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Jhajjar-Bahadurgarh News: अब पीएचसी, सीएचसी में 5 और सिविल अस्पताल की ओपीडी में 10 मरीजों की होगी टीबी की जांच

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 23 Aug 2025 01:40 AM IST
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Now 5 patients will be tested for TB in PHC, CHC and 10 patients in OPD of Civil Hospital
मरीजों की पहचान के लिए टीबी सैंपलिंग का दायरा बढ़ाया
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संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। टीबी मुक्त अभियान के लक्ष्य को देखते हुए अब आईपीडी और ओपीडी में आने वाले मरीजों के टीबी सैंपलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके लिए मुख्यालय की तरफ से सैंपलिंग बढ़ाने के निर्देश जारी किए गए हैं। पीएचसी और सीएचसी की ओपीडी में आने वाले मरीजों का 5 प्रतिशत तो वहीं सिविल अस्पतालों में आईपीडी में आने वाले मरीजों का 10 प्रतिशत के सैंपल जांचे जाएंगे ताकि अधिक से अधिक मरीजों की पहचान हो सके।
वर्तमान में जिले में 1600 से अधिक टीबी मरीज हैं, जिनका उपचार जारी है। साथ ही संवेदनशील मरीज जिनमें मधुमेह, धूम्रपान करने वाले, डि-एडिक्शन केंद्र के मरीजों के भी स्यूटम सैंपल होंगे। कई बार देखने में आता है कि सांस की बीमारियों से पीड़ित मरीज, मधुमेह के मरीजों में टीबी के लक्षण मिलने की अधिक संभावना रहती है।
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वहीं सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ प्राइवेट अस्पतालों में भी ओपीडी के मरीजों की जांच करवाना अनिवार्य होता है। जिला टीबी विंग ने प्राइवेट अस्पतालों को टीबी जांच से संबंधित पोस्टर व बैनर भी दे दिए गए हैं। वहीं, निक्षय मित्र अनुसंधान के तहत अब स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ अन्य विभागों में भी निक्षय मित्र बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक मरीजों को सहारा मिल सके।
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इंटर्नशिफाइड एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान जारी
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इंटर्नशिफाइड एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान चलाया जा रहा है। मोबाइल मेडिकल यूनिट की बस रोस्टर अनुसार गांव एवं शहर में लोगों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। जांच के दौरान जिन मरीजों में टीबी के लक्षण पाए जाते हैं, उनके बलगम के सैंपल लेकर टीबी जांच की जाती है। इसके साथ ही एक्सरे किए जाते हैं


यह है टीबी के लक्षण
लगातार खांसी आना, बुखार आना, शरीर में गांठ का होना ,रात को सोते समय पसीना आना, वजन का काम होना, कुछ अन्य लक्षण पाए जाते हैं।

वर्जन
सीएचसी, पीएचसी की ओपीडी में पांच और सिविल अस्पतालों की ओपीडी में 10 प्रतिशत की बलगम की जांच के निर्देश दिए गए हैं। इसका दायरा इसलिए बढ़ाया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच हो सके और टीबी का पता लग सके और समय पर उनका इलाज हो सके।
डॉ. कुनाल कादियान, नोडल अधिकारी, टीबी
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