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नागरिक अस्पताल में तीन महीनों से नहीं आयरन, कैल्शियम की दवा
ब्यूरो_अमर उजाला_झज्जर
Updated Tue, 23 Aug 2016 11:22 PM IST
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अस्पताल
- फोटो : bureau
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स्वास्थ्य महकमे की ओर से सरकारी अस्पतालों में बेहतर चिकित्सा, अन्य सुविधाओं का भले ही दम भरा जा रहा हो, लेकिन पिछले तीन माह से नागरिक अस्पताल में महंगी दवाइयां तो दूर, आयरन और कैल्शियम की दवा तक मरीजों को नहीं मिल पा रही। सबसे ज्यादा दिक्कत जो गर्भवती, दूसरी महिलाओं और एनीमिया पीड़ितों को हो रही है। उन्हें मजबूर होकर प्राइवेट मेडिकल स्टोर संचालकों से खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
अस्पताल में हाई रिस्क प्रिग्नेंसी ओपीडी, स्त्री रोग विभाग की जनरल ओपीडी भी चलती है। यही नहीं यहां पर हड्डी रोग विभाग के काफी मरीज दर्द से कराहते हुए रोजाना आते हैं। दोनों विभागों में अधिकांश मरीजों को आयरन, कैल्शियम की दवा लेने के लिए लिखा जाता है, लेकिन घंटों इंतजार के बाद जब दवा खिड़की पर मरीज का नंबर आता है तो उनके ओपीडी कार्ड पर क्रॉस का निशान मारकर दवा यहां उपलब्ध न होने के लिए बोला जा रहा है। ऐसे में मन-मसोसकर लोग बाहर से खरीदते हुए यहां की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं।
बता दें कि नागरिक अस्पताल में रोजाना एक हजार से ज्यादा मरीज विभिन्न बीमारियों के आते हैं। उनमें काफी महिलाएं भी होती है। अधिकतर गर्भवती महिलाएं भी यहां दूर-दराज से जांच कराने के लिए आती हैं, लेकिन जब जांच के बाद डॉक्टर द्वारा उनके ओपीडी कार्ड पर आयरन और कैल्शियम की दवा लिखी जाती है और मरीज लेने के लिए लाइन में खड़ा होकर अपने नंबर का इंतजार करता है, लेकिन घंटों बाद भी खड़े रहने के बाद उन्हें यहां दवा नहीं उपलब्ध होती तो वे सरकारी व्यवस्थाओं को जमकर कोसते हुए बाहर निकलते हैं। दवा केंद्र के बाहर यह चार्ट तक नहीं लगा हुआ है कि कौन सी दवा उपलब्ध है और कौन सी नहीं। ऐसे में मरीजों को जब डिस्पेंसरी से खाली हाथ लौटना पड़ता है तो वे परेशान होकर खूब मन मसोसकर रहते हैं।
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स्त्री रोग विभाग में डॉक्टर से अपने स्वास्थ्य को लेकर जांच कराने के लिए गई पूजा, सुनीता, मोनिका व प्रेम ने बताया कि कई देर तक लाइन में लगने के बाद भी डॉक्टर की लिखी दवाइयां आयरन और कैल्शियम तक उन्हें नहीं मिल पाईं। ऐसे में अन्य दवाइयों के उपलब्ध होने की आस न के बराबर ही है। क्योंकि ये दवाइयां तो डिस्पेंसरी में हर वक्त मौजूद रहनी चाहिए। इनकी किसी भी तरह से शॉर्टेज नहीं होनी चाहिए।
बॉडी का बेस हैं दोनों दवाएं
आयरन, कैल्शियम की दवा तो गर्भवती महिलाओं, हड्ड़ी रोगियों के लिए सबसे जरूरी देनी होती है। यह बॉडी का बेस है। यदि आयरन की दवा समय पर नहीं ली जाती और ध्यान नहीं दिया जाता तो एनीमिया से पीड़ित होकर जिंदगी भी खतरे में पड़ सकती है। इसी तरह से कैल्शियम की दवा हड्डियों को मजबूत करती है। यदि बॉडी में किसी तरह से कोई जकड़न, जोड़ों में दर्द, चलने-फिरने में परेशानी है तो उसे कैल्शियम की दवा हर रोज लेनी चाहिए, अन्यथा हड्डियों के कमजोर होने पर उनके टूटने का डर बना रहता है।
डॉ. एसके मलिक, फिजिशियन
नहीं आई सप्लाई
