{"_id":"625dc8fdb1165955b66eb1dd","slug":"people-suffering-from-cough-viral-fever-in-every-house-jhjhar-news-rtk644261681","type":"story","status":"publish","title_hn":"हर घर में खांसी, वायरल बुखार से लोग पीड़ित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हर घर में खांसी, वायरल बुखार से लोग पीड़ित
विज्ञापन
झज्जर। इन दिनों सूरज के तेवर तीखे हो गए हैं। इससे लोग बीमार भी पड़ रहे हैं। इस वजह से अस्पतालों में डॉक्टरों से परामर्श के लिए भीड़ लग रही है। हर घर में खांसी, वायरल बुखार से लोग पीड़ित हैं। वहीं सामान्य अस्पताल में चार दिन से एक्स-रे मशीन खराब पड़ी है। इससे दूर दराज से आने वाले मरीजों को काफी परेशानी को सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को मजबूरन निजी केंद्रों पर एक्सरे कराना पड़ रहा है। इससे लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। चिकित्सकों की ओर से मरीजों को बेरी व बहादुरगढ़ से एक्स-रे कराने की सलाह दी जा रही है।
सामान्य अस्पताल में डॉक्टरों की कमी होने के कारण रोगियों को पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया जाता है। सामान्य अस्पताल में मौसम परिवर्तन के कारण बच्चे ज्यादा बीमार हो रहे हैं। प्रतिदिन 150-200 बच्चों की ओपीडी की जा रही है। जबकि सामान्य अस्पताल की ओपीडी को देखा जाए तो हर रोज एक हजार से 1100 तक मरीज परामर्श के लिए आते हैं। वहीं गर्मी के मौसम व फसल कटाई के सीजन से सामान्य अस्पताल में मरीजों की में इजाफा हो रहा है। लोग आंखों, डायरिया, अस्थमा, एलर्जी, वायरल बुखार के अलावा अन्य बीमारियों के मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। बुजुर्गों और बच्चों की संख्या ज्यादा होती है। दिन में भीषण गर्मी पड़ने के कारण लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है। सरकारी व निजी अस्पताल, नर्सिंग होम मरीजों से भरे हुए हैैं। करीब सभी घरों में खांसी, वायरल बुखार से लोग पीड़ित हैं। वहीं गेहूं की कटाई व कढ़ाई के दौरान उड़ने वाली धूल से अस्थमा के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से अस्थमा के मरीजों के भाप देने के अलावा अन्य सुविधाए तो दुरुस्त दिखाई दीं।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ प्रीती दुग्गल ने बताया कि दोपहर में आवश्यकता होने पर ही घरों से बाहर निकलना चाहिए। गर्मी के बढ़ते प्रकोप का हल्के में नहीं लेना चाहिए, अत्यधिक गर्मी के कारण मरीजों को चक्कर आना, उल्टी,दस्त लगना जैसे लक्षण आ जाते है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बदलते मौसम में बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बच्चों के खानपान में पौष्टिक भोजन व संतुलित आहार देने के लिए सलाह दी जा रही है। मौसम परिवर्तन के कारण अस्थमा व टीबी के मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे मरीजों को अपने आसपास प्रदूषण नहीं फैलने देना चाहिए। मास्क का प्रयोग करना चाहिए। वहीं मौसमी बीमारी से निजी अस्पताल व झोलाछाप डॉक्टर चांदी कूट रहे हैं। निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ रही है तो निजी लैब में विभिन्न प्रकार के रोगों से संबंधित टेस्ट करवाने के लिए मरीजों की लाइन लगी हुई है।
विज्ञापन
- वर्जन
गर्मी के कारण मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। अस्पताल में मरीजों के लिए दवाइयों की कोई कमी नहीं है, लेकिन फिजिशियन की कमी है, जल्द ही वह भी पूरी हो जाएगी। गर्मी के मौसम के दौरान बच्चों व बूढ़ों का विशेष ध्यान रखें। एक्सरे मशीन को ठीक करने के लिए इंजीनियर को बुलाया गया है। जल्द ही एक्सरे मशीन को ठीक करवा दिया जाएगा।
- डॉ. कनिका, एसएमओ, सामान्य अस्पताल, झज्जर।
विज्ञापन
सामान्य अस्पताल में डॉक्टरों की कमी होने के कारण रोगियों को पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया जाता है। सामान्य अस्पताल में मौसम परिवर्तन के कारण बच्चे ज्यादा बीमार हो रहे हैं। प्रतिदिन 150-200 बच्चों की ओपीडी की जा रही है। जबकि सामान्य अस्पताल की ओपीडी को देखा जाए तो हर रोज एक हजार से 1100 तक मरीज परामर्श के लिए आते हैं। वहीं गर्मी के मौसम व फसल कटाई के सीजन से सामान्य अस्पताल में मरीजों की में इजाफा हो रहा है। लोग आंखों, डायरिया, अस्थमा, एलर्जी, वायरल बुखार के अलावा अन्य बीमारियों के मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। बुजुर्गों और बच्चों की संख्या ज्यादा होती है। दिन में भीषण गर्मी पड़ने के कारण लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है। सरकारी व निजी अस्पताल, नर्सिंग होम मरीजों से भरे हुए हैैं। करीब सभी घरों में खांसी, वायरल बुखार से लोग पीड़ित हैं। वहीं गेहूं की कटाई व कढ़ाई के दौरान उड़ने वाली धूल से अस्थमा के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से अस्थमा के मरीजों के भाप देने के अलावा अन्य सुविधाए तो दुरुस्त दिखाई दीं।
विज्ञापन
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ प्रीती दुग्गल ने बताया कि दोपहर में आवश्यकता होने पर ही घरों से बाहर निकलना चाहिए। गर्मी के बढ़ते प्रकोप का हल्के में नहीं लेना चाहिए, अत्यधिक गर्मी के कारण मरीजों को चक्कर आना, उल्टी,दस्त लगना जैसे लक्षण आ जाते है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बदलते मौसम में बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बच्चों के खानपान में पौष्टिक भोजन व संतुलित आहार देने के लिए सलाह दी जा रही है। मौसम परिवर्तन के कारण अस्थमा व टीबी के मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे मरीजों को अपने आसपास प्रदूषण नहीं फैलने देना चाहिए। मास्क का प्रयोग करना चाहिए। वहीं मौसमी बीमारी से निजी अस्पताल व झोलाछाप डॉक्टर चांदी कूट रहे हैं। निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ रही है तो निजी लैब में विभिन्न प्रकार के रोगों से संबंधित टेस्ट करवाने के लिए मरीजों की लाइन लगी हुई है।
विज्ञापन
- वर्जन
गर्मी के कारण मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। अस्पताल में मरीजों के लिए दवाइयों की कोई कमी नहीं है, लेकिन फिजिशियन की कमी है, जल्द ही वह भी पूरी हो जाएगी। गर्मी के मौसम के दौरान बच्चों व बूढ़ों का विशेष ध्यान रखें। एक्सरे मशीन को ठीक करने के लिए इंजीनियर को बुलाया गया है। जल्द ही एक्सरे मशीन को ठीक करवा दिया जाएगा।
- डॉ. कनिका, एसएमओ, सामान्य अस्पताल, झज्जर।