यालय परिसर में करीब 48 गांवों के सरपंचों ने ई-टेंडरिंग को लेकर बुधवार को भी प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। साढ़े नौ बजे ही सरपंच खंड कार्यालय में पहुंचने शुरू हो गए थे। उसके बाद करीब दस बजे सरपंचों ने धरना शुरू कर दिया जो दोपहर दो बजे तक जारी रहा। सरंपच एसोसिएशन के के प्रधान पवन शर्मा ने बताया कि सरकार गांवों का विकास करवाने को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करती रहती है लेकिन धरातल पर कुछ और है। दो लाख की धनराशि से गांव का विकास नहीं हो सकता है। एसोसिएशन के उप प्रधान विरेंद्र यादव ने बताया कि सरकार को पहले की सरकारों की तरह ही बीस लाख रुपये की धनराशि गांव के विकास कार्यों के लिए जारी करनी चाहिए। यदि सरकार ऐसा नही करेंगी तो उनका धरना प्रदर्शन खंड कार्यालय में शांतिपूर्वक चलता रहेगा। इस दौरान प्रधान पवन, वीरेंद्र, सोमबीर,दारा सिंह, परमवीर, सतदेव, राहुल कोट, शक्तिराज, बलवान के अलावा अन्य सरपंच उपस्थित रहे।
वहीं दूसरी ओर बेरी खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय के प्रांगण में बुधवार को दूसरे दिन भी खंड के सरपंचों ने अपन मांगों को लेकर धरना देकर किया सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया। सरपंचों ने ई-टेंडरिंग व राइट टू रिकॉल का विरोध करने की जोरदार आवाज उठाई।
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सरपचों के धरने पर भारतीय किसान यूनियन जिला अध्यक्ष ममता कादयान के नेतृत्व में किसान यूनियन के सदस्यों ने समर्थन दिया। महिला जिला अध्यक्ष ममता कादयान ने कहा कि सरपंचों के धरने को भारतीय किसान यूनियन पूरा समर्थन देती है। पंचायतें गांवों की छोटी नहीं बल्कि बड़ी सरकार होती है। जमीनी स्तर पर पंचायतें ही प्रस्ताव बनाकर गांव के विकास को गति देती हैं। प्रदेश सरकार द्वारा पंचायतों को थौंपे गए ई-टेंडरिंग का भारतीय किसान यूनियन विरोध करती है और सरकार से मांग करती है कि यह तुंरत प्रभाव से वापस ले। इस दौरान पुलिस की टीम भी मौजूद रही। प्रदर्शन का नेतृत्व सरपंच एसोसिएशन के प्रधान नरेंद्र वजीरपुर ने किया। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार सरपंचों की मांगों का समाधान नही करती तब तक सरपंचों का धरना जारी रहेगा।
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झज्जर खंड कार्यालय परिसर में करीब 48 गांवों के सरपंचों ने ई-टेंडरिंग को लेकर बुधवार को भी प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। साढ़े नौ बजे ही सरपंच खंड कार्यालय में पहुंचने शुरू हो गए थे। उसके बाद करीब दस बजे सरपंचों ने धरना शुरू कर दिया जो दोपहर दो बजे तक जारी रहा। सरंपच एसोसिएशन के के प्रधान पवन शर्मा ने बताया कि सरकार गांवों का विकास करवाने को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करती रहती है लेकिन धरातल पर कुछ और है। दो लाख की धनराशि से गांव का विकास नहीं हो सकता है। एसोसिएशन के उप प्रधान विरेंद्र यादव ने बताया कि सरकार को पहले की सरकारों की तरह ही बीस लाख रुपये की धनराशि गांव के विकास कार्यों के लिए जारी करनी चाहिए। यदि सरकार ऐसा नही करेंगी तो उनका धरना प्रदर्शन खंड कार्यालय में शांतिपूर्वक चलता रहेगा। इस दौरान प्रधान पवन, वीरेंद्र, सोमबीर,दारा सिंह, परमवीर, सतदेव, राहुल कोट, शक्तिराज, बलवान के अलावा अन्य सरपंच उपस्थित रहे।
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वहीं दूसरी ओर बेरी खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय के प्रांगण में बुधवार को दूसरे दिन भी खंड के सरपंचों ने अपन मांगों को लेकर धरना देकर किया सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया। सरपंचों ने ई-टेंडरिंग व राइट टू रिकॉल का विरोध करने की जोरदार आवाज उठाई।
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सरपचों के धरने पर भारतीय किसान यूनियन जिला अध्यक्ष ममता कादयान के नेतृत्व में किसान यूनियन के सदस्यों ने समर्थन दिया। महिला जिला अध्यक्ष ममता कादयान ने कहा कि सरपंचों के धरने को भारतीय किसान यूनियन पूरा समर्थन देती है। पंचायतें गांवों की छोटी नहीं बल्कि बड़ी सरकार होती है। जमीनी स्तर पर पंचायतें ही प्रस्ताव बनाकर गांव के विकास को गति देती हैं। प्रदेश सरकार द्वारा पंचायतों को थौंपे गए ई-टेंडरिंग का भारतीय किसान यूनियन विरोध करती है और सरकार से मांग करती है कि यह तुंरत प्रभाव से वापस ले। इस दौरान पुलिस की टीम भी मौजूद रही। प्रदर्शन का नेतृत्व सरपंच एसोसिएशन के प्रधान नरेंद्र वजीरपुर ने किया। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार सरपंचों की मांगों का समाधान नही करती तब तक सरपंचों का धरना जारी रहेगा।