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Jhajjar-Bahadurgarh News: खेल मैदान सूने, मोबाइल में कैद बचपन
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02jjrp10- पुलिस आयुक्त डॉ. राजश्री सिंह। स्रोत-पुलिस
झज्जर। पुलिस आयुक्त डॉ. राजश्री सिंह ने कहा कि आज के युग में तकनीक ने हमारे जीवन को जितना आसान बनाया है, उतना ही खतरनाक प्रभाव भी हमारे सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर डाल रही है। मोबाइल जो विचारों का आदान-प्रदान करने का साधन था, अब बच्चों के मानसिक संतुलन को बिगाड़ने वाला एक अदृश्य खतरा बन चुका है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार नशा और अपराध युवाओं को बर्बादी की राह पर ले जाते हैं, उसी प्रकार मोबाइल और इंटरनेट की लत बच्चों के जीवन को अंधकार की ओर धकेल रही है। आज के बच्चे अपने बचपन को वर्चुअल दुनिया की कैद में खोते जा रहे हैं। खेल के मैदान सूने हैं, गलियों में बच्चों की हंसी की जगह अब मोबाइल की रिंगटोन सुनाई देती है।
यह परिवर्तन न केवल चिंताजनक है बल्कि आने वाले समय के लिए चेतावनी भी है। मोबाइल की अधिकता बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर गंभीर असर डाल रही है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की रोशनी कम हो रही है, नींद का पैटर्न बिगड़ रहा है। सबसे महत्वपूर्ण एकाग्रता और भावनात्मक स्थिरता खत्म होती जा रही है।
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बच्चे अब बातचीत से दूर होकर आभासी दुनिया में जीने लगे हैं। जहां सच्चे रिश्तों की जगह लाइक्स और फॉलोअर्स ने ले ली है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को मोबाइल से नहीं, मोह और ममता से जोड़ें। बच्चों को समय दें, उनके साथ खेलें, कहानियां सुनाएं और उनके सपनों को दिशा दें।
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उन्होंने कहा कि जिस प्रकार नशा और अपराध युवाओं को बर्बादी की राह पर ले जाते हैं, उसी प्रकार मोबाइल और इंटरनेट की लत बच्चों के जीवन को अंधकार की ओर धकेल रही है। आज के बच्चे अपने बचपन को वर्चुअल दुनिया की कैद में खोते जा रहे हैं। खेल के मैदान सूने हैं, गलियों में बच्चों की हंसी की जगह अब मोबाइल की रिंगटोन सुनाई देती है।
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यह परिवर्तन न केवल चिंताजनक है बल्कि आने वाले समय के लिए चेतावनी भी है। मोबाइल की अधिकता बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर गंभीर असर डाल रही है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की रोशनी कम हो रही है, नींद का पैटर्न बिगड़ रहा है। सबसे महत्वपूर्ण एकाग्रता और भावनात्मक स्थिरता खत्म होती जा रही है।
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बच्चे अब बातचीत से दूर होकर आभासी दुनिया में जीने लगे हैं। जहां सच्चे रिश्तों की जगह लाइक्स और फॉलोअर्स ने ले ली है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को मोबाइल से नहीं, मोह और ममता से जोड़ें। बच्चों को समय दें, उनके साथ खेलें, कहानियां सुनाएं और उनके सपनों को दिशा दें।