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एआई के साथ भविष्य उज्ज्वल, लेकिन सतर्क रहना जरूरी : प्रो. राजबीर
Sat, 01 Feb 2025 09:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sat, 01 Feb 2025 09:04 PM IST
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-फोटो 63 : कार्यक्रम को संबोधित करते महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक के वाइस चांसलर प्रोफेसर रा
बहादुरगढ़। वैश्य आर्य शिक्षण महिला महाविद्यालय में आईसीएसएसआर चंडीगढ़ की ओर से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका विषय ''''आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की नैतिकता एक वैश्विक परिप्रेक्ष्य रहा।
संगोष्ठी में मुख्यातिथि महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह रहे। इस संगोष्ठी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक पहलुओं पर वैश्विक दृष्टिकोण से गहन चर्चा की गई।
प्रो.सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एक ऐसी तकनीक है, जो मशीनों को सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है। यह केवल एक वैज्ञानिक कल्पना नहीं है, बल्कि आज के युग में यह हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। चाहे वह शिक्षा क्षेत्र में, स्वास्थ्य क्षेत्र में हो, स्मार्ट लर्निंग, व्यापार और उद्योग में या फिर सुरक्षा क्षेत्र में साइबर प्रोटेक्शन- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर जगह अपनी जगह बना रही है। एआई के साथ भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है।
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प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में बताते हुए कहा कि यह एक ऐसी तकनीक है जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है। यह कंप्यूटर विज्ञान की वह शाखा है, जो मशीनों को बुद्धिमान बनाने के लिए एल्गोरिदम और डेटा का उपयोग करती है। महाविद्यालय के चेयरपर्सन श्रीनिवास गुप्ता ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा करते हुए बताया कि यह एक ऐसी तकनीक है, जो न केवल हमारे जीवन को सरल बना रही है, बल्कि हमारे भविष्य को भी नया आकार दे रही है।
एचआरडी सेंटर, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. रमेश चंद्र शर्मा ने कहा कि एआई 21वीं सदी की सबसे क्रांतिकारी तकनीकों में से एक है। इसने विज्ञान, चिकित्सा, शिक्षा, व्यवसाय और हमारे दैनिक जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। एआई तकनीक के विकास के साथ नैतिकता का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि यह मानवता के हित में काम कर सके।
रिसोर्स पर्सन एजुकेशन डिपार्टमेंट, महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक से डॉ. विनीता रोज ने बताया कि एआई एक ऐसी तकनीक है जो हमारे जीवन को बदल रही है और भविष्य में इसका प्रभाव और भी अधिक होने वाला है। राजकीय महाविद्यालय बहादुरगढ़ की प्राचार्य डॉ. अल्का गुलाटी ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंप्यूटर विज्ञान की एक शाखा है, जो मशीनों को इंसानों की तरह सीखने, समस्याओं को हल करने और निर्णय लेने के योग्य बनाती है। गौड़ ब्राह्मण कॉलेज, रोहतक की प्राचार्य डॉ. महाश्वेता व वैश्य कॉलेज ऑफ एजुकेशन, रोहतक की प्राचार्य डॉ. तरुणा मल्होत्रा ने भी एआई पर अपने विचार रखे।
इस मौके पर प्रधान सत्यनारायण अग्रवाल, उप प्रधान पवन कुमार जैन, महासचिव सुरेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष मनोज गुप्ता, प्रबंधन समिति के सदस्य पवन कुमार गोयल, शिव कुमार गुप्ता उपस्थित रहे।
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संगोष्ठी में मुख्यातिथि महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह रहे। इस संगोष्ठी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक पहलुओं पर वैश्विक दृष्टिकोण से गहन चर्चा की गई।
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प्रो.सिंह ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एक ऐसी तकनीक है, जो मशीनों को सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है। यह केवल एक वैज्ञानिक कल्पना नहीं है, बल्कि आज के युग में यह हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। चाहे वह शिक्षा क्षेत्र में, स्वास्थ्य क्षेत्र में हो, स्मार्ट लर्निंग, व्यापार और उद्योग में या फिर सुरक्षा क्षेत्र में साइबर प्रोटेक्शन- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर जगह अपनी जगह बना रही है। एआई के साथ भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है।
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प्राचार्य डॉ. आशा शर्मा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में बताते हुए कहा कि यह एक ऐसी तकनीक है जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है। यह कंप्यूटर विज्ञान की वह शाखा है, जो मशीनों को बुद्धिमान बनाने के लिए एल्गोरिदम और डेटा का उपयोग करती है। महाविद्यालय के चेयरपर्सन श्रीनिवास गुप्ता ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा करते हुए बताया कि यह एक ऐसी तकनीक है, जो न केवल हमारे जीवन को सरल बना रही है, बल्कि हमारे भविष्य को भी नया आकार दे रही है।
एचआरडी सेंटर, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. रमेश चंद्र शर्मा ने कहा कि एआई 21वीं सदी की सबसे क्रांतिकारी तकनीकों में से एक है। इसने विज्ञान, चिकित्सा, शिक्षा, व्यवसाय और हमारे दैनिक जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। एआई तकनीक के विकास के साथ नैतिकता का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि यह मानवता के हित में काम कर सके।
रिसोर्स पर्सन एजुकेशन डिपार्टमेंट, महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक से डॉ. विनीता रोज ने बताया कि एआई एक ऐसी तकनीक है जो हमारे जीवन को बदल रही है और भविष्य में इसका प्रभाव और भी अधिक होने वाला है। राजकीय महाविद्यालय बहादुरगढ़ की प्राचार्य डॉ. अल्का गुलाटी ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंप्यूटर विज्ञान की एक शाखा है, जो मशीनों को इंसानों की तरह सीखने, समस्याओं को हल करने और निर्णय लेने के योग्य बनाती है। गौड़ ब्राह्मण कॉलेज, रोहतक की प्राचार्य डॉ. महाश्वेता व वैश्य कॉलेज ऑफ एजुकेशन, रोहतक की प्राचार्य डॉ. तरुणा मल्होत्रा ने भी एआई पर अपने विचार रखे।
इस मौके पर प्रधान सत्यनारायण अग्रवाल, उप प्रधान पवन कुमार जैन, महासचिव सुरेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष मनोज गुप्ता, प्रबंधन समिति के सदस्य पवन कुमार गोयल, शिव कुमार गुप्ता उपस्थित रहे।