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वतन की मिट्टी में मिल गए बदलूराम
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर
Updated Wed, 04 May 2016 01:48 AM IST
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बदलूराम
- फोटो : bureau
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प्रथम विश्वयुद्ध में विक्टोरिया क्रास विजेता शहीद बदलूसिंह की समाधि मंगलवार को 98 साल बाद अपने वतन आ गई। समाधि की मिट्टी की कलश यात्रा का उनके पैतृक गांव ढाकला में पहुंचने पर जोरदार स्वागत हुआ। शहर के कोसली मोड़ पर सैकड़ों वाहनों के काफिले, डीजे पर बजते देशभक्ति के गीतों व हाथ में तिरंगा झंडा लिए सैकड़ों की संख्या में मौजूद लोगों ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। हुजूम इस कदर उमड़ा कि 15 किलोमीटर का सफर तय करने में साढ़े तीन घंटे का समय लगा। इतना ही नहीं झज्जर से ढाकला के बीच सभी मौजूद खाजपुर, रईया, डावला, कासनी, हसनपुर सहित सभी गांवों के ग्रामीणों ने यात्रा का जोरदार स्वागत किया और कृषि मंत्री का आभार जताया। ढाकला के संबोधन में धनखड़ ने कहा कि ऐसे कई कई गुमनाम भारतीय शहीद हुए हैं। जिन्हें सम्मान नहीं मिला पाया है।
चेतन शर्मा रहे आकर्षण का केंद्र
बदलूसिंह की मिट्टी लेकर पहुंचे धनखड़ के साथ भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे चेतन शर्मा भी मंच पर मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि उन्हें जब यह पता लगा कि शहीद की समाधि से मिट्टी लाई जा रही है तो वे अपने को रोक नहीं सके और यहां नमन करने के लिए चले आए। चेतन शर्मा के साथ बाद में बहुत युवाओं ने फोटो भी खिंचवाई।
जल सेवा की भी रही होड़
गर्मी के चलते लोगों को परेशानी न हो, इसलिए रास्ते में अनेक गांवों में जलसेवा भी की जा रही थी। गांव के लोगों ने मीठे पानी की छबील लगाई हुई थी तथा इस यात्रा में शामिल हर किसी को मीठा जल पीला रहे थे।
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परिजनों को मिली नई पहचान
शहीद बदलू सिंह को बहादुरी के लिए विक्टोरिया क्रॉस मिला था। आज जब उनकी समाधि से मिट्टी आई तो उस परिवार को भी नई ऊर्जा व पहचान मिली, जिससे बदलू सिंह संबंध रखते थे। उनके परिवार के महाबीर धनखड़ ने मंच पर गीत सुनाया तथा उनके जीवन पर प्रकाश डाला। इसी परिवार से सतीश व योगेंद्र जो एयरफोर्स में है, मौजूद रहे। सेना की ओर से भी बदलू सिंह के जीवन पर प्रकाश डाला गया।
ढाकला मोड़ से सेना के बैंड ने की अगुवाई
हवाई अड्डे से मिट्टी के कलश को लेकर झज्जर पहु़ंचने पर युवाओं, पूर्व सैनिकों, समाज के गणमान्य लोगों ने जोरदार स्वागत किया। कोसली रोड से ढाकला गांव तक मिट्टी के कलश को काफिले के रूप में गाजे बाजे के साथ ले जाया गया। रास्ते में जगह जगह ग्रामीणों ने अपने वीर सुपूत को श्रद्धांजलि दी। गांव ढाकला पहुंचने पर मिट्टी के कलश की सेना के बैंड ने अगवानी की। स्मारक स्थल पर सेना व हरियाणा पुलिस के जवानों ने सलामी दी।
6 जवानों के साथ दो हजार दुश्मनों को दी थी टक्कर
डेक्कन होर्स के उप कमान अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल मुनीष गुप्ता ने अमरवीर रिसलदा बदलूराम के सैन्य जीवन के बारे में बताया। कमान अधिकारी ने कहा कि डेक्कन होर्स को अपने अमरवीर पर गर्व है। उन्होंने कहा कि शहीद बदलूसिंह ने सैकड़ों की संख्या में दुश्मनों को मार गिराया था और बहुतों को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया था। मात्र 6 जवानों के साथ ही बदलू सिंह ने दुश्मनों से टक्कर लेते हुए अपनी दो हजार से अधिक साथियों की जान बचाई थी।
मिस्र और भारतीय नेताओं की मदद से संभव हुआ काम
