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Jhajjar-Bahadurgarh News: पटवारी ने सजरा बनाने से किया इंकार, पीड़ित ने जिला उपायुक्त से लगाई गुहार
Fri, 12 Sep 2025 02:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Fri, 12 Sep 2025 02:53 AM IST
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-फोटो 52 : नरेंद्र सिंह, शिकायतकर्ता।
बहादुरगढ़। बहादुरगढ़ के पटवारी पर जमीन की पैमाइश करने से इंकार करने और आवेदक को लगातार टालने के आरोप लगे हैं। बालोर में जिला उपायुक्त के रात्रि ठहराव कार्यक्रम में लगाए गए खुले दरबार में नरेंद्र सिंह निवासी जटवाड़ा मोहल्ला ने उपायुक्त झज्जर को लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई थी। नरेंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने 20 दिसंबर 2023 को बहादुरगढ़ पटवारी को अपनी जमीन की पैमाइश के लिए आवेदन दिया था लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद पैमाइश नहीं की गई।
शिकायतकर्ता के मुताबिक 16 फरवरी 2025 को एसडीएम बहादुरगढ़ की ओर से आयोजित समाधान शिविर में भी लिखित शिकायत दी थी और 28 फरवरी 2025 को सीएम विंडो (शिकायत नंबर 020072) पर भी शिकायत दर्ज करवाई लेकिन किसी भी स्तर पर समाधान नहीं हुआ।
नरेंद्र ने बताया कि पटवारी बार-बार यह कहकर टाल देते हैं कि बहादुरगढ़ का सिजरा मौजूद नहीं है इसलिए पैमाइश नहीं हो सकती। उन्हें दफ्तर से बिना समस्या का समाधान किए भेज दिया जाता है। वहीं आरटीआई के तहत तहसीलदार कार्यालय से मिली जानकारी में स्पष्ट हुआ है कि साल 2024 में रिकॉर्ड अनुसार कुल 200 पैमाइश हुईं हैं। साथ ही आवेदन मिलने के 45 दिन के भीतर निशानदेही करना नियम है। इसके बावजूद उनकी जमीन की निशानदेही अब तक नहीं हुई।
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नरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है जिससे उनके जीवन की शांति भंग हो गई है और वह अपने दैनिक कार्य भी नहीं कर पा रहे। उन्होंने उपायुक्त से आग्रह किया है कि उनकी जमीन की पैमाइश करवाई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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शिकायतकर्ता के मुताबिक 16 फरवरी 2025 को एसडीएम बहादुरगढ़ की ओर से आयोजित समाधान शिविर में भी लिखित शिकायत दी थी और 28 फरवरी 2025 को सीएम विंडो (शिकायत नंबर 020072) पर भी शिकायत दर्ज करवाई लेकिन किसी भी स्तर पर समाधान नहीं हुआ।
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नरेंद्र ने बताया कि पटवारी बार-बार यह कहकर टाल देते हैं कि बहादुरगढ़ का सिजरा मौजूद नहीं है इसलिए पैमाइश नहीं हो सकती। उन्हें दफ्तर से बिना समस्या का समाधान किए भेज दिया जाता है। वहीं आरटीआई के तहत तहसीलदार कार्यालय से मिली जानकारी में स्पष्ट हुआ है कि साल 2024 में रिकॉर्ड अनुसार कुल 200 पैमाइश हुईं हैं। साथ ही आवेदन मिलने के 45 दिन के भीतर निशानदेही करना नियम है। इसके बावजूद उनकी जमीन की निशानदेही अब तक नहीं हुई।
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नरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है जिससे उनके जीवन की शांति भंग हो गई है और वह अपने दैनिक कार्य भी नहीं कर पा रहे। उन्होंने उपायुक्त से आग्रह किया है कि उनकी जमीन की पैमाइश करवाई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।