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स्कूल में पानी, 303 छात्रों की शिक्षा बाधित
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लुकसर गांव के स्कूल भवन में भरा बारिश का पानी।
- फोटो : Bahadurgarh
उपमंडल के गांव लुकसर और गंगड़वा के सरकारी स्कूलों में चार फुट तक पानी भरा हुआ है। एक माह से स्कूल में कक्षाएं पूरी तरह से बंद हैं लेकिन सरकार और प्रशासन की ओर से पानी निकासी को कोई प्रबंध नहीं किया गया है। ऐसे में छात्रों की पढ़ाई पूरी तरह से बाधित हो गई है।
दोनों गांवों के सरकारी स्कूलों में जलभराव की वजह से तलैया बन गए हैं। बारिश का पानी यहां कमरों के अंदर तक घुस गया है।
लुकसर गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 263 छात्र और छात्राएं हैं जिसमें तीन गांवों के छात्र पढ़ते हैं। लुकसर के साथ-साथ गंगड़वा और जरदकपुर के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। गंगड़वा गांव के प्राथमिक स्कूल में 40 बच्चे हैं। एक ओर प्रशासन की ओर से पानी निकासी के बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं जबकि दूसरी ओर एक माह में बीत जाने के बाद भी कोई प्रबंध नहीं किया गया है। अभी तक कोई बिजली की मोटर या फिर डीजल इंजन का प्रयोग नहीं किया गया है। ऐसे में पानी निकासी के लिए किए जा रहे सभी दांवों की हवा निकल रही है।
लुकसर गांव के स्कूल कमरों में चार से पांच फुट तक पानी भरा हुआ है। ऐसे में स्कूल भवन को भी नुकसान पहुंच रहा है। लकड़ी के दरवाजे खराब हो रहे है, कमरों का फर्श धंसने लगा है। छतों पर भी नमी पहुंच गई है। स्कूल में रखे कंप्यूटर और बिजली के अन्य उपकरण भी सुरक्षित नहीं हैं। फर्नीचर पानी में डूब चुका है। बच्चों के बेंच और कुर्सियों को पानी से नहीं निकाला गया है। जल्द ही कोई समाधान नहीं किया गया तो भवन के साथ-साथ लाखों रुपये का फर्नीचर और इलेक्ट्रिक सामान खराब हो जाएगा।
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मातन छारा लिंक ड्रेन का पानी स्कूल भवन के अंदर बह रहा है। अभिभावक संदीप, मनजीत, प्रवीन और लोकेश का कहना है कि अभी तक पानी निकालने से अलग ड्रेन के पानी को रोकने का भी कोई प्रबंध नहीं किया गया है। ड्रेन के लेवल से स्कूल प्रागंण बहुत नीचा है, जिसके चलते बारिश में ड्रेन का पानी स्कूल में भर जाता है। बारिश के दिनों में विद्यालय में जलभराव होने के कारण अक्सर छात्र-छात्राओं को वापस लौटना पड़ता है।
पिछले डेढ़ साल से शिक्षा पर कोरोना की मार है। अब कोरोना से हालात सामान्य होने पर स्कूलों में पढ़ाई शुरू हुई है तो तीन गांवों के छात्रों पर अब बारिश के पानी की मार पड़ी है जिससे छात्रों की शिक्षा में काफी नुकसान हो रहा है। बच्चों की पढ़ाई का बहुत नुकसान हो रहा है। छात्रों और अभिभावकों की मांग है कि पानी निकासी के पुख्ता प्रबंध करने के साथ ही स्कूलों में कक्षाएं शुरू की जाए ताकि उनकी शिक्षा बाधित न हो सके।
स्कूल प्रांगण से पानी निकासी के मांग को लेकर प्रशासन को मांग पत्र भेजा गया है। ग्राम प्रधान और ब्लॉक अधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को विद्यालय परिसर में जल भराव की समस्या से अवगत करा दिया है। छात्रों को शुरू में गंगड़वा गांव प्राथमिक स्कूल भवन में कक्षाओं के लिए भेजा गया लेकिन अब वहां भी पानी भर गया है। ऐसे में छात्रों की कक्षाएं आनलाइन जारी है। -संगीता वर्मा, प्राचार्य लुकसर
