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मां की मेहनत से बेटे की चांदी

Tue, 31 Aug 2021 01:08 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 31 Aug 2021 01:08 AM IST
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Son's silver from mother's hard work
योगेश की मां मीना देवी। - फोटो : Bahadurgarh
टोक्यो पैरालंपिक में डिस्कस थ्रो स्पर्धा में रजत पदक विजेता खिलाड़ी योगेश कथुनिया को सफलता मिलने में उसकी मां की भी कम भूमिका नहीं रही। बेटे के साथ मां ने भी लगातार परिश्रम किया।
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बहादुरगढ़ की राधा कोली में रहते हुए वर्ष 2006 में योगेश जब पार्क में खेल रहा था तो अचानक गिरने लगा। उसने संभलने की कोशिश की लेकिन संभल नहीं पाया और गिर गया। दरअसल उसको लकवे की शिकायत थी। मां मीना देवी उसको घर लाई। स्थानीय डॉक्टरों को दिखाया। पिता सेना में थे। बहादुरगढ़ में कोई आराम नहीं मिला तो सेना के अस्पताल में दिखाया। वहां पैरालाइज होने की पुष्टि कर दी गई। लंबा इलाज चला तो उसके हाथ कुछ ठीक हो गए लेकिन पांव ठीक नहीं हुए। बेटा इकलौता है। मां टूट रहीं थीं। बेटा बड़ा होता गया। दिल्ली में स्कूल शिक्षा मिली। उसके बाद दिल्ली के किरोड़ीमल कालेज में बीकॉम में दाखिला ले लिया। योगेश का कद 6 फुट 2 इंच है। शरीर में भी मजबूत है। यहां 2017 में कई दिन तक मन में सोचकर दोस्त सचिन यादव ने योगेश से कहा कि तुम खेलों में सफल हो सकते हो। योगेश ने बताया कि कई दिन तक सोचकर उसने डिस्कस थ्रो में हाथ आजमाने का निर्णय लिया तभी से खेल रहा है। खेल में सफलता मिलती है तो मां का हौसला बढ़ जाता है। बीकॉम पूरी होने के बाद अब एमकॉम फाइनल में है। कोई बड़ी प्रतियोगिता आ जाती है इसलिए तीन बार परीक्षाएं छूट चुकी है।
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मां बोलीं- योगेश को बहुत पसंद है रस मलाई और दाल-चूरमा
मां मीना देवी ने बताया कि योगेश सुबह साढ़े तीन बजे अभ्यास के लिए जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम जाता है इसलिए वह उसके जागने से आधा घंटा पहले 3 बजे उठती है और नाश्ता बनाकर देती है। दिनभर उसकी जरूरतों का ध्यान रखती है। रहन सन और भोजन में बहुत सादे स्वभाव का है। खिचड़ी भी मिल जाए तो संतुष्ट हो जाता है। रस मलाई और दाल-चूरमा बहुत पसंद है। गत 24 अगस्त को वह जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से टोक्यो के लिए रवाना हुआ थी तब वह उसको स्टेडियम में ही रस मलाई, दाल-चूरमा और खिचड़ी देकर आईं।
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पिता ज्ञानचंद ने बताया कि उन्होंने योगेश को हमेशा सकारात्मक रहकर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। वह समय-समय पर उसको कहते रहे कि कभी नकारात्मक मत सोचो। जो भी काम करो, मन से करो। दादी सावित्री और बड़ी बहनों पूजा व आरती ने बताया कि हमारे स्नेह के लिए भाई योगेश हमेशा लालायित रहता है। -योगेश की मां मीना देवी।
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