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कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को लेकर पेंडिंग प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी

Sun, 04 Sep 2016 11:03 PM IST
ब्यूरो_अमर उजाला_झज्जर
ब्यूरो_अमर उजाला_झज्जर Updated Sun, 04 Sep 2016 11:03 PM IST
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kashmiri pandits shifting, land for kashmiri pandits,  pending project passed, jhajjar
नक्शा - फोटो : bureau
कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को लेकर करीब 20 वर्षों से पेंडिंग चल रहे प्रोजेक्ट को प्रदेश सरकार की ओर से मंजूरी दे दी गई है। उसके लिए बहादुरगढ़ सेक्टर-2 में करीब 12 एकड़ भूमि में अलग-अलग साइज के 212 प्लॉट काटे गए हैं। इस 12 एकड़ जमीन में 75 वर्ग मीटर से 416 वर्ग मीटर के प्लॉट काटे गए हैं। विभाग द्वारा उनको सेक्टर की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बारे में भी कहा गया है।
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संबधित विभाग का कहना है कि इस विस्थापन कार्य को लेकर तैयार की गई ड्राइंग को चंडीगढ़ मुख्यालय से अप्रूवल मिल चुकी है। अब कभी भी हुडा द्वारा इसके लिए काटे गए प्लॉटों के ड्रॉ की घोषणा की जा सकती है। इसके लिए संबधित विभाग द्वारा प्रोजेक्ट की पूरी रूपरेखा तैयार की जा चुकी है।
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यह मामला करीब 20 वर्ष से चला आ रहा है। कश्मीरी पंडितों के परिवारों का कहना था कि उनका बहादुरगढ़ स्थित कुछ भूमि पर मालिकाना हक है, जिसके कारण अब कश्मीरी पंडित लगातार सरकार से विस्थापन के लिए जमीन की मांग कर रहे थे। इस कारण विस्थापन का मामला काफी वर्षों से पेंडिंग हो गया। 1997 में सरकार द्वारा इसके लिए 10 एकड़ भूमि देने पर विचार किया गया था, लेकिन वर्ष 2002 में कुछ और कश्मीरी पंडितों के इस भूमि पर अपना भी हक जताने के कारण प्रोजेक्ट के लिए जमीन बढ़ाकर 12 एकड़ कर दी, लेकिन कोई भी ठोस फैसला न आने के कारण प्रोजेक्ट पेंडिंग चलता रहा।
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2016 में बहादुरगढ़ स्थित सेक्टर-2 में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के लिए 12 एकड़ भूमि को मंजूरी दे दी गई। इसके लिए विभाग द्वारा भेजी गई 12 एकड़ भूमि में 212 प्लॉटों की ड्राइंग को इस वर्ष अगस्त में मंजूरी दे दी गई। मंजूरी मिलते ही विस्थापन को लेकर विभाग द्वारा कभी भी काटे गए प्लॉटों के ड्रॉ की घोषणा की जा सकती है।

अधर में लटक सकता है विस्थापन प्रोजेक्ट
कश्मीरी पंडितों के विस्थापन प्रोजेक्ट को अब भी ब्रेक लग सकते हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार विस्थापन के लिए काटे गए प्लॉटों पर अपना हक स्थापित करने के लिए कश्मीरी पंडितों को पहले से मौजूद अपनी भूमि का इंतकाल हुडा के फेवर में करवाना होगा, जिसको लेकर अभी भी मामला लंबित चल रहा है, लेकिन विभागीय अधिकारियों का का मानना है कि इस प्रोजेक्ट को लेकर जो सबसे बड़ी बाधा थी, उस पर सरकार द्वारा मंजूरी मिल चुकी है। पहले से कश्मीरी पंडितों के नाम भूमि के इंतकाल को लेकर चल रहा मामला भी जल्द ही हल करवा दिया जाएगा और इस 12 एकड़ भूमि पर काटे गए 212 प्लॉटों के ड्रॉ निकाल विस्थापन कार्य को गति प्रदान की जाएगी। 

प्लॉटों का ब्योरा
79.75 वर्ग मीटर एरिया में रिहायसी प्लॉट 21
129.96 वर्ग मीटर एरिया में रिहायसी प्लॉट 34
162 वर्ग मीटर एरिया में रिहायसी प्लॉट 75
232.30 वर्ग मीटर एरिया में रिहायसी प्लॉट 77
324 वर्ग मीटर एरिया में रिहायसी प्लॉट 04
416 वर्ग मीटर एरिया में रिहायसी प्लॉट 01

इस प्रोजेक्ट के लिए विभाग द्वारा ड्राइंग तैयार करके मुख्यालय भेजी गई भी, जिसे मंजूरी मिल गई है। इस भूमि में 212 प्लॉट काटे गए हैं, जिसके लिए अन्य विभागीय कार्य करीबन पूरे हो चुके हैं। अब कभी भी हुडा द्वारा इसके ड्रॉ की घोषणा की जा सकती है।

- देशराज, जिला योजनाकार अधिकारी


कश्मीरी पंडितों का ये विस्थापन का मामला वर्ष 1997 से लंबित चल रहा है। वर्ष 1997 में करीब 10 एकड़ भूमि पर मामला पेंडिंग था, लेकिन वर्ष 2002 में इनकी मांग को देखते हुए इसे 12 एकड़ कर दिया गया। इसी वर्ष अगस्त में जिला योजनाकार विभाग द्वारा भेजी गई ड्राइंग को मंजूरी मिल गई है। पंडितों द्वारा मालिकाना हक जताए जाने वाली जमीन का हुडा के फेवर में इंतकाल का कार्य पूरा होते ही विस्थापन प्रोजेक्ट का अंतिम चरण पूरा हो जाएगा।
प्रदीप राठी, हुडा संपदा अधिकारी
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