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किसानों के लिए समस्या नहीं मुनाफे का सौदा बनी पराली
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धान निकालने के बाद खेतों में सुखाने के लिए रखी गई पराली। संवाद
- फोटो : Bahadurgarh
मनोज कौशिक
बादली। आमतौर पर धान की पराली को जलाकर नष्ट करने वाले किसान अब धीरे-धीरे जागरूक हो रहे हैं। पराली अब किसानों के लिए समस्या नहीं मुनाफे का सौदा बन रही है। किसान को धान की फसल का भाव भले ही मनमाफिक न मिल रहा हो मगर वे पराली से कुछ मुनाफा जरूर कमा रहे हैं। अब किसान पराली को खेतों में जलाने के बजाय व्यापारियों को बेचने में रुचि दिखाने लगे हैं।
हरियाणा के धान की पराली अब दिल्ली, राजस्थान और गुजरात में भी बिक रही है। पराली बेचने को लेकर किसानों में उत्साह भी है। चावल, धान की तरह पराली का व्यापार भी लाखों में हो रहा है। राजस्थान के कुछ व्यापारी पराली के बंडल बनाकर खरीद रहे हैं। किसान वेदव्रत, सोनू, संजय, प्रदीप और दीपक का कहना है कि उनका पराली से गेहूं की बिजाई करने का खर्च निकल जाता है। पराली के व्यापारी इस बार गत वर्ष की अपेक्षा दो गुणा पराली का स्टॉक कर रहे हैं। किसान अगर खेत में ही पराली बेचता है तो उसको 4000 से 5000 रुपये प्रति एकड़ मिल रहे हैं। (संवाद)
पराली का स्टॉक बना जोखिम भरा
पराली व्यापारी रणधीर, दीपक और कर्मबीर ने बताया कि पराली के बिकने से पहले उन्हें काफी डर बना रहता है। उनके द्वारा खरीदने के बाद खुले में पराली का स्टॉक लगा होता है। सूखी पराली में उन्हें हर समय आग लगने का भय रहता है। व्यापारियों ने बताया कि किसी भी व्यापारी के पास पराली का स्टॉक लगाने के लिए गोदाम नहीं है। वहीं बरसात आने से पराली भीग जाती है तो गली-सड़ी पराली का पूरा दाम नहीं मिलता है।
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कहां प्रयोग होती है पराली
पराली व्यापारी सूरजभान, भैयाराम, आकाश ने बताया कि राजस्थान में चारे के लिए बहुत डिमांड है। अन्य प्रदेशों में भी पराली सोफे बनाने, सेनेटरी सामान, टूटी, टायल अन्य कई सामान की पैकिंग में इस्तेमाल की जाती है। हरे चारे में मिलाकर इसका प्रयोग मवेशियों के आहार में भी किया जाने लगा है। कृषि अधिकारी सुनील कौशिक के अनुसार एक टन पराली में 5.50 किलो ग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलो फॉस्फोरस, 1.30 केजी सल्फर और 25 केजी पोटाश होता है। ऐसे खाद की कीमत बाजार में 5 हजार रुपये प्रति टन है। ऐसे में इससे गैस प्लांट भी लगाया जा सकता है।
वर्जन
पहले जहां गेहूं की बिजाई की तैयारी के लिए किसान जल्दबाजी में पराली जला देता था वहीं अब प्रशासन की पैनी नजर पराली जलाने वाले किसानों पर है। किसानों को जागरूक करने के लिए पटवारियों की टीम निगरानी के लिए बनाई गई है ताकि प्रदूषण स्तर को बढ़ने से रोका जा सके।
- विशाल कुमार, एसडीएम बादली
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बादली। आमतौर पर धान की पराली को जलाकर नष्ट करने वाले किसान अब धीरे-धीरे जागरूक हो रहे हैं। पराली अब किसानों के लिए समस्या नहीं मुनाफे का सौदा बन रही है। किसान को धान की फसल का भाव भले ही मनमाफिक न मिल रहा हो मगर वे पराली से कुछ मुनाफा जरूर कमा रहे हैं। अब किसान पराली को खेतों में जलाने के बजाय व्यापारियों को बेचने में रुचि दिखाने लगे हैं।
हरियाणा के धान की पराली अब दिल्ली, राजस्थान और गुजरात में भी बिक रही है। पराली बेचने को लेकर किसानों में उत्साह भी है। चावल, धान की तरह पराली का व्यापार भी लाखों में हो रहा है। राजस्थान के कुछ व्यापारी पराली के बंडल बनाकर खरीद रहे हैं। किसान वेदव्रत, सोनू, संजय, प्रदीप और दीपक का कहना है कि उनका पराली से गेहूं की बिजाई करने का खर्च निकल जाता है। पराली के व्यापारी इस बार गत वर्ष की अपेक्षा दो गुणा पराली का स्टॉक कर रहे हैं। किसान अगर खेत में ही पराली बेचता है तो उसको 4000 से 5000 रुपये प्रति एकड़ मिल रहे हैं। (संवाद)
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पराली का स्टॉक बना जोखिम भरा
पराली व्यापारी रणधीर, दीपक और कर्मबीर ने बताया कि पराली के बिकने से पहले उन्हें काफी डर बना रहता है। उनके द्वारा खरीदने के बाद खुले में पराली का स्टॉक लगा होता है। सूखी पराली में उन्हें हर समय आग लगने का भय रहता है। व्यापारियों ने बताया कि किसी भी व्यापारी के पास पराली का स्टॉक लगाने के लिए गोदाम नहीं है। वहीं बरसात आने से पराली भीग जाती है तो गली-सड़ी पराली का पूरा दाम नहीं मिलता है।
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कहां प्रयोग होती है पराली
पराली व्यापारी सूरजभान, भैयाराम, आकाश ने बताया कि राजस्थान में चारे के लिए बहुत डिमांड है। अन्य प्रदेशों में भी पराली सोफे बनाने, सेनेटरी सामान, टूटी, टायल अन्य कई सामान की पैकिंग में इस्तेमाल की जाती है। हरे चारे में मिलाकर इसका प्रयोग मवेशियों के आहार में भी किया जाने लगा है। कृषि अधिकारी सुनील कौशिक के अनुसार एक टन पराली में 5.50 किलो ग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलो फॉस्फोरस, 1.30 केजी सल्फर और 25 केजी पोटाश होता है। ऐसे खाद की कीमत बाजार में 5 हजार रुपये प्रति टन है। ऐसे में इससे गैस प्लांट भी लगाया जा सकता है।
वर्जन
पहले जहां गेहूं की बिजाई की तैयारी के लिए किसान जल्दबाजी में पराली जला देता था वहीं अब प्रशासन की पैनी नजर पराली जलाने वाले किसानों पर है। किसानों को जागरूक करने के लिए पटवारियों की टीम निगरानी के लिए बनाई गई है ताकि प्रदूषण स्तर को बढ़ने से रोका जा सके।
- विशाल कुमार, एसडीएम बादली