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Jhajjar-Bahadurgarh News: लॉकडाउन में ऑनलाइन सीखा ज्वेलरी बनाना, अब खुद बनाकर बेच रहीं कुसुम
Thu, 04 Dec 2025 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 04 Dec 2025 01:49 AM IST
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03jjrp03- ट्रेनिंग के दौरान महिलाओं को ज्वेलरी बनाना सीखाती कुसुम। स्रोत-स्वयं
झज्जर। राम नगर निवासी कुसुम ने लाॅकडाउन के समय आपदा को अवसर में बदलने का काम किया। इस दौरान खाली बैठने की बजाय कुसुम ने ऑनलाइन सोशल मीडिया पर ज्वेलरी और कपड़े के बैग बनाने का काम सीखा। इस दौरान उसने बार-बार प्रेक्टिस की और आज वह अपना खुद का बिजनेस चला रही हैं।
कुसुम ने बताया कि वह पिछले चार साल से ज्वेलरी और कपड़े के बैग के व्यापार से जुड़ी हैं। अब वह सरकारी विभागों की लगने वाली स्टॉल में भी अपने बनाए गए सामान की प्रदर्शनी लगाती हैं। वह सिंगल मदर है। लॉकडाउन के दौरान कोई काम नहीं था। ऐसे में खाली बैठने की बजाय उसके मन में कुछ काम सीखने की ललक हुई।
उसने ऑनलाइन काफी काम देखे और उसे ज्वेलरी और कपड़े के बैग बनाने का काम पसंद आया। उसने कई वीडियो देखकर यह दोनों काम सीखे। उसके बाद उसने अपना खुद का काम भी शुरू कर दिया। अब वह हर माह ऑनलाइन ही पांच से छह हजार रुपये का सामान बेच लेती हैं।
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व्हाट्सअप ग्रुप के अलावा कई सोशल मीडिया साइट्स पर उन्होंने अपने सामान को बेचने के लिए लगाया हुआ है। उन्होंने बताया कि वह कंगन, पायल, बाजू बंद, नाम के कडे़, कलसरी बनाती है। इसके अलावा कपड़े की अलग-अलग वैरायटी के बैग बनाती हैं। फिलहाल वह यह काम पार्ट टाइम के रूप में करतीं हैं।
दूसरी महिलाओं को भी देती हैं ट्रेनिंग
कुसुम ने बताया कि वह दूसरी महिलाओं को भी ज्वेलरी और कपड़े के बैग बनाने की ट्रेनिंग देती हैं। इस समय वह पीएनबी के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के साथ जुड़ी हुई हैं। यहां आने वाली महिलाओं को वह ज्वेलरी और कपड़े के बैग बनाने की ट्रेनिंग देती हैं।
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कुसुम ने बताया कि वह पिछले चार साल से ज्वेलरी और कपड़े के बैग के व्यापार से जुड़ी हैं। अब वह सरकारी विभागों की लगने वाली स्टॉल में भी अपने बनाए गए सामान की प्रदर्शनी लगाती हैं। वह सिंगल मदर है। लॉकडाउन के दौरान कोई काम नहीं था। ऐसे में खाली बैठने की बजाय उसके मन में कुछ काम सीखने की ललक हुई।
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उसने ऑनलाइन काफी काम देखे और उसे ज्वेलरी और कपड़े के बैग बनाने का काम पसंद आया। उसने कई वीडियो देखकर यह दोनों काम सीखे। उसके बाद उसने अपना खुद का काम भी शुरू कर दिया। अब वह हर माह ऑनलाइन ही पांच से छह हजार रुपये का सामान बेच लेती हैं।
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व्हाट्सअप ग्रुप के अलावा कई सोशल मीडिया साइट्स पर उन्होंने अपने सामान को बेचने के लिए लगाया हुआ है। उन्होंने बताया कि वह कंगन, पायल, बाजू बंद, नाम के कडे़, कलसरी बनाती है। इसके अलावा कपड़े की अलग-अलग वैरायटी के बैग बनाती हैं। फिलहाल वह यह काम पार्ट टाइम के रूप में करतीं हैं।
दूसरी महिलाओं को भी देती हैं ट्रेनिंग
कुसुम ने बताया कि वह दूसरी महिलाओं को भी ज्वेलरी और कपड़े के बैग बनाने की ट्रेनिंग देती हैं। इस समय वह पीएनबी के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के साथ जुड़ी हुई हैं। यहां आने वाली महिलाओं को वह ज्वेलरी और कपड़े के बैग बनाने की ट्रेनिंग देती हैं।