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Jhajjar-Bahadurgarh News: अस्पताल अधूरा, इलाज को भटक रहे श्रमिक
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फोटो-51: बहादुरगढ़ के सेक्टर-4बी में बन रहा ईएसआईसी अस्पताल। संवाद
- फोटो : जख्मी अधिवक्ता चंद्रेश वर्मा को जिला चिकतसालय की इमरजेंसी में ले जाते पुलिसकर्मी।
बहादुरगढ़। एचएसआईआईडीसी सेक्टर-4बी में बन रहा 100 बिस्तरों वाला कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) अस्पताल पांच वर्ष बाद भी अधूरा है। औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों को इलाज के लिए दिल्ली, गुरुग्राम या फिर फरीदाबाद जैसे बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता है।
इसके अलावा एमआईई भाग-ए व भाग-बी, पुराना औद्योगिक क्षेत्र, बालाजी औद्योगिक क्षेत्र, सूर्या नगर, रोहद औद्योगिक क्षेत्र और ताल नगर सहित कई क्षेत्रों में सड़क, सीवर, पेयजल और वर्षा जल निकासी की समस्या बनी हुई है। इससे उद्योगों का विस्तार नहीं हो पा रहा है।
उद्यमी सरकार से मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ ईएसआईसी अस्पताल के जल्द निर्माण की मांग कर रहे हैं। ईएसआईसी अस्पताल की घोषणा नवंबर 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की थी और वर्ष 2019 में इसका शिलान्यास किया गया था। हालांकि निर्माण कार्य दिसंबर 2021 में शुरू हुआ।
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निर्धारित समय के अनुसार अस्पताल दिसंबर 2023 तक बनकर तैयार होना था। लगभग 68 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस अस्पताल का भवन निर्माण कार्य लगभग पूरा बताया जा रहा है जबकि विद्युत कार्य अंतिम चरण में है।
शहर के एक लाख से अधिक बीमित श्रमिकों और परिवारों को अब भी दिल्ली स्थित बसई दारापुर कर्मचारी राज्य बीमा अस्पताल, गुरुग्राम, फरीदाबाद या निजी सूचीबद्ध अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। शहर में फिलहाल तीन औषधालय संचालित हैं जो केवल प्राथमिक जांच और सामान्य दवाइयों तक सीमित हैं।
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इसके अलावा एमआईई भाग-ए व भाग-बी, पुराना औद्योगिक क्षेत्र, बालाजी औद्योगिक क्षेत्र, सूर्या नगर, रोहद औद्योगिक क्षेत्र और ताल नगर सहित कई क्षेत्रों में सड़क, सीवर, पेयजल और वर्षा जल निकासी की समस्या बनी हुई है। इससे उद्योगों का विस्तार नहीं हो पा रहा है।
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उद्यमी सरकार से मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ ईएसआईसी अस्पताल के जल्द निर्माण की मांग कर रहे हैं। ईएसआईसी अस्पताल की घोषणा नवंबर 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की थी और वर्ष 2019 में इसका शिलान्यास किया गया था। हालांकि निर्माण कार्य दिसंबर 2021 में शुरू हुआ।
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निर्धारित समय के अनुसार अस्पताल दिसंबर 2023 तक बनकर तैयार होना था। लगभग 68 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस अस्पताल का भवन निर्माण कार्य लगभग पूरा बताया जा रहा है जबकि विद्युत कार्य अंतिम चरण में है।
शहर के एक लाख से अधिक बीमित श्रमिकों और परिवारों को अब भी दिल्ली स्थित बसई दारापुर कर्मचारी राज्य बीमा अस्पताल, गुरुग्राम, फरीदाबाद या निजी सूचीबद्ध अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। शहर में फिलहाल तीन औषधालय संचालित हैं जो केवल प्राथमिक जांच और सामान्य दवाइयों तक सीमित हैं।