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Jhajjar-Bahadurgarh News: इस बार कोई असमंजस नहीं, 15 को मनेगा मकर संक्रांति पर्व

Wed, 10 Jan 2024 01:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Wed, 10 Jan 2024 01:28 AM IST
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This time there is no confusion, Makar Sankranti festival will be celebrated on 15th
बहादुरगढ़। तिथि व राशियों के गणित के हिसाब से अधिकतम त्योहारों का मान दो दिन होने से लोगों में काफी असमंजस की स्थिति रहने लगी है, लेकिन वर्ष 2024 की यह शुरुआत इस लिहाज से काफी बेहतर है, क्योंकि मकर संक्रांति को लेकर ज्योतिषाचार्यों में किसी तरह का कोई असमंजस नहीं है। तिथियों और राशि की स्थिति को देख ज्योतिषाचार्य और पंडितों ने कहा है कि मकर संक्रांति 15 को ही मनाई जाएगी। 16 जनवरी से विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे।
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ज्योतिषाचार्य प्रवीण शास्त्री के अनुसार, वैदिक ज्योतिष में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी को 7 बजकर 15 मिनट से शाम 5:46 बजे तक है। इस दौरान पूजन-दान और सूर्योपासना विशेष फलदायी होगी। इस बार 14 को सूर्य धनु राशि में ही हैं। यह अगले दिन सुबह 8:30 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे, इसी के बाद पुण्य काल शुरू होगा साथ ही इस दिन खरमास खत्म होगा।
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पहले 12 व 13 जनवरी को मनाई जाती थी संक्रांति
काठ मंडी स्थित शिव-हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित सियाराम कहते हैं कि वेंकटेश्वर व शताब्दी पंचांग के मुताबिक, 14 जनवरी को मकर संक्रांति पहली बार 1902 में मनाई गई थी। 18वीं शताब्दी में 12 और 13 जनवरी को मनाई जाती थी। 1664 में संक्रांति पहली बार 15 जनवरी को मनाई गई थी। इसके बाद हर तीसरे साल अधिकमास होने से दूसरे व तीसरे साल 14 को, चौथे साल 15 जनवरी को संक्रांति होने लगी। हालांकि तारीख तय होने के बावजूद दो दिन पर्व पड़ने से लोगों में बीते वर्षों में काफी असमंजस रहा है। अबकी बार स्थिति साफ है। मकर संक्रांति 15 को मनाई जाएगी।
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संक्रांति के बाद शुरू होंगे विवाह कार्य
पंडित शियाराम ने बताया कि इस दिन खिचड़ी खाने व खिलाने का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन से देवताओं का दिन और राक्षसों की रात्रि प्रारंभ होती है। जो उत्तरायण कहलाती है, इसमें विवाह आदि शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं।


11 को मनाई जाएगी अमावस्या
पौष माह की स्नान दान की अमावस्या 11 जनवरी वीरवार को है। अमावस्या के दिन पितरों को तर्पण देने, गरीबों को दान देने और गंगा जी या पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य प्राप्त होता है और पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। अमावस्या के दिन व्रत रखने से भी कष्टों और संकट से मुक्ति मिलती है। जिन लोगों पर कालसर्प या राहु केतु दोष होता है, इस दिन उपाय करने से उन्हें राहत मिलती है।
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