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Jhajjar-Bahadurgarh News: सिविल अस्पताल में तीन साल से विशेषज्ञ पद खाली, 1500 ओपीडी मरीजों को हो रही परेशानी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Dec 2025 01:44 AM IST
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Specialist positions have been vacant at the civil hospital for three years, causing problems for 1500 OPD patients.
28jjrp19- शहर का सरकारी अस्पताल। संवाद
झज्जर। सिविल अस्पताल में पिछले लंबे समय से डॉक्टरों का अभाव है। तीन साल से मुख्य विशेषज्ञों की कमी चल रही है। अस्पताल में न तो चर्म रोग, न ही छाती रोग और न ही ईएनटी विशेषज्ञ है। इसके अलावा महिला रोग, बाल रोग विशेषज्ञों की कमी है। उनके कई पद लंबे समय से खाली हैं। मरीजों को निजी अस्पताल या फिर पीजीआई जाना पड़ता है।
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सरकारी अस्पताल की चार मंजिली इमारत 14 जनवरी 2012 को कांग्रेस कार्यकाल में शुरू हुई थी। मौजूदा समय में रोजाना यहां 1500 से अधिक ओपीडी के लिए नए और पुराने मरीजों का रजिस्ट्रेशन होता है। अस्पताल में केवल एक भी फिजिशियन मेडिसन के डॉक्टर हैं। उनकी नियुक्ति भी कुछ माह पहले हुई है जबकि कुल पद तीन हैं।
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इसी तरह छाती रोग विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ, कान-नाक विशेषज्ञ के पद भी खाली हैं। इसी प्रकार शिशु रोग विशेषज्ञ के तीन पद हैं जबकि यहां नियमित एक ही डॉक्टर की नियुक्ति है। महिला रोग विशेषज्ञ केवल एक ही है जबकि बाकी पदों पर एनएचएम के तहत भर्ती की गई है।
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एसएनसीयू में भी एनएचएम के तहत डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई है जबकि विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। सिविल अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद भी खाली है।
गंभीर सड़क हादसे के मरीजों की जान बचाने की बजाय उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद सीधे रोहतक रेफर कर दिया जाता है। हालांकि इन अव्यवस्थाओं के बीच नागरिक अस्पताल की डेंटल, आई, लैब और फिजियोथैरेपी की ओपीडी बेहतर चल रही। सिविल अस्पताल की लिफ्ट कभी भी सुचारू रूप संचालित नहीं होती।
बुजुर्ग मरीजों को चार मंजिला इमारत किसी तरह रैंप और सीढ़ियों से चढ़नी पड़ती है। एसएमओ डॉ. गुरजिंद्र ने बताया कि समय-समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की मांग की जाती है और पत्र लिखा जाता है।

अल्ट्रासाउंड की सुविधा भी बंद
सिविल अस्पताल में पिछले एक माह से अल्ट्रासाउंड की सुविधा पूरी तरह से बंद हो चुकी है। यहां से सोनोलॉजिस्ट की सेवानिवृत्त हो गई थी। उसके बाद से सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड बंद पड़े हैं। केवल गर्भवती महिलाओं के ही अल्ट्रासाउंड निजी अस्पतालों में करवाए जा रहे हैं। बाकी मरीजों को जेब से पैसे लगाकर बाहर अल्ट्रासाउंड कराने पड़ रहे हैं।


कर्मचारी क्वार्टर का भी हाल बुरा
सिविल अस्पताल के कर्मचारियों के लिए बनाए गए क्वार्टरों की हालत खस्ता हो चुकी है। क्वार्टरों के मुख्य गेट के पास हमेशा पानी भरा रहता है। इससे आवागमन में दिक्कत होती है। बारिश के दिनों में यह क्वार्टर टपकते रहते हैं।

28jjrp19- शहर का सरकारी अस्पताल। संवाद

28jjrp19- शहर का सरकारी अस्पताल। संवाद

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