आयरन, कैल्शियम दवाइयों की कमी जरूर खल रही है। दोनों दवाइयों की सालभर में लगभग एक बार ही सप्लाई हो पाई है। दवा के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है। ये दवाइयों गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद जरूरी होती है। ऐसे में हर हाल में जल्द मरीज को उपलब्ध कराने का उनका प्रयास रहेगा।
-डॉ. एसआर सिवाच, सीएमओ झज्जर
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अस्पताल में हाई रिस्क प्रिग्नेंसी ओपीडी, स्त्री रोग विभाग की जनरल ओपीडी भी चलती है। यही नहीं यहां पर हड्डी रोग विभाग के काफी मरीज दर्द से कराहते हुए रोजाना आते हैं। दोनों विभागों में अधिकांश मरीजों को आयरन, कैल्शियम की दवा लेने के लिए लिखा जाता है, लेकिन घंटों इंतजार के बाद जब दवा खिड़की पर मरीज का नंबर आता है तो उनके ओपीडी कार्ड पर क्रॉस का निशान मारकर दवा यहां उपलब्ध न होने के लिए बोला जा रहा है। ऐसे में मन-मसोसकर लोग बाहर से खरीदते हुए यहां की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं।
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बता दें कि नागरिक अस्पताल में रोजाना एक हजार से ज्यादा मरीज विभिन्न बीमारियों के आते हैं। उनमें काफी महिलाएं भी होती है। अधिकतर गर्भवती महिलाएं भी यहां दूर-दराज से जांच कराने के लिए आती हैं, लेकिन जब जांच के बाद डॉक्टर द्वारा उनके ओपीडी कार्ड पर आयरन और कैल्शियम की दवा लिखी जाती है और मरीज लेने के लिए लाइन में खड़ा होकर अपने नंबर का इंतजार करता है, लेकिन घंटों बाद भी खड़े रहने के बाद उन्हें यहां दवा नहीं उपलब्ध होती तो वे सरकारी व्यवस्थाओं को जमकर कोसते हुए बाहर निकलते हैं। दवा केंद्र के बाहर यह चार्ट तक नहीं लगा हुआ है कि कौन सी दवा उपलब्ध है और कौन सी नहीं। ऐसे में मरीजों को जब डिस्पेंसरी से खाली हाथ लौटना पड़ता है तो वे परेशान होकर खूब मन मसोसकर रहते हैं।
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स्त्री रोग विभाग में डॉक्टर से अपने स्वास्थ्य को लेकर जांच कराने के लिए गई पूजा, सुनीता, मोनिका व प्रेम ने बताया कि कई देर तक लाइन में लगने के बाद भी डॉक्टर की लिखी दवाइयां आयरन और कैल्शियम तक उन्हें नहीं मिल पाईं। ऐसे में अन्य दवाइयों के उपलब्ध होने की आस न के बराबर ही है। क्योंकि ये दवाइयां तो डिस्पेंसरी में हर वक्त मौजूद रहनी चाहिए। इनकी किसी भी तरह से शॉर्टेज नहीं होनी चाहिए।
बॉडी का बेस हैं दोनों दवाएं
आयरन, कैल्शियम की दवा तो गर्भवती महिलाओं, हड्ड़ी रोगियों के लिए सबसे जरूरी देनी होती है। यह बॉडी का बेस है। यदि आयरन की दवा समय पर नहीं ली जाती और ध्यान नहीं दिया जाता तो एनीमिया से पीड़ित होकर जिंदगी भी खतरे में पड़ सकती है। इसी तरह से कैल्शियम की दवा हड्डियों को मजबूत करती है। यदि बॉडी में किसी तरह से कोई जकड़न, जोड़ों में दर्द, चलने-फिरने में परेशानी है तो उसे कैल्शियम की दवा हर रोज लेनी चाहिए, अन्यथा हड्डियों के कमजोर होने पर उनके टूटने का डर बना रहता है।
डॉ. एसके मलिक, फिजिशियन
नहीं आई सप्लाई
आयरन, कैल्शियम दवाइयों की कमी जरूर खल रही है। दोनों दवाइयों की सालभर में लगभग एक बार ही सप्लाई हो पाई है। दवा के लिए डिमांड भेजी जा चुकी है। ये दवाइयों गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद जरूरी होती है। ऐसे में हर हाल में जल्द मरीज को उपलब्ध कराने का उनका प्रयास रहेगा।
-डॉ. एसआर सिवाच, सीएमओ झज्जर