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छुड़ानी गांव में टूटी मातन लिंक और केसीबी ड्रेन, 500 एकड़ फसल जलमग्न
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बहादुरगढ़ के छुड़ानी गांव में ड्रेन टूटने से जलमग्न हुए खेत। संवाद
- फोटो : Bahadurgarh
गांव छुड़ानी में मातन लिंक और केसीबी ड्रेन टूटने से बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। पानी भरने से 500 एकड़ धान की फसल के खराब हो गयी है। किसानों का कहना है कि सिंचाई विभाग की लापरवाही का वजह से यह ड्रेन टूट गयी और उनके खेतों में पानी भर गया। वहीं, सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ड्रेन की मरम्मत कराई जा रही है। अगली बारिश से पूर्व दोनों ड्रेेन की मरम्मत करा ली जाएगी।
छुड़ानी में ड्रेन टूटने की वीरवार को जानकारी मिलते ही सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों को ड्रेन ठीक करने में लगाया। किसानों का कहना है कि लापरवाही सिंचाई विभाग की है। मानसून से पहले ड्रेन की न तो सफाई करवाई गई और न ही उसके साथ मिट्टी लगाई। इसका खामियाजा अब किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसान अजीत सिंह का कहना है कि सिंचाई विभाग ने समय पर केसीबी ड्रेन की सफाई नहीं करवाई। विभाग के अधिकारियों व ठेकेदारों ने सफाई के नाम पर सिर्फ किनारों को छील दिया। उन्होंने राज्य सरकार से इस बर्बादी का मुआवजा देने की मांग की है।
किसान अनिल का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी और सिंचाई विभाग ने भी किसानों की सुध नहीं ली। कुछ दिन पहले मातन लिंक ड्रेन के पुश्तों को मजबूत करने के लिए भी करीब दो करोड़ से ज्यादा का टेंडर लगाया गया था। लेकिन इसका काम भी मानसून से पहले पूरा नहीं हुआ। किसानों का कहना है कि रोहतक सिंचाई विभाग अपने हिस्से में केसीबी ड्रेन की सफाई करवाई है लेेेकिन झज्जर के सिंचाई विभाग के हिस्से में केसीबी की न तो सफाई और न ही छंटाई। इसी वजह से हर साल केसीबी ड्रेन टूटती है और फसल बर्बाद हो जाती हैं। सफाई के नाम पर झज्जर सिंचाई विभाग हर साल लाखों रुपये का घपला करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा से भी जलभराव से फसल खराब का मुआवजा नहीं मिल रहा। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर लापरवाही के लिए कार्रवाई की मांग की है।
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फिलहाल ड्रेन की मरम्मत करवा दी गई हैै। मातन लिंक ड्रेन पर भी मिट्टी डाल दी जाएगी विभाग कोशिश कर रहा है कि अगली बरसात सेे पहले दोनों ड्रेन की मरम्मत करवा दी जाए ताकि किसानों को फसलों का नुकसान ना हो।
--जगदीप दलाल, एसडीओ, सिंचाई विभाग
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छुड़ानी में ड्रेन टूटने की वीरवार को जानकारी मिलते ही सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों को ड्रेन ठीक करने में लगाया। किसानों का कहना है कि लापरवाही सिंचाई विभाग की है। मानसून से पहले ड्रेन की न तो सफाई करवाई गई और न ही उसके साथ मिट्टी लगाई। इसका खामियाजा अब किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसान अजीत सिंह का कहना है कि सिंचाई विभाग ने समय पर केसीबी ड्रेन की सफाई नहीं करवाई। विभाग के अधिकारियों व ठेकेदारों ने सफाई के नाम पर सिर्फ किनारों को छील दिया। उन्होंने राज्य सरकार से इस बर्बादी का मुआवजा देने की मांग की है।
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किसान अनिल का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी और सिंचाई विभाग ने भी किसानों की सुध नहीं ली। कुछ दिन पहले मातन लिंक ड्रेन के पुश्तों को मजबूत करने के लिए भी करीब दो करोड़ से ज्यादा का टेंडर लगाया गया था। लेकिन इसका काम भी मानसून से पहले पूरा नहीं हुआ। किसानों का कहना है कि रोहतक सिंचाई विभाग अपने हिस्से में केसीबी ड्रेन की सफाई करवाई है लेेेकिन झज्जर के सिंचाई विभाग के हिस्से में केसीबी की न तो सफाई और न ही छंटाई। इसी वजह से हर साल केसीबी ड्रेन टूटती है और फसल बर्बाद हो जाती हैं। सफाई के नाम पर झज्जर सिंचाई विभाग हर साल लाखों रुपये का घपला करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा से भी जलभराव से फसल खराब का मुआवजा नहीं मिल रहा। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर लापरवाही के लिए कार्रवाई की मांग की है।
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फिलहाल ड्रेन की मरम्मत करवा दी गई हैै। मातन लिंक ड्रेन पर भी मिट्टी डाल दी जाएगी विभाग कोशिश कर रहा है कि अगली बरसात सेे पहले दोनों ड्रेन की मरम्मत करवा दी जाए ताकि किसानों को फसलों का नुकसान ना हो।
--जगदीप दलाल, एसडीओ, सिंचाई विभाग