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अहिंसा में ही सभी समस्याओं का हल : महाश्रमण
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बहादुरगढ़। वर्ष 2014 से देश में अहिंसा का संदेश देते हुए पैदल यात्रा कर रहे जैनाचार्य महाश्रमण रविवार को बहादुरगढ़ पहुंचे। कई अन्य संत भी उनके साथ थे। तेरापंथ जैन सभा बहादुरगढ़ की ओर से साधुओं का स्वागत किया गया। जैन संतों ने लोगों को अहिंसा का संदेश देते हुए कहा कि अहिंसा में दुनिया की तमाम समस्याओं का समाधान निहित है।
बहादुरगढ़ से जैनाचार्य महाश्रमण अपने काफिले के साथ दिल्ली की ओर कूच कर गए। तेरापंथ जैन सभा के स्थानीय अध्यक्ष पवन जैन ने बताया कि श्रमण भगवान महावीर के प्रमुख सिद्धांत अहिंसा के मूल भावों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रारंभ यात्रा जारी है। वर्ष 2014 में दिल्ली से प्रारंभ इस यात्रा ने काठमांडू (नेपाल) से लेकर कन्याकुमारी सहित देश के दूरस्थ स्थानों में अहिंसा की अलख जगाई है। जैन ने बताया की आज संसाधनों से भरपूर इस युग में आवागमन के साधन एवं व्यवस्थाएं हैं। इसके बावजूद आचार्य महाश्रमण भारतीय ऋषि परंपरा को जीवित रखते हुए जनोपकार के लिए पदयात्रा कर रहे हैं। देश के 23 राज्यों और नेपाल व भूटान में सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति की अलख जगाने वाले आचार्य महाश्रमण की प्रेरणा से बड़ी संख्या में लोग नशामुक्ति की प्रतिज्ञा ले चुके हैं।
पवन जैन ने बताया की जैन साधु की कठोर दिनचर्या का पालन और सुबह 4 बजे उठकर घंटों तक जप-ध्यान में लीन रहने वाले आचार्य महाश्रमण प्रतिदिन प्रवचन भी सुनाते हैं। इसके साथ-साथ उनके सान्निध्य में सर्वधर्म सम्मेलनों, प्रबुद्ध वर्ग सहित विभिन्न वर्गों की संगोष्ठियों आदि का आयोजन होता है। पदयात्रा में आचार्य महाश्रमण के साहित्य सृजन का क्रम भी जारी है। उनके नेतृत्व में 750 से अधिक साधु-साध्वियां और हजारों कार्यकर्ता देश-विदेश में समाजोत्थान के महत्वपूर्ण कार्य में जुटे हैं। दिल्ली के लाल किले से वर्ष 2014 में अहिंसा यात्रा की शुरुआत करने वाले आचार्य महाश्रमण गांवों की झोपड़ी तक शांति का संदेश देने का कार्य कर रहे हैं।
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बहादुरगढ़ से जैनाचार्य महाश्रमण अपने काफिले के साथ दिल्ली की ओर कूच कर गए। तेरापंथ जैन सभा के स्थानीय अध्यक्ष पवन जैन ने बताया कि श्रमण भगवान महावीर के प्रमुख सिद्धांत अहिंसा के मूल भावों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रारंभ यात्रा जारी है। वर्ष 2014 में दिल्ली से प्रारंभ इस यात्रा ने काठमांडू (नेपाल) से लेकर कन्याकुमारी सहित देश के दूरस्थ स्थानों में अहिंसा की अलख जगाई है। जैन ने बताया की आज संसाधनों से भरपूर इस युग में आवागमन के साधन एवं व्यवस्थाएं हैं। इसके बावजूद आचार्य महाश्रमण भारतीय ऋषि परंपरा को जीवित रखते हुए जनोपकार के लिए पदयात्रा कर रहे हैं। देश के 23 राज्यों और नेपाल व भूटान में सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति की अलख जगाने वाले आचार्य महाश्रमण की प्रेरणा से बड़ी संख्या में लोग नशामुक्ति की प्रतिज्ञा ले चुके हैं।
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पवन जैन ने बताया की जैन साधु की कठोर दिनचर्या का पालन और सुबह 4 बजे उठकर घंटों तक जप-ध्यान में लीन रहने वाले आचार्य महाश्रमण प्रतिदिन प्रवचन भी सुनाते हैं। इसके साथ-साथ उनके सान्निध्य में सर्वधर्म सम्मेलनों, प्रबुद्ध वर्ग सहित विभिन्न वर्गों की संगोष्ठियों आदि का आयोजन होता है। पदयात्रा में आचार्य महाश्रमण के साहित्य सृजन का क्रम भी जारी है। उनके नेतृत्व में 750 से अधिक साधु-साध्वियां और हजारों कार्यकर्ता देश-विदेश में समाजोत्थान के महत्वपूर्ण कार्य में जुटे हैं। दिल्ली के लाल किले से वर्ष 2014 में अहिंसा यात्रा की शुरुआत करने वाले आचार्य महाश्रमण गांवों की झोपड़ी तक शांति का संदेश देने का कार्य कर रहे हैं।
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