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Jhajjar-Bahadurgarh News: अस्पताल में सुविधा नहीं, बाहर खर्च करने पड़ रहे चार हजार रुपये

Mon, 05 Aug 2024 05:56 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Mon, 05 Aug 2024 05:56 AM IST
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No facilities in the hospital, four thousand rupees have to be spent outside
झज्जर सामान्य अस्पताल में उपचार करवाने के लिए इंतजार में बैठे लोग।
झज्जर।जिला मुख्यालय पर स्थित सरकारी अस्पताल में वेंटिलेटर तो है, लेकिन उनका प्रयोग नहीं हो पा रहा है। कारण विशेषज्ञ स्टॉफ ही नहीं है। बेशक एमबीबीएस डॉक्टर और स्टॉफ को प्रशिक्षित किया गया है, लेकिन उसके बावजूद इनको कमरे में बंद करके रखा गया है। ऐसे में कोई गंभीर मरीज आ जाए तो उसे रेफर करना पड़ता है। ऐसे में मजबूरी में कई बार मरीज को निजी अस्पताल का रुख करना पड़ता है, जहां उसे प्रतिदिन के हिसाब से चार से पांच हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
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सरकार ने कोरोना कॉल में आक्सीजन की जरूरत पड़ने पर वेंटिलेटर उपलब्ध कराए थे। जिले को कुल 27 वेंटीलेटर मिले थे। इसमें से 17 बहादुरगढ़ और 9 झज्जर के सरकारी अस्पताल को मिले थे, लेकिन झज्जर के सरकारी अस्पताल में इनका प्रयोग नहीं हो पा रहा है। ऐसे में गंभीर मरीज आने पर उनको पीजीआईएमएस रोहतक रेफर कर दिया जाता है। यदि मरीज की हालत ज्यादा गंभीर होती है तो परिजनों के परिजन आसपास के निजी अस्पतालों में ले जाते हैं, जहां पर वेंटिलेटर का प्रतिदिन का खर्च चार से पांच हजार रुपये तक आता है। ऐसे में मरीजों के परिवारजनों काे खर्च उठाने में दिक्कत आती है। यदि सरकारी अस्पताल में ही वेंटीलेटर मिल जाए तो मरीज इन अनावश्यक खर्चों से बच सकता है।
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विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं मिल रहे
स्वास्थ्य विभाग को लंबे समय से विशेषज्ञ चिकित्सक भी नहीं मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने एनएचएम के तहत पिछले दिनों दो एनेथेसिया चिकित्सकों की भर्ती के लिए आवेदन किए थे, लेकिन वह भी नहीं आए जबकि वेंटीलेटर चलाने के लिए पांच विशेषज्ञ चिकित्सक लगाए जाने हैं।
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वर्जन
वेंटीलेटर चलाने के लिए कम से कम पांच चिकित्सकों की नियुक्ति की जानी है। फिलहाल एनएचएम की हड़ताल चल रही है। हड़ताल खत्म होते ही भर्ती के लिए आवेदन मांगे जाएंगे।
डॉ. शैलेंद्र डोगरा, उप सिविल सर्जन, झज्जर
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