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गांव की तरह पानी ढोकर ला रही हैं शहर की महिलाएं
अमर उजाला ब्यूरो/ झज्जर / बहादुरगढ़
Updated Mon, 11 Jul 2016 01:23 AM IST
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water problem
- फोटो : Bureau
पर्याप्त एवं स्वच्छ पेयजल आपूर्ति न होने के कारण शहरवासियों को बेहद परेशानी हो रही है। इन दिनों गांव की तरह शहरों की महिलाओं को भी पानी दूर-दराज से सिर पर ढोकर लाना पड़ रहा है।
पिछले कुछ समय से शहर के लोगों को पीने का पानी स्वच्छ नहीं मिल रहा। पानी इतना दूषित है कि उसे पीना तो दूर कार्यों में भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। दूषित पेयजल के कारण बीमारियां भी बढ़ रही हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में पेट दर्द व डायरिया से ग्रस्त मरीजों की संख्या बढ़ रही है। शहर में गांवों जैसे हालात बन गए हैं। गांवों की तरह शहर की महिलाओं को भी दूर-दराज से सिर पर पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। महिला सुदेश ने कहा कि पानी की सप्लाई तो नियमित है, लेकिन पानी पीने लायक नहीं। पीना तो दूर कपड़े धोने में भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। बेहद ही मिट्टी और गंदगी घुली होती है।
सुनीता ने कहा कि जिन घरों में पानी शुद्ध करने की मशीनें हैं उनका तो काम चल जाता है, लेकिन जिनके घरों में प्यूरीफायर नहीं उनकों बड़ी दिक्कत हो रही है। अब हैंडपंप भी बेहद कम रह गए हैं। इसलिए काफी दूर से पानी भरकर लाना पड़ रहा है। महेंद्र ने कहा कि जैसा नहरों में पीला पानी दिखाई देता है, ठीक वैसा ही घरों में आ रहा है। ऐसा लगता है जैसे जलघर में पानी को साफ ही नहीं किया जा रहा। लोगों ने प्रशासन शहर में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की मांग की है।
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पिछले कुछ समय से शहर के लोगों को पीने का पानी स्वच्छ नहीं मिल रहा। पानी इतना दूषित है कि उसे पीना तो दूर कार्यों में भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। दूषित पेयजल के कारण बीमारियां भी बढ़ रही हैं। सरकारी और निजी अस्पतालों में पेट दर्द व डायरिया से ग्रस्त मरीजों की संख्या बढ़ रही है। शहर में गांवों जैसे हालात बन गए हैं। गांवों की तरह शहर की महिलाओं को भी दूर-दराज से सिर पर पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। महिला सुदेश ने कहा कि पानी की सप्लाई तो नियमित है, लेकिन पानी पीने लायक नहीं। पीना तो दूर कपड़े धोने में भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। बेहद ही मिट्टी और गंदगी घुली होती है।
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सुनीता ने कहा कि जिन घरों में पानी शुद्ध करने की मशीनें हैं उनका तो काम चल जाता है, लेकिन जिनके घरों में प्यूरीफायर नहीं उनकों बड़ी दिक्कत हो रही है। अब हैंडपंप भी बेहद कम रह गए हैं। इसलिए काफी दूर से पानी भरकर लाना पड़ रहा है। महेंद्र ने कहा कि जैसा नहरों में पीला पानी दिखाई देता है, ठीक वैसा ही घरों में आ रहा है। ऐसा लगता है जैसे जलघर में पानी को साफ ही नहीं किया जा रहा। लोगों ने प्रशासन शहर में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की मांग की है।
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