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प्रतिबंध के बाद देर रात तक हुई आतिशबाजी, एक्यूआई पहुंचा 394 पर
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वीरवार को दीपावली पर्व पर आतिशबाजी का दौर अंधेरा होते ही शुरू हो गया था। जबकि आतिशबाजी पर प्रतिबंध था। न तो प्रशासन की ओर से इस तरफ कोई ध्यान दिया गया और न ही लोगों ने आतिशबाजी करते हुए क्षेत्र की हवा खराब करने में कोई कसर छोड़ी। दीपावली को एयर क्वालिटी इंडेक्टस भी अपने खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। वीरवार को एक्यूआई 394 तक पहुंच गया, जो रेड जोन में रहा। शुक्रवार का शाम के समय गोवर्धन पूजा के बाद भी लोगों ने खूब पटाखे छोड़े।
दीपावली पर आतिशबाजी के चलते वायु प्रदूषण काफी बढ़ गया। प्रदूषण विभाग के अधिकारियों की मानें तो दिवाली की आतिशबाजी का असर अगले कई दिन तक रह सकता है। शहरी क्षेत्र की अनेक कॉलोनियों में आधी रात के बाद तक आतिशबाजी हुई। आतिशबाजी पर रोक का असर बहादुरगढ़ में कहीं नजर नहीं आया। अन्य सालों के मुकाबले इस बार भी आतिशबाजी कम नहीं हुई। हवा में प्रदूषण अधिक होने के कारण लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ी। डा. मनीष शर्मा ने बताया कि दमा आदि बीमारियों से पीड़ित लोगों को बढ़ते प्रदूषण से परेशानी अधिक हुई। पर्यावरण प्रेमी प्रदीप कुमार ने कहा कि आतिशबाजी तो एक ऐसा शौक है जो न सिर्फ दूसरों के लिए बल्कि ऐसा करने वालों के लिए भी नुकसानदायक है। इसके बावजूद कोई भी यह नहीं समझ पा रहा है कि निरंतर बढ़ रहा प्रदूषण पर्यावरण के लिए कितना खतरनाक साबित हो रहा है।
वीरवार व शुक्रवार को प्रदूषण का स्तर खतरनाक रहा। यह लाल रंग में बना रहा। वीरवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 394 तक गया। शुक्रवार को सुबह 306 और 11 बजे 294 आ गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी दिनेश यादव ने कहा कि दीपावली पर आतिशबाजी के बाद प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। इसका असर अभी देखने को नहीं मिलेगा। आने वाले दो-तीन दिनों बाद इसका पता चलेगा। यदि हवा चलती है तो प्रदूषण का स्तर कम हो जाएगा।
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दीपावली पर आतिशबाजी के चलते वायु प्रदूषण काफी बढ़ गया। प्रदूषण विभाग के अधिकारियों की मानें तो दिवाली की आतिशबाजी का असर अगले कई दिन तक रह सकता है। शहरी क्षेत्र की अनेक कॉलोनियों में आधी रात के बाद तक आतिशबाजी हुई। आतिशबाजी पर रोक का असर बहादुरगढ़ में कहीं नजर नहीं आया। अन्य सालों के मुकाबले इस बार भी आतिशबाजी कम नहीं हुई। हवा में प्रदूषण अधिक होने के कारण लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ी। डा. मनीष शर्मा ने बताया कि दमा आदि बीमारियों से पीड़ित लोगों को बढ़ते प्रदूषण से परेशानी अधिक हुई। पर्यावरण प्रेमी प्रदीप कुमार ने कहा कि आतिशबाजी तो एक ऐसा शौक है जो न सिर्फ दूसरों के लिए बल्कि ऐसा करने वालों के लिए भी नुकसानदायक है। इसके बावजूद कोई भी यह नहीं समझ पा रहा है कि निरंतर बढ़ रहा प्रदूषण पर्यावरण के लिए कितना खतरनाक साबित हो रहा है।
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वीरवार व शुक्रवार को प्रदूषण का स्तर खतरनाक रहा। यह लाल रंग में बना रहा। वीरवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 394 तक गया। शुक्रवार को सुबह 306 और 11 बजे 294 आ गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी दिनेश यादव ने कहा कि दीपावली पर आतिशबाजी के बाद प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। इसका असर अभी देखने को नहीं मिलेगा। आने वाले दो-तीन दिनों बाद इसका पता चलेगा। यदि हवा चलती है तो प्रदूषण का स्तर कम हो जाएगा।
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