दो दिन पहले स्कूल भवन का निरीक्षण किया गया है। जलभराव की हालत गंभीर है और पानी निकासी किया जाना अभी संभव नहीं है क्योंकि स्कूल के चारों ओर खेतों में भी करीब 5 फुट तक पानी भरा है। अभी ड्रेन भी ओवरफ्लो है। प्रशासन की नजर पानी निकासी पर लगी है और हालातों के अनुसार पानी निकासी का प्रबंध भी किया जाएगा। -विशाल कुमार, उपमंडल अधिकारी बादली
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दोनों गांवों के सरकारी स्कूलों में जलभराव की वजह से तलैया बन गए हैं। बारिश का पानी यहां कमरों के अंदर तक घुस गया है।
लुकसर गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 263 छात्र और छात्राएं हैं जिसमें तीन गांवों के छात्र पढ़ते हैं। लुकसर के साथ-साथ गंगड़वा और जरदकपुर के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। गंगड़वा गांव के प्राथमिक स्कूल में 40 बच्चे हैं। एक ओर प्रशासन की ओर से पानी निकासी के बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं जबकि दूसरी ओर एक माह में बीत जाने के बाद भी कोई प्रबंध नहीं किया गया है। अभी तक कोई बिजली की मोटर या फिर डीजल इंजन का प्रयोग नहीं किया गया है। ऐसे में पानी निकासी के लिए किए जा रहे सभी दांवों की हवा निकल रही है।
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लुकसर गांव के स्कूल कमरों में चार से पांच फुट तक पानी भरा हुआ है। ऐसे में स्कूल भवन को भी नुकसान पहुंच रहा है। लकड़ी के दरवाजे खराब हो रहे है, कमरों का फर्श धंसने लगा है। छतों पर भी नमी पहुंच गई है। स्कूल में रखे कंप्यूटर और बिजली के अन्य उपकरण भी सुरक्षित नहीं हैं। फर्नीचर पानी में डूब चुका है। बच्चों के बेंच और कुर्सियों को पानी से नहीं निकाला गया है। जल्द ही कोई समाधान नहीं किया गया तो भवन के साथ-साथ लाखों रुपये का फर्नीचर और इलेक्ट्रिक सामान खराब हो जाएगा।
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मातन छारा लिंक ड्रेन का पानी स्कूल भवन के अंदर बह रहा है। अभिभावक संदीप, मनजीत, प्रवीन और लोकेश का कहना है कि अभी तक पानी निकालने से अलग ड्रेन के पानी को रोकने का भी कोई प्रबंध नहीं किया गया है। ड्रेन के लेवल से स्कूल प्रागंण बहुत नीचा है, जिसके चलते बारिश में ड्रेन का पानी स्कूल में भर जाता है। बारिश के दिनों में विद्यालय में जलभराव होने के कारण अक्सर छात्र-छात्राओं को वापस लौटना पड़ता है।
पिछले डेढ़ साल से शिक्षा पर कोरोना की मार है। अब कोरोना से हालात सामान्य होने पर स्कूलों में पढ़ाई शुरू हुई है तो तीन गांवों के छात्रों पर अब बारिश के पानी की मार पड़ी है जिससे छात्रों की शिक्षा में काफी नुकसान हो रहा है। बच्चों की पढ़ाई का बहुत नुकसान हो रहा है। छात्रों और अभिभावकों की मांग है कि पानी निकासी के पुख्ता प्रबंध करने के साथ ही स्कूलों में कक्षाएं शुरू की जाए ताकि उनकी शिक्षा बाधित न हो सके।
स्कूल प्रांगण से पानी निकासी के मांग को लेकर प्रशासन को मांग पत्र भेजा गया है। ग्राम प्रधान और ब्लॉक अधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को विद्यालय परिसर में जल भराव की समस्या से अवगत करा दिया है। छात्रों को शुरू में गंगड़वा गांव प्राथमिक स्कूल भवन में कक्षाओं के लिए भेजा गया लेकिन अब वहां भी पानी भर गया है। ऐसे में छात्रों की कक्षाएं आनलाइन जारी है। -संगीता वर्मा, प्राचार्य लुकसर
दो दिन पहले स्कूल भवन का निरीक्षण किया गया है। जलभराव की हालत गंभीर है और पानी निकासी किया जाना अभी संभव नहीं है क्योंकि स्कूल के चारों ओर खेतों में भी करीब 5 फुट तक पानी भरा है। अभी ड्रेन भी ओवरफ्लो है। प्रशासन की नजर पानी निकासी पर लगी है और हालातों के अनुसार पानी निकासी का प्रबंध भी किया जाएगा। -विशाल कुमार, उपमंडल अधिकारी बादली