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Jhajjar-Bahadurgarh News: दलित कोच हरिओम की शिकायत पर पंचायत मंत्री ने लिया संज्ञान, अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश
Thu, 26 Jun 2025 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 26 Jun 2025 01:49 AM IST
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25jjrp17- मंत्री कृष्णलाल पंवार को ज्ञापन सौंपते ग्रामीण। स्रोत-कोच
साल्हावास। सुंदरेहटी गांव की खेल नर्सरी के लिए नियुक्त दलित कोच हरिओम का मामला सामने आते ही बुधवार को पंचायत मंत्री कृष्णलाल पंवार ने इस पर अधिकारियों को संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोच ने आरोप लगाया है कि सरकार की ओर से जारी खेल नर्सरी की लिस्ट में उसे कोच नियुक्त किया है। इसके बावजूद सरपंच उनके दस्तावेज सत्यापित नहीं कर रहा है।
बुधवार को कोच हरिओर अपने मामले को लेकर ग्रामीणों व परिजनों के साथ पंचायत मंत्री कृष्णलाल पंवार के समक्ष पहुंचा। कोच हरिओम ने बताया कि वह इस मामले में जिला उपायुक्त झज्जर से भी काफी बार मिल चुका है और जिला विकास और पंचायत अधिकारी व खंड विकास पंचायत अधिकारी के समक्ष भी गुहार लगा चुका हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
इतना ही नहीं कोच हरिओम ने खंड स्तरीय अधिकारियों के ऊपर भी आरोप लगाते हुए कहा कि जान-बुझकर उनके खेल नर्सरी के दस्तावेज सत्यापित नहीं किए जा रहे हैं। सरकार ने सुंदरेहटी गांव की खेल नर्सरी में अनुसूचित जाति का कोच तो उन्हें नियुक्त कर दिया, लेकिन यह सरपंच को मंजूर नहीं है। वहीं खंड स्तरीय अधिकारी भी उन्हें ये कहते हैं कि गांव वालों की सहमति तुम्हारे लिए नहीं बन रही है।
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गांव में तीन बार पंचायत हो चुकी है, लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि सरपंच द्वारा नर्सरी दस्तावेज सत्यापित नहीं होने से 25 खिलाड़ियों का खुराक भत्ता भी शुरू नहीं हो सका है।
दलित कोच को मिली खेल नर्सरी, ये रास नहीं आया
सुंदरेहटी गांव की खेल नर्सरी हरिओम को अलॉट की गई है। वह अनुसूचित जाति से आते हैं। इस नर्सरी के लिए दो कोच और भी दावेदार थे, जो पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। हरिओम के मुताबिक अनुसूचित समाज के कोच को खेल नर्सरी मिलना ग्रामीणों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। इसी कारण गांव की खेल नर्सरी अब राजनीति के अखाड़े में तब्दील हो चुकी है। हालांकि आवेदन करते वक्त ऐसा कतई नहीं था। अनुसूचित जाति से आने वाले गांव के सरपंच कृष्ण कुमार ने आवेदन पर मोहर लगाकर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन सूची जारी होने के बाद खेल नर्सरी उन्हें मिलना रास नहीं आ रहा है।
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बुधवार को कोच हरिओर अपने मामले को लेकर ग्रामीणों व परिजनों के साथ पंचायत मंत्री कृष्णलाल पंवार के समक्ष पहुंचा। कोच हरिओम ने बताया कि वह इस मामले में जिला उपायुक्त झज्जर से भी काफी बार मिल चुका है और जिला विकास और पंचायत अधिकारी व खंड विकास पंचायत अधिकारी के समक्ष भी गुहार लगा चुका हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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इतना ही नहीं कोच हरिओम ने खंड स्तरीय अधिकारियों के ऊपर भी आरोप लगाते हुए कहा कि जान-बुझकर उनके खेल नर्सरी के दस्तावेज सत्यापित नहीं किए जा रहे हैं। सरकार ने सुंदरेहटी गांव की खेल नर्सरी में अनुसूचित जाति का कोच तो उन्हें नियुक्त कर दिया, लेकिन यह सरपंच को मंजूर नहीं है। वहीं खंड स्तरीय अधिकारी भी उन्हें ये कहते हैं कि गांव वालों की सहमति तुम्हारे लिए नहीं बन रही है।
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गांव में तीन बार पंचायत हो चुकी है, लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि सरपंच द्वारा नर्सरी दस्तावेज सत्यापित नहीं होने से 25 खिलाड़ियों का खुराक भत्ता भी शुरू नहीं हो सका है।
दलित कोच को मिली खेल नर्सरी, ये रास नहीं आया
सुंदरेहटी गांव की खेल नर्सरी हरिओम को अलॉट की गई है। वह अनुसूचित जाति से आते हैं। इस नर्सरी के लिए दो कोच और भी दावेदार थे, जो पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। हरिओम के मुताबिक अनुसूचित समाज के कोच को खेल नर्सरी मिलना ग्रामीणों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। इसी कारण गांव की खेल नर्सरी अब राजनीति के अखाड़े में तब्दील हो चुकी है। हालांकि आवेदन करते वक्त ऐसा कतई नहीं था। अनुसूचित जाति से आने वाले गांव के सरपंच कृष्ण कुमार ने आवेदन पर मोहर लगाकर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन सूची जारी होने के बाद खेल नर्सरी उन्हें मिलना रास नहीं आ रहा है।