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आज टोक्यो पैरालंपिक में दम दिखाएगा बहादुरगढ़ का योगेश
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शहर का युवक योगेश कथुनिया सोमवार को टोक्यो में पैरालंपिक गेम्स के डिस्कस थ्रो (श्रेणी एफ-56) मुकाबले में दम दिखाएगा। योगेश अब तक छह प्रमुख प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीत चुका है।
बहादुरगढ़ की राधा कालोनी निवासी योगेश के पिता ज्ञानचंद, चाचा प्रेम और खेल प्रेमियों को भरोसा है कियोगेश पैरालंपिक गेम्स में पदक जीतेगा। शहरवासियों को योगेश से काफी उम्मीद हैं। नरेश, पंकज व महेश कुमार ने भी उनकी जीत के लिए शुभकामनाएं दी हैं। पैरालंपिक गेम्स के लिए योगेश ने कड़ा परिश्रम किया है। गत दिनों दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में हुए ट्रायल में 45.58 मीटर दूर चक्का फेंककर उसने प्रथम स्थान हासिल किया था, जिसकी वजह से उसका चयन टोक्यो पैरालंपिक गेम्स के लिए हुआ। गत पांच दिन पहले टोक्यो से योगेश ने अपने पिता रिटायर्ड आनरेरी कैप्टन ज्ञानचंद से बातचीत की और पैरालंपिक गेम्स में पदक जीतने का वादा किया। वर्ष 1997 में जन्मे योगेश कथुनिया के हाथ व पांव वर्ष 2006 में पैरालाइज हो गए थे। कुछ समय बाद हाथ कुछ ठीक हो गए। वर्ष 2017 में जब वह दिल्ली युनिवर्सिटी में पढ़ाई करता था, उस दौरान उनके दोस्त सचिन यादव ने गेम्स में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। योगेश ने बताया कि जब वह मैदान में गेम्स खेलने के लिए जाने लगा तो उसको डिस्कस थ्रो में संभावना नजर आई। बाद में मां मीना और पिता ज्ञानचंद ने उसका हौसला बढ़ाया। तभी से वह डिस्कस थ्रो खेल में कड़ा परिश्रम करता है।
डिस्कस थ्रोअर योगेश की उपलब्धियां
-2018 में पंचकूला में हुई राष्ट्रीय डिस्कस थ्रो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।
-2018 में बर्लिन में हुई ओपन ग्रेंड प्रिक्स डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक।
-2018 में इंडोनेशिया में हुए एशियन पैरा गेम्स में चौथा स्थान।
-2019 में फरीदाबाद में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।
-2019 में पेरिस में हुई ओपन ग्रेंड प्रिक्स डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक।
-2019 में दुबई में हुई वर्ल्ड डिस्कस थ्रो चैंपियनशिप में कांस्य पदक।
-2021 में बंगलूरू में हुई राष्ट्रीय डिस्कस थ्रो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।
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बहादुरगढ़ की राधा कालोनी निवासी योगेश के पिता ज्ञानचंद, चाचा प्रेम और खेल प्रेमियों को भरोसा है कियोगेश पैरालंपिक गेम्स में पदक जीतेगा। शहरवासियों को योगेश से काफी उम्मीद हैं। नरेश, पंकज व महेश कुमार ने भी उनकी जीत के लिए शुभकामनाएं दी हैं। पैरालंपिक गेम्स के लिए योगेश ने कड़ा परिश्रम किया है। गत दिनों दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में हुए ट्रायल में 45.58 मीटर दूर चक्का फेंककर उसने प्रथम स्थान हासिल किया था, जिसकी वजह से उसका चयन टोक्यो पैरालंपिक गेम्स के लिए हुआ। गत पांच दिन पहले टोक्यो से योगेश ने अपने पिता रिटायर्ड आनरेरी कैप्टन ज्ञानचंद से बातचीत की और पैरालंपिक गेम्स में पदक जीतने का वादा किया। वर्ष 1997 में जन्मे योगेश कथुनिया के हाथ व पांव वर्ष 2006 में पैरालाइज हो गए थे। कुछ समय बाद हाथ कुछ ठीक हो गए। वर्ष 2017 में जब वह दिल्ली युनिवर्सिटी में पढ़ाई करता था, उस दौरान उनके दोस्त सचिन यादव ने गेम्स में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। योगेश ने बताया कि जब वह मैदान में गेम्स खेलने के लिए जाने लगा तो उसको डिस्कस थ्रो में संभावना नजर आई। बाद में मां मीना और पिता ज्ञानचंद ने उसका हौसला बढ़ाया। तभी से वह डिस्कस थ्रो खेल में कड़ा परिश्रम करता है।
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डिस्कस थ्रोअर योगेश की उपलब्धियां
-2018 में पंचकूला में हुई राष्ट्रीय डिस्कस थ्रो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।
-2018 में बर्लिन में हुई ओपन ग्रेंड प्रिक्स डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक।
-2018 में इंडोनेशिया में हुए एशियन पैरा गेम्स में चौथा स्थान।
-2019 में फरीदाबाद में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।
-2019 में पेरिस में हुई ओपन ग्रेंड प्रिक्स डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक।
-2019 में दुबई में हुई वर्ल्ड डिस्कस थ्रो चैंपियनशिप में कांस्य पदक।
-2021 में बंगलूरू में हुई राष्ट्रीय डिस्कस थ्रो प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक।