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प्रशासन ने डीसी रेट पर नौकरी देने के लिए मांगी जानकारी संघर्ष समिति ने साफ मना किया

Fri, 03 Feb 2017 11:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला झज्जर
ब्यूरो/अमर उजाला झज्जर Updated Fri, 03 Feb 2017 11:51 PM IST
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The administration sought to hire at DC rate information Struggle Committee have refused
Jat reservation - फोटो : अमर उजाला
झज्जर। राशलवाला चौक पर चल रहा जाटों का धरना शुक्रवार को छठे दिन में प्रवेश कर गया तो सरकारी मशीनरी भी कुछ हरकत में आती नजर आ रही है। शुक्रवार को प्रशासन ने दंगों में मारे गए लोगों के परिजनों को नौकरी देने के लिए डिटेल मांगी गई। परिजनों ने यह खबर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारियों को दी। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रधान जितेंद्र बबला ने धरने के मंच से साफ कह दिया कि उनके समाज का कोई भी व्यक्ति सरकार के द्वारा दी जा रही डीसी रेट पर नौकरी नहीं करेगा, उनकी मांग में केवल स्थायी जॉब है। अगर सरकार सही इन लोगों को रोजगार देना चाहती है तो केवल सरकारी नौकरी दी जाए, अन्यथा इस तरह के सब्जबाग में वे फंसने वाले नहीं हैं। समिति के नेताओं ने कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा, धरना इसी प्रकार शांतिपूर्वक तरीके से चलता रहेगा।
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रात्रि धरने पर 5 को होगा फैसला
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के द्वारा 5 फरवरी से रात के समय धरने पर मौजूद रहने वाले लोगों की सूची तैयार कर ली गई है। हालांकि रात को धरना दिए जाने का आखिरी फैसला 5 फरवरी को दिन में लिया जाएगा। समिति के प्रधान जितेंद्र ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के फैसले का इंतजार किया जा रहा है। कार्यकारिणी के द्वारा जल्द ही बड़ी घोषणा भी की जा सकती है, जिसमें धरनों की संख्या को बढ़ाना भी हो सकता है।
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शुक्रवार को भी खूब मिला समर्थन
जाट समुदाय के द्वारा को धरने को 36 बिरादरी का बताते हुए प्रचार किया जा रहा है। इससे उन्हें अब दूसरी बिरादरियों से जुड़े नेताओं और प्रतिनिधियों का समर्थन मिलना भी शुरू हो गया है। शुक्रवार को भाजपा नेता संत सुरेहती, ब्राह्मण समाज के जगदीश पंडित, हसनपुर ब्लाक समिति के चेयरमैन पवन सेठ, पूर्व पार्षद ओमप्रकाश वाल्मीकि, हरिजन समाज से निमाणा के सरपंच अनिल, दादरी तोए के सरपंच सूरत सिंह, सौंधी से अशोक, जगदीश उर्फ काला पार्षद, ढराणा से मोती हरिजन, हसनपुर सरपंच संदीप सहित अनेक लोग समर्थन देने पहुंचे।
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महिलाओं की संख्या बढ़ी
धरने में अब महिलाओं की संख्या बढ़ने लगी है। शुरूआत तीन दिन तक धरने में महिलाएं 100 का आंकड़ा भी नहीं पार कर पाई थी तो वहीं अब महिलाओं की संख्या बढ़ने लगी है। महिलाएं धरने में गीत गाते पहुंचती है।


प्रशासन ने बढ़ाई चौकसी
प्रशासन भी सुरक्षा की लिहाज से कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ना चाह रहा है। प्रशासन के द्वारा शहर के काफी स्थानों पर मिट्टी के बंकर बनाकर नाके लगाए गए हैं। वहीं पिछली बार दंगों से प्रभावित हुए क्षेत्रों में प्रशासन के द्वारा ज्यादा मुस्तैदी से पुलिस फोर्स को तैनात किया गया है। प्रशासन के द्वारा पैरामिलिट्री फोर्स को छावनी मोहल्ला के नजदीक बनी यादव धर्मशाला में ठहराया गया है।
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