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Jhajjar-Bahadurgarh News: बंदर पकड़ने वर्क ऑर्डर जारी, 1280 रुपये प्रति बंदर होंगे खर्च
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बेरी। बंदरों के आंतक से जूझ रहे बेरी कस्बे के लोगों को जल्द राहत मिलेगी। नगर पालिका ने बंदर पकड़ने के लिए टेंडर जारी कर वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है। एक बंदर को पकडने पर 1280 रुपये खर्च होंगे। वन्य जीव प्राणी विभाग से अनुमति मिलने के बाद बंदरों को पकड़ने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
कस्बे के कई मोहल्लों में बंदरों का आतंक इतना है कि महिलाएं तथा बच्चे छत पर जाने से भी डरने लगे हैं। लोग गली में भी निकलने से डरते है। अगर बाहर सामान छोड़ते है तो बंदर उसे तहस-नहस कर देते हैं। महिलाओं को घरों की छत पर कपड़े सुखाना और बच्चों का गलियों में निकलना मुश्किल हो गया है। कस्बा वासियों की मांग है जिस क्षेत्र में बंदरों का आतंक वहां सबसे पहले बंदरों के पकडऩे के लिए पिंजरा लगाना चाहिए ताकि बंदरों के आतंक से जल्द से जल्द निजात मिल सके। इस संबंध में पालिका के जेई रोहित लोहचब का कहना है कि बंदर को मानवीय तरीके से पकड़ने, उसके रखरखाव करने की जिम्मेवारी भी फर्म को सौंपी गई। बंदरों को पकड़ने के बाद उनका मेडिकल करवाया जाएगा। उसके बाद वन्य जीव प्राणी विभाग से जिस स्थान पर पकड़े हुए बंदरों को छोड़ने की अनुमति देगा वहां छोड़ा जाएगा।
करीब 4 साल पहले पकड़े गए थे बंदर
गौरतलब है कि बेरी में बंदरों को पकड़ने के लिए नगर पालिका की तरफ से करीब 4 साल पहले अभियान चलाया गया था। उस समय करीब 200 बंदरों को पकड़ा गया था। इसके बाद फिर से बंदरों का आंतक बढ़ गया है।
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वर्जन
बंदरों के को पकड़ने के वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। फर्म को 1280 रुपये प्रति बंदर पकड़ने का ठेका दिया गया है। भिंडावास वन्य जीव प्राणी विभाग को बंदरों को पकड़ने की अनुमति के लिए पत्र लिखा हुआ है। जैसे ही अनुमति मिल जाती है तो उनको पकडऩे का काम शुरू करा दिया जाएगा।
रोहित लोहचब, जेई नगर पालिका बेरी।
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कस्बे के कई मोहल्लों में बंदरों का आतंक इतना है कि महिलाएं तथा बच्चे छत पर जाने से भी डरने लगे हैं। लोग गली में भी निकलने से डरते है। अगर बाहर सामान छोड़ते है तो बंदर उसे तहस-नहस कर देते हैं। महिलाओं को घरों की छत पर कपड़े सुखाना और बच्चों का गलियों में निकलना मुश्किल हो गया है। कस्बा वासियों की मांग है जिस क्षेत्र में बंदरों का आतंक वहां सबसे पहले बंदरों के पकडऩे के लिए पिंजरा लगाना चाहिए ताकि बंदरों के आतंक से जल्द से जल्द निजात मिल सके। इस संबंध में पालिका के जेई रोहित लोहचब का कहना है कि बंदर को मानवीय तरीके से पकड़ने, उसके रखरखाव करने की जिम्मेवारी भी फर्म को सौंपी गई। बंदरों को पकड़ने के बाद उनका मेडिकल करवाया जाएगा। उसके बाद वन्य जीव प्राणी विभाग से जिस स्थान पर पकड़े हुए बंदरों को छोड़ने की अनुमति देगा वहां छोड़ा जाएगा।
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करीब 4 साल पहले पकड़े गए थे बंदर
गौरतलब है कि बेरी में बंदरों को पकड़ने के लिए नगर पालिका की तरफ से करीब 4 साल पहले अभियान चलाया गया था। उस समय करीब 200 बंदरों को पकड़ा गया था। इसके बाद फिर से बंदरों का आंतक बढ़ गया है।
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बंदरों के को पकड़ने के वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। फर्म को 1280 रुपये प्रति बंदर पकड़ने का ठेका दिया गया है। भिंडावास वन्य जीव प्राणी विभाग को बंदरों को पकड़ने की अनुमति के लिए पत्र लिखा हुआ है। जैसे ही अनुमति मिल जाती है तो उनको पकडऩे का काम शुरू करा दिया जाएगा।
रोहित लोहचब, जेई नगर पालिका बेरी।