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तकनीक विद्यार्थियों को नियंत्रित करने के लिए नहीं है : डॉ. श्रीराम
Fri, 20 Sep 2024 02:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Fri, 20 Sep 2024 02:44 AM IST
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फोटो संख्या:69-विशेषज्ञ वक्ता डॉ. श्रीराम पांडेय को स्मृति चिहन प्रदान करते प्रो.राजीव कुमार व
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा शोध गुणवत्ता और विकास विषय पर केंद्रित दो दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस आयोजन में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीराम पांडेय उपस्थित रहे।
कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने आयोजन को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताया। कहा कि अवश्य ही इससे वे लाभाविंत होंगे। विश्वविद्यालय की सम कुलपति प्रो. सुषमा यादव ने कहा कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को शोध के लिए आवश्यक व्यावहारिक पहलुओं को जानने में मददगार होगा। डॉ. श्रीराम पांडेय ने अपने व्याख्यान में अनुसंधान के लिए विभिन्न डेटाबेस और संसाधनों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि विद्यार्थी किस तरह से इनका उपयोग अपने शोध कार्य में कर सकते हैं।
उन्होंने गूगल स्कॉलर, एनडीएल (राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय), ईआरआईसी (ईआरआईसी) और डायमेंशन्स जैसे महत्वपूर्ण डेटाबेस का उल्लेख किया, जो विद्यार्थियों के लिए उनके शोध में अत्यंत सहायक हो सकते हैं। डॉ. श्रीराम पांडेय ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग शोध कार्यों में करने के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तकनीक विद्यार्थियों को नियंत्रित करने के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उनके शोध कार्यों को और अधिक उन्नत और सटीक बनाना है। उन्होंने कहा, हमें तकनीक का उपयोग नैतिक रूप से करना चाहिए ताकि यह हमारे शोध को बेहतर बनाए, न कि हमारे सोचने-समझने की क्षमता को सीमित करे। विद्यार्थियों ने व्याख्यान के बाद अपनी प्रतिक्रियाएं साझा करते हुए कहा कि यह व्याख्यान उनके भविष्य के शोध कार्यों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगा। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव कुमार सिंह और अन्य संकाय सदस्यों ने भी पांडेय के योगदान की सराहना की और छात्रों को अनुसंधान के प्रति प्रेरित करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।
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कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने आयोजन को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताया। कहा कि अवश्य ही इससे वे लाभाविंत होंगे। विश्वविद्यालय की सम कुलपति प्रो. सुषमा यादव ने कहा कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को शोध के लिए आवश्यक व्यावहारिक पहलुओं को जानने में मददगार होगा। डॉ. श्रीराम पांडेय ने अपने व्याख्यान में अनुसंधान के लिए विभिन्न डेटाबेस और संसाधनों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि विद्यार्थी किस तरह से इनका उपयोग अपने शोध कार्य में कर सकते हैं।
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उन्होंने गूगल स्कॉलर, एनडीएल (राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय), ईआरआईसी (ईआरआईसी) और डायमेंशन्स जैसे महत्वपूर्ण डेटाबेस का उल्लेख किया, जो विद्यार्थियों के लिए उनके शोध में अत्यंत सहायक हो सकते हैं। डॉ. श्रीराम पांडेय ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग शोध कार्यों में करने के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तकनीक विद्यार्थियों को नियंत्रित करने के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य उनके शोध कार्यों को और अधिक उन्नत और सटीक बनाना है। उन्होंने कहा, हमें तकनीक का उपयोग नैतिक रूप से करना चाहिए ताकि यह हमारे शोध को बेहतर बनाए, न कि हमारे सोचने-समझने की क्षमता को सीमित करे। विद्यार्थियों ने व्याख्यान के बाद अपनी प्रतिक्रियाएं साझा करते हुए कहा कि यह व्याख्यान उनके भविष्य के शोध कार्यों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगा। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव कुमार सिंह और अन्य संकाय सदस्यों ने भी पांडेय के योगदान की सराहना की और छात्रों को अनुसंधान के प्रति प्रेरित करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।
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