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Jhajjar-Bahadurgarh News: 20 फरवरी को होगा मॉप-अप दिवस
Mon, 05 Feb 2024 03:25 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 05 Feb 2024 03:25 AM IST
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झज्जर। 15 वें राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन आगामी 15 फरवरी को किया जाएगा। भारत सरकार और एनएचएम, हरियाणा आगामी 15वें डीवॉर्मिंग राउंड को संस्थान आधारित निश्चित दिन के दृष्टिकोण से शुरू करने के लिए तैयार है।
इस अभियान के तहत एक से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को कृमि मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत 1-2 वर्ष के बच्चों के लिए एल्बेंडाजोल टेबलेट की खुराक आधा टैबलेट, 3-19 वर्ष के बच्चों के लिए एक टेबलेट, प्रजनन आयु वर्ग (20-24 वर्ष) वाली महिलाओं (गैर-गर्भवती और गैर-स्तनपान कराने वाली महिलाओं ) के लिए एक टेबलेट का प्रावधान है। सुरक्षित और लाभकारी एल्बेंडाजोल टेबलेट से कृमि मुक्ति, आंतों के कृमि संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए एक साक्ष्य-आधारित, विश्व स्तर पर स्वीकृत और प्रभावी समाधान है। इस प्रकार राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम को जिला के सभी बच्चों और किशोरों तक पहुंचने के लिए डिजाइन किया गया है। सिविल सर्जन डॉ. ब्रह्मदीप सिंह ने बताया कि कुछ मामलों में, बच्चों को कृमि मुक्ति के बाद मतली, हल्का पेट दर्द, उल्टी, दस्त और थकान का अनुभव हो सकता है। ये दुष्प्रभाव आमतौर पर अस्थायी होते हैं और इन्हें आसानी से प्रबंधित किया जा सकता है।
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इस अभियान के तहत एक से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को कृमि मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत 1-2 वर्ष के बच्चों के लिए एल्बेंडाजोल टेबलेट की खुराक आधा टैबलेट, 3-19 वर्ष के बच्चों के लिए एक टेबलेट, प्रजनन आयु वर्ग (20-24 वर्ष) वाली महिलाओं (गैर-गर्भवती और गैर-स्तनपान कराने वाली महिलाओं ) के लिए एक टेबलेट का प्रावधान है। सुरक्षित और लाभकारी एल्बेंडाजोल टेबलेट से कृमि मुक्ति, आंतों के कृमि संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए एक साक्ष्य-आधारित, विश्व स्तर पर स्वीकृत और प्रभावी समाधान है। इस प्रकार राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम को जिला के सभी बच्चों और किशोरों तक पहुंचने के लिए डिजाइन किया गया है। सिविल सर्जन डॉ. ब्रह्मदीप सिंह ने बताया कि कुछ मामलों में, बच्चों को कृमि मुक्ति के बाद मतली, हल्का पेट दर्द, उल्टी, दस्त और थकान का अनुभव हो सकता है। ये दुष्प्रभाव आमतौर पर अस्थायी होते हैं और इन्हें आसानी से प्रबंधित किया जा सकता है।
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