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Jhajjar-Bahadurgarh News: गणेश चतुर्थी पर्व की तैयारी जोरों पर... सजने लगे बाजार

Sat, 16 Sep 2023 02:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Sat, 16 Sep 2023 02:00 AM IST
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Preparations for Ganesh Chaturthi festival in full swing... markets started getting decorated
बाजार में सजी भगवान गणेश की प्रतिमा। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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झज्जर। गणेश चतुर्थी को लेकर शहर में तैयारी शुरू हो गई है। दस दिन चलने वाले इस उत्सव को लेकर बाजार में श्रद्धालुओं में उत्साह है। शहर में गणेश चतुर्थी को लेकर बाजार सजने लगे हैं। जहां घरों पर महिलाएं तैयारी में जुटी हैं, वहीं दूसरी तरफ बाजार में भगवान गणेश की कई तरह की मूर्ति बाजार में श्रद्धालुओं को अपनी तरफ आकर्षित कर रही हैं।
मंगलवार 19 सितंबर को गणेश चतुर्थी का पर्व है। गणेश चतुर्थी को श्रद्धालु हर्षोल्लास के साथ मनाने की तैयारी में हैं। इसको लेकर दुकानदारों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। दुकानदारों की ओर से भगवान गणेश की मूर्ति मंगवा ली हैं, जिनको अपनी दुकानों में सजाना शुरू कर दिया है। ग्राहक भी अपनी पसंद के अनुसार दुकानों पर पहुंचकर खरीदारी करने में जुट गए हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि वह भगवान गणेश को प्रसन्न करने में किसी भी प्रकार की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।
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बेरी गेट शिव मंदिर के पंडित देवाचार्य सुनील दत्त शास्त्री ने बताया कि मान्यताओं के मुताबिक भाद्र के शुक्ल चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। यही कारण है कि इस दिन गणपति की स्थापना करके गणेशोत्सव मनाया जाता है। गणपति उत्सव को लेकर गणपति की स्थापना के बाद नौ दिन घरों में भगवान श्रीगणेश विराजमान रहेंगे। विसर्जन 28 सितंबर को होगा। हिन्दू संस्कृति में किसी भी कार्य की सफलता के लिए सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। गणेश के पूजन से भक्तों को सुख, समृद्धि और यश प्राप्ति होती है।
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उन्होंने बताया कि भगवान गणेश की मूर्ति को उत्तर दिशा में स्थापित करना शुभ होता है। यह दिशा मां लक्ष्मी और भगवान शिव की दिशा मानी जाती है। ऐसे में गणेशजी का मुख इस दिशा में रखने से गणेश भगवान के साथ-साथ महादेव और मां लक्ष्मी का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।

300 साल बाद बन रहा ऐसा दुर्लभ
इस बार की गणेश चतुर्थी बहुत विशेष है। 300 साल बाद ऐसा दुर्लभ योग बन रहा है, जिसका फायदा गणेशजी के भक्त उठा सकते हैं। तीन योग है, जिसमें से एक ब्रह्म योग, दूसरा शुक्ल योग और तीसरा शुभ योग है। ये तीनों ही योग लगभग 300 साल बाद मिलकर दुर्लभ योग बना रहे हैं।
- ब्रह्म योग- आचार्य बताते हैं कि ब्रह्मा योग में ब्रम्हा, विष्णु, और महेश तीनों शक्तियां वहां पर एक साथ साक्षात मौजूद रहती हैं।
- शुक्ल योग- शुक्ल योग में जितने भी जातक गणेश चतुर्थी में शामिल होते हैं। गणेशजी की आरती पूजन करते हैं। उनके घर में शुभ ही शुभ होता है।
- शुभ योग- शुभ योग यानी गणेशजी के भक्तों के घरों में भी शुभ लाभ की स्थापना हो जाती है। आमदनी में बरकत अधिक और हानि कम होती है और घर में जो भी रहते हैं, वह स्वस्थ रहते हैं।

साथ में हो मूषक

जब भी गणेश भगवान की मूर्ति खरीदें तो ध्यान रखें कि मूषक उनके साथ हो। मूषक यानि चूहा, जो भगवान गणेश के वाहन हैं। बिना मूषक के गणेश भगवान की पूजा अधूरी मानी जाती है।
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