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दो और दिन दम घोटेगा पटाखों का धुआं

Sat, 25 Oct 2014 01:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर बहादुरगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर बहादुरगढ़ Updated Sat, 25 Oct 2014 01:15 AM IST
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Two more days Gotega own fireworks smoke

दिवाली में पटाखों के बेतहाशा इस्तेमाल से अगले दो और दिन पर्यावरण में जहर घुला रहेगा।

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पटाखों से निकलने वाली जहरीली गैसों से बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर विपरित असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पटाखों से निकलने वाला धुआं भारी होता है। इस वजह से उसे छंटने में तीन दिन लग जाते हैं।


पटाखा रहित दिवाली मनाने की अपील सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह गई है। पटाखा विक्रेताओं से जुटाई जानकारी के अनुसार, सिरसा शहर में तीन करोड़ के पटाखे फूंके गए हैं।
पटाखों में ये हैं जहरीली गैसे
चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी में एनवायरमेंटल बॉयोलॉजी की प्रोफेसर डॉ. रानी ने बताया कि पटाखों में कई तरह की जहरीली गैसें होती हैं जो सेहत के लिए खतरनाक हो सकती हैं।
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इन गैसों में सल्फर डाईऑक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड, कार्बन डाईआक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड, नाइट्रस आक्साइड गैसें होती हैं जिससे अस्थमा, दिल की बीमारी, बल्ड प्रेशर और कई अन्य स्थायी बीमारियां भी हो सकती हैं।
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पटाखों के बारूद से नुकसान
प्रोफेसर रानी ने बताया कि पटाखों में गैसें तो नुकसान पहुंचाती ही हैं, इसके साथ इनमें जो केमिकल होता है वह भी बेहद खतरनाक होता है।

पटाखों के बारूद में मौजूद केमिकल से इंसान कोमा तक में जा सकता है। इससे गले में दर्द और चिड़चिड़ापन भी हो सकता है।

पटाखों में मौजूद कैडमियम से एनीमिया और किडनी तक फेल हो सकती है। पटाखों में मौजूद मैग्नीशियम और सोडियम से त्वचा को नुकसान हो सकता है।

बारूद में मौजूद जिंक से उल्टी हो सकती है और नाइट्रेस नाम के केमिकल से मनुष्य का मेंटली बैलेंस बिगड़ सकता है और वह कोमा में भी जा सकता है।
तीन दिन तक रहेगा असर : डॉ. बैनीवाल
आईएमए के प्रदेश संरक्षक डॉ. वेद बैनीवाल ने बताया कि जिस प्रकार पटाखे खुले में बिकते हैं वैसे ही चलाने भी खुले में ही चाहिए। इससे निकलने वाला धुआं भारी होता है और इसका असर तीन दिन तक रहता है।


इस धुएं से बच्चों को संभालकर रखना चाहिए क्योंकि बच्चों के फेफडे़ कमजोर होते हैं और वे जल्दी इसकी चपेट में आ सकते हैं। इस धुएं से एलर्जी, दमा, इंफेक्शन और चर्म रोग हो सकते हैं।

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