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जीएसटी बढ़ाने का कपड़ा व्यापारी करेंगे विरोध
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कपड़े खरीदतीं महिलाएं।
- फोटो : Jhjhar
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पहले कोरोना की मार से व्यापारी ही नहीं हर वर्ग कराह है। अब बची हुई कसर जीएसटी पूरी कर देखा। रेडीमेड कपड़ों पर आगामी वर्ष में केद्र सरकार की ओर जीएसटी को सात प्रतिशत तक बढ़ाया जा रहा है जिसके कारण कपड़ा व्यापारियों को परेशानी में डाल दिया है। यह बातें शहर के व्यापारी कह रहे हैं। फिलहाल रेडीमेड कपड़ों पर 5 प्रतिशत जीएसटी सरकार की ओर से लागू किया है।
करीब दो वर्षों से कोरोना के काल के दौरान वर्तमान में व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले हैं और व्यापारियों व ग्राहकों पर कोरोना की मार साफ तौर पर दिखाई दे रही है जिसके चलते बाजारों में पहले जैसी ग्राहकी नहीं दिखाई दे रहे हैं। बाजारों में रौनक करीब खत्म ही हो चुकी है। पिछले त्योहारी सीजन भी कोरोना की भेंट चढ़ चुके हैं। वहीं फिलहाल पांच प्रतिशत जीएसटी रेडीमेड कपड़ों पर सरकार की ओर से तय की गई है जिसके कारण भी ग्राहकों को कपड़े खरीदने से पहले सौ बार सोचना पड़ रहा है। यदि जीएसटी 12 प्रतिशत लगा दी गई तो कपड़ा व्यवसाय पर आर्थिक संकट आएगा। लघु उद्योगों पर 12 प्रतिशत जीएसटी का प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ने वाला है। एक हजार रुपये के कपड़े की खरीद पर करीब पांच प्रतिशत टैक्स सरकार की ओर से वसूला जा रहा है। वहीं छोटे शहरों के कपड़ा व्यापारियों के लिए जीएसटी मुसीबत का सबब बन सकता है क्योंकि बाजार में ग्राहकी न के बराबर है। रोटी, कपड़ा और मकान को तो सरकार की और से जीएसटी, वेट आदि करों से दूर ही रखना चाहिए ताकि आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
रेडीमेड कपड़ों पर बारह प्रतिशत जीएसटी से आम ग्राहक व कपड़ा व्यापारी दोनों को ही नुकसान है। सरकार को जीएसटी बढ़ाने के फैसले पर दोबारा से सोचना चाहिए। कोरोना के बाद बाजार में ग्राहकी काफी घट चुकी है। सरकार की तरफ से लागू की जा रही जीएसटी का विरोध किया जाएगा। हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के नेताओं से बात करके आगामी रणनीति जीएसटी को लेकर बनाई जाएगी। - राकेश अरोड़ा, अध्यक्ष, शहर व्यापार मंडल।
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सरकार का काम मधुमक्खी की तरह होना चाहिए, फूल से जितने शहद की जरूरत हो उतना ही शहद लेना चाहिए, न कि फूल को ही तोड़ दे। फूल तोड़ने से सरकार को कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है। - कपड़ा व्यापारी, वीरेंद्र खुराना, झज्जर।
पहले से ही कपड़ा नहीं बिक रहा है। कपड़े से जीएसटी को हटा देना चाहिए क्योंकि सभी लोगों की मूलभूत आवश्यकता है। सरकार रेडीमेड गारमेंटस पर जीएसटी बढ़ाती है तो पुरजोर विरोध किया जाएगा। -सुनील खत्री, झज्जर।
झज्जर शहर छोटा शहर है ओर शहर में काम है ही नही। सरकार के इस फैसले से ग्राहक काफी परेशान हो जाएगा। - नरेश सोनी, कपड़ा व्यावसायी, झज्जर।
5 प्रतिशत जीएसटी से ही ग्राहकों व दुकानदारों को परेशानी हो रही है। कोरोना के बाद से दुकानों में ग्राहकी नही हो रही है। 12 प्रतिशत जीएसटी से ग्राहकों व कपड़ा व्यवसाय की कमर ही टूट जाएगी। - कुलदीप, कपड़ा व्यापारी, झज्जर।
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करीब दो वर्षों से कोरोना के काल के दौरान वर्तमान में व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले हैं और व्यापारियों व ग्राहकों पर कोरोना की मार साफ तौर पर दिखाई दे रही है जिसके चलते बाजारों में पहले जैसी ग्राहकी नहीं दिखाई दे रहे हैं। बाजारों में रौनक करीब खत्म ही हो चुकी है। पिछले त्योहारी सीजन भी कोरोना की भेंट चढ़ चुके हैं। वहीं फिलहाल पांच प्रतिशत जीएसटी रेडीमेड कपड़ों पर सरकार की ओर से तय की गई है जिसके कारण भी ग्राहकों को कपड़े खरीदने से पहले सौ बार सोचना पड़ रहा है। यदि जीएसटी 12 प्रतिशत लगा दी गई तो कपड़ा व्यवसाय पर आर्थिक संकट आएगा। लघु उद्योगों पर 12 प्रतिशत जीएसटी का प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ने वाला है। एक हजार रुपये के कपड़े की खरीद पर करीब पांच प्रतिशत टैक्स सरकार की ओर से वसूला जा रहा है। वहीं छोटे शहरों के कपड़ा व्यापारियों के लिए जीएसटी मुसीबत का सबब बन सकता है क्योंकि बाजार में ग्राहकी न के बराबर है। रोटी, कपड़ा और मकान को तो सरकार की और से जीएसटी, वेट आदि करों से दूर ही रखना चाहिए ताकि आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
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रेडीमेड कपड़ों पर बारह प्रतिशत जीएसटी से आम ग्राहक व कपड़ा व्यापारी दोनों को ही नुकसान है। सरकार को जीएसटी बढ़ाने के फैसले पर दोबारा से सोचना चाहिए। कोरोना के बाद बाजार में ग्राहकी काफी घट चुकी है। सरकार की तरफ से लागू की जा रही जीएसटी का विरोध किया जाएगा। हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के नेताओं से बात करके आगामी रणनीति जीएसटी को लेकर बनाई जाएगी। - राकेश अरोड़ा, अध्यक्ष, शहर व्यापार मंडल।
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सरकार का काम मधुमक्खी की तरह होना चाहिए, फूल से जितने शहद की जरूरत हो उतना ही शहद लेना चाहिए, न कि फूल को ही तोड़ दे। फूल तोड़ने से सरकार को कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है। - कपड़ा व्यापारी, वीरेंद्र खुराना, झज्जर।
पहले से ही कपड़ा नहीं बिक रहा है। कपड़े से जीएसटी को हटा देना चाहिए क्योंकि सभी लोगों की मूलभूत आवश्यकता है। सरकार रेडीमेड गारमेंटस पर जीएसटी बढ़ाती है तो पुरजोर विरोध किया जाएगा। -सुनील खत्री, झज्जर।
झज्जर शहर छोटा शहर है ओर शहर में काम है ही नही। सरकार के इस फैसले से ग्राहक काफी परेशान हो जाएगा। - नरेश सोनी, कपड़ा व्यावसायी, झज्जर।
5 प्रतिशत जीएसटी से ही ग्राहकों व दुकानदारों को परेशानी हो रही है। कोरोना के बाद से दुकानों में ग्राहकी नही हो रही है। 12 प्रतिशत जीएसटी से ग्राहकों व कपड़ा व्यवसाय की कमर ही टूट जाएगी। - कुलदीप, कपड़ा व्यापारी, झज्जर।