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कम बारिश के बावजूद बढ़ा धान का रकबा, बाजरे का घटा
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फसल पर स्प्रे करते हुए किसान
- फोटो : Jhjhar
कमजोर मानसून व सरकार के प्रयासों के बावजूद इस बार जिले में धान का रकबा बढ़ गया है। जबकि बाजरे का रकबा करीब 48 फीसदी घट गया है। गिरते भूजल स्तर की वजह से प्रदेश सरकार बाजरा, मक्का व अरहर जैसी फसलों को बढ़ावा देना चाहती है। कम बारिश व कम पानी की खपत में होने वाली फसलों की बिजाई होने से भूजल स्तर में सुधार लाने का प्रयास चल रहा है। धान की रोपाई क्षेत्र घटाने के इन प्रयासों के बावजूद भी धान की रोपाई का क्षेत्र नहीं घट रहा है। जबकि बाजरे की बिजाई का क्षेत्र घट गया है। अधिक मुनाफे के चलते धान लगाने से किसानों का मोह नहीं छूट रहा है।
ये दिया गया था लक्ष्य
सरकार की ओर से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को 30 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की रोपाई और 50 हजार हेक्टेयर भूमि में बाजरे की बिजाई करवाने का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन सरकार की तरफ से धान का क्षेत्र घटाने के आदेशों के बावजूद भी धान का क्षेत्र तो बढ़ गया है और बाजरे का क्षेत्र घट गया है। जिले में इस बार धान का क्षेत्र 30 हजार हेक्टेयर के बजाय 31,100 हेक्टेयर हो गया है। जबकि बाजरे की 50 हजार हेक्टेयर भूमि में बिजाई का लक्ष्य दिया गया था। वहीं 27,100 हेक्टेयर भूमि में बाजरे की बिजाई हो पाई है। हालांकि धान बासमती की क्षेत्र में होती है। बाजरे की सरकारी खरीद होती हैं। उसके बावजूद इस बार बाजरे का क्षेत्र पिछले वर्ष से भी आठ हजार हेक्टेयर कम हो गया है और सरकार के आदेश के अनुसार 23 हजार हेक्टेयर रकबा घट गया है। धान का क्षेत्र 1100 हेक्टेयर बढ़ गया है।
पिछली बार 44 हेक्टेयर में था धान
पिछले वर्ष इस सीजन में धान की फसल का लक्ष्य करीब 35 हजार हेक्टेयर सरकार की तरफ से दिया गया था। लेकिन उस समय भी धान का रकबा बढ़कर 44 हजार हेक्टेयर हो गया था। जबकि बाजरा भी करीब 35 हजार हेक्टेयर में बोया गया था। जून व जुलाई में कम बारिश होने के कारण समय पर बाजरे की बिजाई नहीं हो सकी।
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इस बार कम बारिश के कारण बाजरे की बिजाई समय पर नहीं हो पाई। हालांकि धान का क्षेत्र अवश्य टारगेट से बढ़ गया है।
डॉ. इंद्र सिंह डीडीए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग झज्जर।
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ये दिया गया था लक्ष्य
सरकार की ओर से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को 30 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की रोपाई और 50 हजार हेक्टेयर भूमि में बाजरे की बिजाई करवाने का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन सरकार की तरफ से धान का क्षेत्र घटाने के आदेशों के बावजूद भी धान का क्षेत्र तो बढ़ गया है और बाजरे का क्षेत्र घट गया है। जिले में इस बार धान का क्षेत्र 30 हजार हेक्टेयर के बजाय 31,100 हेक्टेयर हो गया है। जबकि बाजरे की 50 हजार हेक्टेयर भूमि में बिजाई का लक्ष्य दिया गया था। वहीं 27,100 हेक्टेयर भूमि में बाजरे की बिजाई हो पाई है। हालांकि धान बासमती की क्षेत्र में होती है। बाजरे की सरकारी खरीद होती हैं। उसके बावजूद इस बार बाजरे का क्षेत्र पिछले वर्ष से भी आठ हजार हेक्टेयर कम हो गया है और सरकार के आदेश के अनुसार 23 हजार हेक्टेयर रकबा घट गया है। धान का क्षेत्र 1100 हेक्टेयर बढ़ गया है।
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पिछली बार 44 हेक्टेयर में था धान
पिछले वर्ष इस सीजन में धान की फसल का लक्ष्य करीब 35 हजार हेक्टेयर सरकार की तरफ से दिया गया था। लेकिन उस समय भी धान का रकबा बढ़कर 44 हजार हेक्टेयर हो गया था। जबकि बाजरा भी करीब 35 हजार हेक्टेयर में बोया गया था। जून व जुलाई में कम बारिश होने के कारण समय पर बाजरे की बिजाई नहीं हो सकी।
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इस बार कम बारिश के कारण बाजरे की बिजाई समय पर नहीं हो पाई। हालांकि धान का क्षेत्र अवश्य टारगेट से बढ़ गया है।
डॉ. इंद्र सिंह डीडीए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग झज्जर।