उपद्रव को लेकर निशाने पर आए एसपी का हुआ तबादला
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सुमित ने हालांकि तबादले को रूटीन बताया है, लेकिन यहां 20 व 21 फरवरी को हुए जबरदस्त उपद्रव में उन पर उपद्रवियों को जानबूझ कर न रोकने के आरोप लगने के बाद से ही उनका यहां से हटना तय माना जा रहा था। उपद्रव के दौरान डीसी व एसपी के बीच मतभेद भी उजागर हुआ था।
सुमित कुमार ने 7 मार्च, 2015 को झज्जर जिले में एसपी का चार्ज लिया था। वे जिले के 21वें एसपी थे। कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के साथ उनकी सही पटरी बैठने के कारण उनका कार्यकाल यहां लंबा माना जा रहा था, लेकिन जाट आरक्षण को लेकर शुरू हुए आंदोलन के दौरान भड़के उपद्रव में वे 35 बिरादरी के निशाने पर आ गए।
छावनी मोहल्ला में जातीय हिंसा के बाद प्रदेश व केंद्र के कई मंत्री यहां हालात का जायजा लेने पहुंचे। तब लोगों ने पुलिस पर जानबूझ कर कार्रवाई न करने के आरोप जड़े। बार बार यहां प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले की मांग उठी। हालांकि कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी यहां आंदोलन के चलते स्पेशल आईजी केके राव के सुपुर्द थी, लेकिन फिर भी माना यही गया कि एसपी ने जानमाल की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए। फोन भी नहीं उठाए।
डीसी अनीता यादव के साथ भी एसपी के मतभेद उभर कर सामने आए। अब अंबाला में डीसीपी अर्बन जश्नदीप रंधावा झज्जर जिले के 22वें एसपी होंगे। झज्जर में जिला बनने के बाद 24 अप्रैल, 1998 को केके सिंधु यहां के पहले एसपी थे।े