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Jhajjar-Bahadurgarh News: हैंडमेड वस्तुएं बनाकर पुष्पा सात महिलाओं को दे रहीं रोजगार
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06jjrp06- अपने बनाए गए उत्पादों के साथ नया गांव निवासी पुष्पा। संवाद
झज्जर। नया गांव निवासी पुष्पा हैंडमेड वस्तुएं बनाकर न केवल अपने पैरों पर खड़ी हुईं बल्कि सात महिलाओं को भी रोजगार दिया। हरियाणा ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह जय बालाजी बनाया हुआ है। उन्होंने पिछले साल साबुन, शैंपू, हार्पिक, हैंडवॉश, डिशवॉश, सर्फ, नील बनाने की ट्रेनिंग ली थी।
इसके बाद दिसंबर 2024 में गांव में यूनिट लगाई जिसमें यह सामान बनाना शुरू किया। पुष्पा ने बताया कि वह कच्चा मेटीरियल दिल्ली से लेकर आती हैं। उन्होंने अपनी यूनिट मेरा के नाम से लगाई है। पुष्पा के साथ कुल सात महिलाएं जुड़ी हैं जो उनसे सामान लेकर आगे बेचती हैं।
पुष्पा ने बताया कि उन्होंने सवा लाख रुपये का स्वयं सहायता समूह से लोन लेकर अपनी यूनिट शुरू की थी। शुरुआत में काम कम था लेकिन अब हर माह 15 से 20 हजार रुपये आमदनी हो जाती है।
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साबुन में कास्टिक की जगह करती हैं ग्लिसरीन का प्रयोग
पुष्पा ने बताया कि कंपनी साबुन बनाने में कास्टिक का प्रयोग करती है जिस कारण त्वचा रूखी-सूखी हो जाती है। इस कारण मॉइस्चराइजर लगाना पड़ता है। उनके बनाए साबुन में कास्टिक की जगह ग्लिसरीन का प्रयोग किया जाता है जिससे त्वचा में यह दिक्कत नहीं आती और तेल या क्रीम लगाने की जरूरत नहीं रहती।
पहले खुद प्रयोग किया, फिर मार्केट में उतारा
पुष्पा ने बताया कि वह जितने भी उत्पाद बनाती हैं, पहले खुद घर पर प्रयोग किया ताकि बाहर बेचने पर शिकायत नहीं आए। शैंपू का प्रयोग पहले उन्होंने खुद, बेटी व सास पर किया लेकिन कोई दिक्कत नहीं हुई। वह पांच प्रकार के साबुन बनाती है जिसमें मुलतानी मिट्टी, नीम के पत्ते, गुलाब की पत्ती शामिल हैं।
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इसके बाद दिसंबर 2024 में गांव में यूनिट लगाई जिसमें यह सामान बनाना शुरू किया। पुष्पा ने बताया कि वह कच्चा मेटीरियल दिल्ली से लेकर आती हैं। उन्होंने अपनी यूनिट मेरा के नाम से लगाई है। पुष्पा के साथ कुल सात महिलाएं जुड़ी हैं जो उनसे सामान लेकर आगे बेचती हैं।
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पुष्पा ने बताया कि उन्होंने सवा लाख रुपये का स्वयं सहायता समूह से लोन लेकर अपनी यूनिट शुरू की थी। शुरुआत में काम कम था लेकिन अब हर माह 15 से 20 हजार रुपये आमदनी हो जाती है।
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साबुन में कास्टिक की जगह करती हैं ग्लिसरीन का प्रयोग
पुष्पा ने बताया कि कंपनी साबुन बनाने में कास्टिक का प्रयोग करती है जिस कारण त्वचा रूखी-सूखी हो जाती है। इस कारण मॉइस्चराइजर लगाना पड़ता है। उनके बनाए साबुन में कास्टिक की जगह ग्लिसरीन का प्रयोग किया जाता है जिससे त्वचा में यह दिक्कत नहीं आती और तेल या क्रीम लगाने की जरूरत नहीं रहती।
पहले खुद प्रयोग किया, फिर मार्केट में उतारा
पुष्पा ने बताया कि वह जितने भी उत्पाद बनाती हैं, पहले खुद घर पर प्रयोग किया ताकि बाहर बेचने पर शिकायत नहीं आए। शैंपू का प्रयोग पहले उन्होंने खुद, बेटी व सास पर किया लेकिन कोई दिक्कत नहीं हुई। वह पांच प्रकार के साबुन बनाती है जिसमें मुलतानी मिट्टी, नीम के पत्ते, गुलाब की पत्ती शामिल हैं।