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Jhajjar-Bahadurgarh News: धूमधाम से निकाली कलश यात्रा, झूमे श्रद्धालु
Fri, 21 Mar 2025 02:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Fri, 21 Mar 2025 02:48 AM IST
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-फोटो 63 : महिलाओं द्वारा निकाली गई कलश यात्रा। संवाद
बहादुरगढ़। शहर के लाइनपार क्षेत्र में वीरवार को इस्कॉन मंदिर की ओर से कलश यात्रा निकाली गई।
कलश यात्रा नाहरा-नाहरी रोड पर स्थित साईं मंदिर से शुरू हुई और बामनोली मोड़ पर स्थित इस्कॉन मंदिर में संपन्न हुई। इस दौरान महिलाओं ने नृत्य भी किया। वहीं 23 मार्च को दिल्ली-रोहतक रोड पर माहेश्वरी भवन से रथ यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई लाइनपार स्थित इस्कॉन मंदिर में संपन्न होगी।
यात्रा के इस्कॉन मंदिर में पहुंचने के बाद स्वामी प्रबोधानंद ने महिलाओं को प्रवचन सुनाए। कथा में स्वामी प्रबोधानंद ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उपदेशों का वर्णन किया, जो श्रीमद् भागवत पुराण में वर्णित हैं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। इनमें उनकी बाल लीलाएं, गोपियों के साथ उनका प्रेम और दुशासन का वध शामिल हैं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम का महत्व बताया, जो श्रीमद् भागवत पुराण में वर्णित हैं। कथा ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उपदेशों के बारे में जानने का अवसर प्रदान किया और उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान और आत्म-ज्ञान की ओर प्रेरित किया।
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कलश यात्रा नाहरा-नाहरी रोड पर स्थित साईं मंदिर से शुरू हुई और बामनोली मोड़ पर स्थित इस्कॉन मंदिर में संपन्न हुई। इस दौरान महिलाओं ने नृत्य भी किया। वहीं 23 मार्च को दिल्ली-रोहतक रोड पर माहेश्वरी भवन से रथ यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई लाइनपार स्थित इस्कॉन मंदिर में संपन्न होगी।
यात्रा के इस्कॉन मंदिर में पहुंचने के बाद स्वामी प्रबोधानंद ने महिलाओं को प्रवचन सुनाए। कथा में स्वामी प्रबोधानंद ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उपदेशों का वर्णन किया, जो श्रीमद् भागवत पुराण में वर्णित हैं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। इनमें उनकी बाल लीलाएं, गोपियों के साथ उनका प्रेम और दुशासन का वध शामिल हैं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति और प्रेम का महत्व बताया, जो श्रीमद् भागवत पुराण में वर्णित हैं। कथा ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उपदेशों के बारे में जानने का अवसर प्रदान किया और उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान और आत्म-ज्ञान की ओर प्रेरित किया।
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