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टोक्यो पैरालंपिक : योगेश ने जीता रजत पदक

Tue, 31 Aug 2021 01:44 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 31 Aug 2021 01:44 AM IST
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Tokyo Paralympics : Yogesh won silver medal
जीत की खुशी जाहिर करते योगेश के माता-पिता, बहन और दादा-दादी। - फोटो : Bahadurgarh
मात्र 8 वर्ष की आयु में ही हाथ और पांवों से पैरालाइज होने के कारण ढंग से चलने-फिरने में लाचार हुए बहादुरगढ़ के योगेश कथुनिया ने टोक्यो पैरालंपिक में डिस्कस थ्रो का रजत पदक जीतकर साबित कर दिया है कि संकल्प हो तो क्या नहीं हो सकता। कथुनिया परिवार बहादुरगढ़ में पुराने बराही रोड के साथ लगती राधा कॉलोनी में रहता है। सोमवार सुबह परिवार के सभी लोग टीवी पर मैच देख रहे थे। जैसे ही योगेश को रजत मिला लड्डू बांटे गए। वहीं परिजन छोल ढोल की थाप पर नाचे।
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डिस्कस थ्रोअर (श्रेणी एफ-56 में) योगेश कथुनिया का परिवार मूलत: उसी गांव मांडोठी से है जिसने देश को सोनू और धर्मेंद्र जैसे बड़े पहलवान दिए हैं। काफी समय से यह परिवार बहादुरगढ़ में रहता है। सोमवार सुबह योगेश का परिणाम सुनते ही चाचा प्रेमचंद खुशी से उछल पड़े। वयोवृद्ध दादा-दादी के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई। बुआ-बहनों से लेकर हर कोई रिश्तेदार, परिचित व खेल प्रशंसक खुश नजर आया। ढोल की थाप पर परिवार के सभी सदस्यों ने घर के बाहर गली में डांस करके खुशी का इजहार किया। योगेश की मां मीना ने बताया कि घर लौटने पर बेटे को उसकी मनपसंद रसमलाई और दाल चूरमा खिलाऊंगी।
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टोक्यो पैरालिंपिक में योगेश से परिजनों को पदक लाने की उम्मीद थी। जन्माष्टमी के दिन सुबह जब उनके इवेंट्स हुए तो दादा सूबेदार हुकमचंद, दादी सावित्री देवी, पिता ऑनरेरी कैप्टन ज्ञानचंद, चाचा प्रेमचंद, कर्मबीर, संदीप, संजीव, अमित, सुमित, बड़ी बहन पूजा, फूफा सुभाष व नरेश के अलावा आसपास के लोग टीवी के आगे मैच देखने बैठ गए थे। पिता ज्ञानचंद व मां मीना देवी ने बताया कि 24 अगस्त को जब योगेश को टोक्यो पैरालंपिक में हिस्सा लेने के लिए वे एयरपोर्ट पर उसे छोड़ने गए तो उसने एक ही वादा किया था कि वह देश के लिए मेडल लेकर ही लौटेगा। अपने गांव मांडोठी बहादुरगढ़ का नाम देश-दुनिया में चमकाएगा। उन्होंने अपनी इस तरह रजत पदक देश की झोली में डालते हुए जन्माष्टमी के दिन देशवासियों को बड़ी खुशी दी और तिरंगा का भी मान खूब बढ़ाया।
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ये हैं उपलब्धियां
- वर्ष 2018 में पंचकूला में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीता।
- 2018 में बर्लिन में हुई ओपन ग्रेंडप्रिक्स में डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीता।
- 2018 में इंडोनेशिया में हुए एशियन पैरा गेम्स में चौथा स्थान पाया।
- 2019 में फरीदाबाद में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।
- 2019 में पेरिस में हुई ओपन ग्रेंडप्रिक्स डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीता।
- 2019 में दुबई में हुई वल्र्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।
- 2021 में बंगलूरू में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता के डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक हासिल किया।
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