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Jhajjar-Bahadurgarh News: शहीदों के बलिदान की स्मृति को संजोकर रखें विद्यार्थी
Thu, 08 Feb 2024 04:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 08 Feb 2024 04:10 AM IST
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राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय, झज्जर में हरियाणा की सैन्य विरासत पर आधारित चित्र प्रदर्श
झज्जर। राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय में हरियाणा की सैन्य विरासत पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का बुधवार को समापन हो गया। प्रदर्शनी में प्रथम विश्व युद्ध में विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित ढाकला गांव के रिसालदार बदलू सिंह के परिजनों को बतौर विशिष्ट अतिथि आमंत्रित किया गया। वक्ताओं ने शहीदों के बलिदान की स्मृति को संजोकर रखा। यह प्रदर्शनी हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला के सौजन्य से महाविद्यालय के इतिहास और रक्षा अध्ययन विभागों के तत्वाधान में पूर्व विद्यार्थी संगठन के सहयोग से आयोजित की गई। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी ने पुस्तकें भी प्रदर्शित की। प्राचार्य डॉ. दलबीर सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर कर्नल डॉ. योगेंद्र सिंह और कैप्टन मंजीत सिंह बल्हारा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रताप फलसवाल ने किया। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. जगदीश राहड़ ने धन्यवाद दिया।
विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित रिसालदार बदलूराम के पौत्र और भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त धर्मवीर सिंह, प्रपौत्र एडवोकेट रविंद्र सिंह और नवीन कुमार से मिलकर विद्यार्थी अभिभूत हो गए। प्रदर्शनी में रिसालदार बदलूराम के मेडल भी विद्यार्थियों ने देखे। गौरतलब है कि रिसालदार बदलूराम के वंशज भी देश की सुरक्षा में तैनात रहे हैं। उनके प्रपौत्र पंकज कुमार ने द्रास सेक्टर में अपने प्राण न्यौछावर किए। प्रपौत्र योगेंद्र सिंह कमांडिंग ऑफिसर ने बालाकोट स्ट्राइक में भाग लिया। विद्यार्थियों को यह जानकर गर्व हुआ कि झज्जर जिले के विभिन्न गांवों के कई सैनिकों ने विभिन्न युद्धों में देश के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी।
जब फ्रांस भी अहसानमंद हुआ
प्रदर्शनी में दिखाया गया कि भारतीय सैनिकों का मेमोरियल फ्रांस में भी बना हुआ है। फ्रांसीसी सेना के मार्शल फर्डिनेंड फोच ने विश्व युद्ध में भारतीय सैनिकों की बहादुरी पर नतमस्तक होकर उन्हें विदाई देते हुए कहा था कि अपने घर जाकर बताएं कि कैसे आपके देशवासियों ने फ्रांस और फ़्लैंडर्स की ठंडी उत्तरी भूमि को अपने खून से सराबोर किया, कैसे उन्होंने अपनी जोशीली भावना से इसे दुश्मन से बचाया, पूरे भारत को बताएं कि हम सभी सैनिकों की कब्रों की श्रद्धापूर्वक देखभाल करेंगे। हम उनके बलिदान की स्मृति को संजोकर रखेंगे। उन्होंने हमें रास्ता दिखाया, उन्होंने अंतिम जीत की ओर पहला कदम उठाया।''''''''
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विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित रिसालदार बदलूराम के पौत्र और भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त धर्मवीर सिंह, प्रपौत्र एडवोकेट रविंद्र सिंह और नवीन कुमार से मिलकर विद्यार्थी अभिभूत हो गए। प्रदर्शनी में रिसालदार बदलूराम के मेडल भी विद्यार्थियों ने देखे। गौरतलब है कि रिसालदार बदलूराम के वंशज भी देश की सुरक्षा में तैनात रहे हैं। उनके प्रपौत्र पंकज कुमार ने द्रास सेक्टर में अपने प्राण न्यौछावर किए। प्रपौत्र योगेंद्र सिंह कमांडिंग ऑफिसर ने बालाकोट स्ट्राइक में भाग लिया। विद्यार्थियों को यह जानकर गर्व हुआ कि झज्जर जिले के विभिन्न गांवों के कई सैनिकों ने विभिन्न युद्धों में देश के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी।
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जब फ्रांस भी अहसानमंद हुआ
प्रदर्शनी में दिखाया गया कि भारतीय सैनिकों का मेमोरियल फ्रांस में भी बना हुआ है। फ्रांसीसी सेना के मार्शल फर्डिनेंड फोच ने विश्व युद्ध में भारतीय सैनिकों की बहादुरी पर नतमस्तक होकर उन्हें विदाई देते हुए कहा था कि अपने घर जाकर बताएं कि कैसे आपके देशवासियों ने फ्रांस और फ़्लैंडर्स की ठंडी उत्तरी भूमि को अपने खून से सराबोर किया, कैसे उन्होंने अपनी जोशीली भावना से इसे दुश्मन से बचाया, पूरे भारत को बताएं कि हम सभी सैनिकों की कब्रों की श्रद्धापूर्वक देखभाल करेंगे। हम उनके बलिदान की स्मृति को संजोकर रखेंगे। उन्होंने हमें रास्ता दिखाया, उन्होंने अंतिम जीत की ओर पहला कदम उठाया।''''''''
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