मिस्र से यहां मिट्टी लाना भी आसान काम नहीं था। धनखड़ के अलावा उनके साथ गए विधायक ओमप्रकाश यादव व रविन्द्र मच्छरोली ने कहा कि वहां बहुत शहीदों की समाधियां हैं। जिनमें बहुत गुमनाम भारतीय हैं। वहां समाधियों की बात आने पर धनखड़ को अपने शहीद की याद आई तो उन्होंने वहां भारतीय राजदूत संजय भट्ठाचार्य से इसकी चर्चा की। जिसके बाद शहीद बदलू सिंह की समाधि का पता लगाया गया। और भारत लाने का प्रयास शुरू कर दिया। वहीं से भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, रक्षा राज्य मंत्री राव इंद्रजीत तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री से कृषि मंत्री ने बात की तथा वहां से मिट्टी लाने की इच्छा जताई। जिसके बाद राजनीतिक तौर पर मिस्र के राजनेताओं से बातचीत की गई। तब जाकर यह संभव हुआ। स्वयं धनखड़ के अलावा दोनों विधायकों ने यहां अपने संबोधन में इस बारे में विशेष जिक्र किया। उन्होंने इस सहयोग के लिए मिस्र सरकार का आभार भी जताया।
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चेतन शर्मा रहे आकर्षण का केंद्र
बदलूसिंह की मिट्टी लेकर पहुंचे धनखड़ के साथ भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे चेतन शर्मा भी मंच पर मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि उन्हें जब यह पता लगा कि शहीद की समाधि से मिट्टी लाई जा रही है तो वे अपने को रोक नहीं सके और यहां नमन करने के लिए चले आए। चेतन शर्मा के साथ बाद में बहुत युवाओं ने फोटो भी खिंचवाई।
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जल सेवा की भी रही होड़
गर्मी के चलते लोगों को परेशानी न हो, इसलिए रास्ते में अनेक गांवों में जलसेवा भी की जा रही थी। गांव के लोगों ने मीठे पानी की छबील लगाई हुई थी तथा इस यात्रा में शामिल हर किसी को मीठा जल पीला रहे थे।
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परिजनों को मिली नई पहचान
शहीद बदलू सिंह को बहादुरी के लिए विक्टोरिया क्रॉस मिला था। आज जब उनकी समाधि से मिट्टी आई तो उस परिवार को भी नई ऊर्जा व पहचान मिली, जिससे बदलू सिंह संबंध रखते थे। उनके परिवार के महाबीर धनखड़ ने मंच पर गीत सुनाया तथा उनके जीवन पर प्रकाश डाला। इसी परिवार से सतीश व योगेंद्र जो एयरफोर्स में है, मौजूद रहे। सेना की ओर से भी बदलू सिंह के जीवन पर प्रकाश डाला गया।
ढाकला मोड़ से सेना के बैंड ने की अगुवाई
हवाई अड्डे से मिट्टी के कलश को लेकर झज्जर पहु़ंचने पर युवाओं, पूर्व सैनिकों, समाज के गणमान्य लोगों ने जोरदार स्वागत किया। कोसली रोड से ढाकला गांव तक मिट्टी के कलश को काफिले के रूप में गाजे बाजे के साथ ले जाया गया। रास्ते में जगह जगह ग्रामीणों ने अपने वीर सुपूत को श्रद्धांजलि दी। गांव ढाकला पहुंचने पर मिट्टी के कलश की सेना के बैंड ने अगवानी की। स्मारक स्थल पर सेना व हरियाणा पुलिस के जवानों ने सलामी दी।
6 जवानों के साथ दो हजार दुश्मनों को दी थी टक्कर
डेक्कन होर्स के उप कमान अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल मुनीष गुप्ता ने अमरवीर रिसलदा बदलूराम के सैन्य जीवन के बारे में बताया। कमान अधिकारी ने कहा कि डेक्कन होर्स को अपने अमरवीर पर गर्व है। उन्होंने कहा कि शहीद बदलूसिंह ने सैकड़ों की संख्या में दुश्मनों को मार गिराया था और बहुतों को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया था। मात्र 6 जवानों के साथ ही बदलू सिंह ने दुश्मनों से टक्कर लेते हुए अपनी दो हजार से अधिक साथियों की जान बचाई थी।
मिस्र और भारतीय नेताओं की मदद से संभव हुआ काम
मिस्र से यहां मिट्टी लाना भी आसान काम नहीं था। धनखड़ के अलावा उनके साथ गए विधायक ओमप्रकाश यादव व रविन्द्र मच्छरोली ने कहा कि वहां बहुत शहीदों की समाधियां हैं। जिनमें बहुत गुमनाम भारतीय हैं। वहां समाधियों की बात आने पर धनखड़ को अपने शहीद की याद आई तो उन्होंने वहां भारतीय राजदूत संजय भट्ठाचार्य से इसकी चर्चा की। जिसके बाद शहीद बदलू सिंह की समाधि का पता लगाया गया। और भारत लाने का प्रयास शुरू कर दिया। वहीं से भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, रक्षा राज्य मंत्री राव इंद्रजीत तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री से कृषि मंत्री ने बात की तथा वहां से मिट्टी लाने की इच्छा जताई। जिसके बाद राजनीतिक तौर पर मिस्र के राजनेताओं से बातचीत की गई। तब जाकर यह संभव हुआ। स्वयं धनखड़ के अलावा दोनों विधायकों ने यहां अपने संबोधन में इस बारे में विशेष जिक्र किया। उन्होंने इस सहयोग के लिए मिस्र सरकार का आभार भी जताया।