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Jhajjar-Bahadurgarh News: शहर में धूमधाम से निकाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा
Mon, 30 Jun 2025 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Mon, 30 Jun 2025 01:45 AM IST
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29jjrp17- भगवान श्री जगन्नाथ के रथ को खींचते श्रद्धालु। संवाद
झज्जर। इस्कॉन प्रचार केंद्र झज्जर की तरफ से रविवार को जगन्नाथ यात्रा का आयोजन शहर में किया गया। रथयात्रा का प्रारम्भ निर्माणाधीन राधा कृष्ण मंदिर (श्री गौशाला), कच्चा बाबरा रोड सिलानी गेट से किया गया। श्रीश्री जगन्नाथ बलदेव सुभद्राजी की रथयात्रा कच्चा बाबरा रोड, सिलानी गेट, बीकानेर चौक, पुरानी तहसील, सिविल अस्पताल, छिकारा चौक, आंबेडकर चौक, बेरी गेट, छारा चुंगी, माता गेट होते हुए श्री गौशाला नजदीक बाबा प्रसादगिरी मंदिर तक पहुंची।
जगन्नाथ यात्रा के दौरान पूरा शहर भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु आगे-आगे रथ की रस्सी खींच रहे थे। इससे पूर्व सुबह 5:30 बजे मंगल आरती राधा कृष्ण मंदिर में आयोजित की गई। इसके बाद सुबह 8 बजे श्री जगन्नाथ कथा का आयोजन किया गया, जिसका वाचन प्रबोधनंद सरस्वती महाराज ने किया। इसके बाद श्री भगवान का स्वागत रथ पर हुआ और आरती की गई। दोपहर को 501 भोग लगाया गया। दोपहर को कार्यक्रम के शुभारंभ पर आरती की गई।
इसमें नगर परिषद के चेयरमैन जिले सिंह सैनी ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ कहते हैं कि मुझे गोदी में ले जाओ या रथ में या फिर कंधे पर, क्योंकि मैं खुद देखना चाहता हूं कि सब कैसे हैं। किसी को कोई परेशानी तो नहीं है। इसलिए जो भी श्रद्धालु जगन्नाथ की किसी भी यात्रा में आहुति देता है तो वह सफल होती है। भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र को भी साथ लेकर चलते हैं।
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जगन्नाथ यात्रा के दौरान पूरा शहर भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु आगे-आगे रथ की रस्सी खींच रहे थे। इससे पूर्व सुबह 5:30 बजे मंगल आरती राधा कृष्ण मंदिर में आयोजित की गई। इसके बाद सुबह 8 बजे श्री जगन्नाथ कथा का आयोजन किया गया, जिसका वाचन प्रबोधनंद सरस्वती महाराज ने किया। इसके बाद श्री भगवान का स्वागत रथ पर हुआ और आरती की गई। दोपहर को 501 भोग लगाया गया। दोपहर को कार्यक्रम के शुभारंभ पर आरती की गई।
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इसमें नगर परिषद के चेयरमैन जिले सिंह सैनी ने मुख्यातिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ कहते हैं कि मुझे गोदी में ले जाओ या रथ में या फिर कंधे पर, क्योंकि मैं खुद देखना चाहता हूं कि सब कैसे हैं। किसी को कोई परेशानी तो नहीं है। इसलिए जो भी श्रद्धालु जगन्नाथ की किसी भी यात्रा में आहुति देता है तो वह सफल होती है। भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र को भी साथ लेकर चलते हैं।
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