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50 सांसदों का किसान संसद तक आना आंदोलन की बड़ी सफलता : अमरजीत
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भाकियू की सभा में अपने नेताओं के विचार सुनते किसान।
- फोटो : Bahadurgarh
भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के नेता अमरजीत सिंह सदोक ने कहा कि किसान आंदोलन कामयाबी के लिए निरंतर अग्रसर हो रहा है। संसद सत्र के दौरान राहुल गांधी समेत 50 सांसदों का जंतर-मंतर पर किसान संसद तक आना किसान आंदोलन के रणनीतिकारों की बड़ी सफलता है।
नयागांव चौक के निकट भाकियू की सभा को संबोधित करते हुए सदोक ने कहा कि तीन नए कृषि कानून किसानों को बर्बाद करने के लिए बनाए गए हैं। इनके दूरगामी परिणाम बेहद खराब होंगे। उन्होंने कहा कि इन कृषि विरोधी और जनविरोधी कानूनों के खिलाफ जारी संघर्ष के दौरान सरकार द्वारा लोकसभा का मानसून सत्र चलाया जा रहा है। जंतर-मंतर पर किसान संसद चल रही है। छह अगस्त को राहुल गांधी के नेतृत्व में लोकसभा में विपक्ष के 50 सदस्यों ने किसान संसद की बातचीत सुनी। यह सब किसान संघर्ष के दबाव में हुआ है।
रणधीर सिंह मलूका और दर्शन सिंह चंगालीवाला ने कहा कि मोदी सरकार में भाजपा की भूमिका अतीत में बेहद निंदनीय रही है। वर्ष 2002 में गुजरात में सांप्रदायिक दंगे भड़के थे, तब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। पिछले साल, एनआरसी के मुद्दे पर दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे भड़के। वर्तमान किसान संघर्ष के दौरान भी सांप्रदायिक कार्ड खेलने के कई प्रयास किए गए लेकिन किसान संगठनों के सहज नेतृत्व ने सरकार के इस कदम को विफल कर दिया। डॉ. गुरिंदर सिंह मान, यूनियन के फाजिल्का जिला महासचिव हरबंस सिंह कोटली और उत्तम सिंह ने भी सभा को संबोधित किया।
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नयागांव चौक के निकट भाकियू की सभा को संबोधित करते हुए सदोक ने कहा कि तीन नए कृषि कानून किसानों को बर्बाद करने के लिए बनाए गए हैं। इनके दूरगामी परिणाम बेहद खराब होंगे। उन्होंने कहा कि इन कृषि विरोधी और जनविरोधी कानूनों के खिलाफ जारी संघर्ष के दौरान सरकार द्वारा लोकसभा का मानसून सत्र चलाया जा रहा है। जंतर-मंतर पर किसान संसद चल रही है। छह अगस्त को राहुल गांधी के नेतृत्व में लोकसभा में विपक्ष के 50 सदस्यों ने किसान संसद की बातचीत सुनी। यह सब किसान संघर्ष के दबाव में हुआ है।
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रणधीर सिंह मलूका और दर्शन सिंह चंगालीवाला ने कहा कि मोदी सरकार में भाजपा की भूमिका अतीत में बेहद निंदनीय रही है। वर्ष 2002 में गुजरात में सांप्रदायिक दंगे भड़के थे, तब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। पिछले साल, एनआरसी के मुद्दे पर दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे भड़के। वर्तमान किसान संघर्ष के दौरान भी सांप्रदायिक कार्ड खेलने के कई प्रयास किए गए लेकिन किसान संगठनों के सहज नेतृत्व ने सरकार के इस कदम को विफल कर दिया। डॉ. गुरिंदर सिंह मान, यूनियन के फाजिल्का जिला महासचिव हरबंस सिंह कोटली और उत्तम सिंह ने भी सभा को संबोधित किया।
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