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कैश न होने पर भड़के लोग, दुल्हेड़ा में लगाया जाम
अमर उाला ब्यूरो/बहादुरगढ
Updated Wed, 14 Dec 2016 12:01 AM IST
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सड़क पर बैठकर जाम लगाते लोग
- फोटो : amarujala
नोटबंदी के एक महीना बाद भी बैंकों में पर्याप्त कैश उपलब्ध नहीं है। इस अव्यवस्था के कारण दिनोंदिन लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को जब दुल्हेड़ा स्थित पीएनबी में कैश नहीं था तो यहां के ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया। गुस्साए लोगों ने मार्ग जाम कर रोष प्रकट किया। बैंक अधिकारियों को जमकर कोसा।
गांवों में शहर के मुकाबले कम बैंक होते हैं। गांव में स्थित गिने-चुने बैंकों में सुबह छह बजे से ही लोग आना शुरू कर देते हैं। मंगलवार को भी गांव दुल्हेड़ा स्थित पीएनबी के बाहर लोग खड़े हुए थे। तीन दिन के बाद बैंक खुला तो ग्रामीणों को उम्मीद थी कि उनके रुपये निकाले जा सकेंगे, लेकिन बैंक खुलने के बाद जब अधिकारियों की ओर से कैश न होने की सूचना दी गई, तो लोगों का गुस्सा भड़क गया। बैंक के बाहर लगी लाइन से हटकर लोग सड़क पर आ गए। करीब डेढ़ सौ से अधिक लोग इकट्ठे हो गए। 30-40 महिलाएं सड़क पर बैठ गईं। इससे मार्ग जाम हो गया। मार्ग पर दूर-दूर तक वाहनों की लंबी कतार लग गईं। ग्रामीणों ने बैंक अधिकारियों को जमकर कोसा।
ग्रामीणों ने कहा कि सारे कामकाज छोड़कर बैंकों में सुबह आकर लाइन में लगते हैं। फिर कह दिया जाता है कि कैश नहीं है। चार हजार रुपये निकालकर देते हैं, उसमें भी कई चक्कर कटवाते हैं। अब तीन दिन की छुट्टी के बाद बैंक खुले तो कम से कम कैश की उपलब्धता तो होनी चाहिए, लेकिन फिर भी कैश उपलब्ध न होना बड़ी अजीब बात है। आखिर कब तक सब्र रखें। बिना रुपयों के कामकाज प्रभावित हैं। बैंक अधिकारियों को सही व्यवस्था बनानी होगी। दीपक देशवाल का कहना है कि इस बैंक का स्टाफ भी बेहद सुस्त है। कई बार बैंक में जब कैश नहीं होता तो स्टाफ कई घंटों बाद लोगों को कैश न होने की सूचना देता है। यदि पहले ही बता दिया जाए तो लोग यूं लाइन में लगकर परेशान न हों।
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जगदीश देशवाल, सूरज, अमित, विशाल, विकास, मनोज, अजय, नरेंद्र और जस्सू आदि ने कहा कि स्कूल की फीस, राशन का बिल आदि कई तरह के खर्चे होते हैं। अपने रुपये निकलवाने के लिए भी धक्के खाने पड़ रहे हैं। जरूरत के समय में अब अपना रुपया ही काम नहीं आ पा रहा, तो बैंक में जमा कराने का क्या फायदा हुआ। अब गांव में बुजुर्ग लोग व महिलाएं तो इ-पेमेंट या पेटीएम आदि इस्तेमाल कर नहीं सकते। ग्रामीणों ने कहा कि कैश न होने पर बैंक के गेट पर सूचना चस्पाई जाए। करीब 20 मिनट तक लोग सड़क पर जमे रहे। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराया। करीब आधे घंटे बाद जब बैंक में कैश आया तो लोगों का गुस्सा शांत हुआ। लोग फिर से लाइन में लग गए। इसके बाद इस बैंक में कामकाज सुचारु चला। जाम खुला तो वाहन चालकों को भी राहत महसूस हुई।
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गांवों में शहर के मुकाबले कम बैंक होते हैं। गांव में स्थित गिने-चुने बैंकों में सुबह छह बजे से ही लोग आना शुरू कर देते हैं। मंगलवार को भी गांव दुल्हेड़ा स्थित पीएनबी के बाहर लोग खड़े हुए थे। तीन दिन के बाद बैंक खुला तो ग्रामीणों को उम्मीद थी कि उनके रुपये निकाले जा सकेंगे, लेकिन बैंक खुलने के बाद जब अधिकारियों की ओर से कैश न होने की सूचना दी गई, तो लोगों का गुस्सा भड़क गया। बैंक के बाहर लगी लाइन से हटकर लोग सड़क पर आ गए। करीब डेढ़ सौ से अधिक लोग इकट्ठे हो गए। 30-40 महिलाएं सड़क पर बैठ गईं। इससे मार्ग जाम हो गया। मार्ग पर दूर-दूर तक वाहनों की लंबी कतार लग गईं। ग्रामीणों ने बैंक अधिकारियों को जमकर कोसा।
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ग्रामीणों ने कहा कि सारे कामकाज छोड़कर बैंकों में सुबह आकर लाइन में लगते हैं। फिर कह दिया जाता है कि कैश नहीं है। चार हजार रुपये निकालकर देते हैं, उसमें भी कई चक्कर कटवाते हैं। अब तीन दिन की छुट्टी के बाद बैंक खुले तो कम से कम कैश की उपलब्धता तो होनी चाहिए, लेकिन फिर भी कैश उपलब्ध न होना बड़ी अजीब बात है। आखिर कब तक सब्र रखें। बिना रुपयों के कामकाज प्रभावित हैं। बैंक अधिकारियों को सही व्यवस्था बनानी होगी। दीपक देशवाल का कहना है कि इस बैंक का स्टाफ भी बेहद सुस्त है। कई बार बैंक में जब कैश नहीं होता तो स्टाफ कई घंटों बाद लोगों को कैश न होने की सूचना देता है। यदि पहले ही बता दिया जाए तो लोग यूं लाइन में लगकर परेशान न हों।
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जगदीश देशवाल, सूरज, अमित, विशाल, विकास, मनोज, अजय, नरेंद्र और जस्सू आदि ने कहा कि स्कूल की फीस, राशन का बिल आदि कई तरह के खर्चे होते हैं। अपने रुपये निकलवाने के लिए भी धक्के खाने पड़ रहे हैं। जरूरत के समय में अब अपना रुपया ही काम नहीं आ पा रहा, तो बैंक में जमा कराने का क्या फायदा हुआ। अब गांव में बुजुर्ग लोग व महिलाएं तो इ-पेमेंट या पेटीएम आदि इस्तेमाल कर नहीं सकते। ग्रामीणों ने कहा कि कैश न होने पर बैंक के गेट पर सूचना चस्पाई जाए। करीब 20 मिनट तक लोग सड़क पर जमे रहे। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराया। करीब आधे घंटे बाद जब बैंक में कैश आया तो लोगों का गुस्सा शांत हुआ। लोग फिर से लाइन में लग गए। इसके बाद इस बैंक में कामकाज सुचारु चला। जाम खुला तो वाहन चालकों को भी राहत महसूस हुई।