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व्यापारियों की शर्तों को स्वीकार करने के लिए किसान को होना पड़ेगा बाध्य
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संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा दिल्ली में जंतर मंतर पर बुधवार को आयोजित किसान संसद में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून पर चर्चा हुई। किसान संसद में तमाम नुमाइंदों ने इस कानून को तुरंत रद्द करने की मांग की।
किसान संसद में हुई चर्चा में भाग लेते हुए एआईकेकेएमएस के सोनू शर्मा ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत खेती तो किसान ही करेगा, परंतु करार के तहत करवाएगी कंपनी। करार बराबर वाली पार्टियों में होता है। एक तरफ गांव का गरीब किसान जिसके पास 2-4 एकड़ जमीन है, दूसरी तरफ अडानी अंबानी जैसे कॉरपोरेट घराने। किसान का बड़े व्यापारी के साथ समझौता होगा, तो उसे इन व्यापारियों की शर्तों को ही स्वीकार करने को बाध्य होना पड़ेगा।
सरकार का दावा गलत
सुरेंद्र कुमार ने कहा कि इस कानून में किसानों को मजबूत करने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का जो दावा सरकार की ओर से किया जा रहा है, वह झूठा तथा सरासर धोखाधड़ी पूर्ण है, क्योंकि इस कानून में किसानों की फसल की कीमत तय करने की बात कही गई है। लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य की नहीं अर्थात फसल के उचित दाम मिलने की संभावना नहीं है। इस कानून के अनुसार किसान को संबंधित व्यापारी या कंपनी से ही खाद, बीज, कीटनाशक और अन्य चीजें खरीदनी होंगी।
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विक्रम ने कहा कि केंद्र सरकार के निर्देशानुसार विवाद का निपटारा सरकारी अधिकारी करेंगे जो सामान्यत: ताकतवर और प्रभावशाली लोगों के पक्ष में काम करते हैं। उन्होंने माजीसा एग्रो प्रोडक्ट कंपनी द्वारा वहां के किसानों के साथ किए गए धोखे का उदाहरण दिया और कहा कि यह कानून किसानों के हित में बिल्कुल नहीं है इसलिए इसे तुरंत रद्द किया जाए।
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किसान संसद में हुई चर्चा में भाग लेते हुए एआईकेकेएमएस के सोनू शर्मा ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के तहत खेती तो किसान ही करेगा, परंतु करार के तहत करवाएगी कंपनी। करार बराबर वाली पार्टियों में होता है। एक तरफ गांव का गरीब किसान जिसके पास 2-4 एकड़ जमीन है, दूसरी तरफ अडानी अंबानी जैसे कॉरपोरेट घराने। किसान का बड़े व्यापारी के साथ समझौता होगा, तो उसे इन व्यापारियों की शर्तों को ही स्वीकार करने को बाध्य होना पड़ेगा।
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सरकार का दावा गलत
सुरेंद्र कुमार ने कहा कि इस कानून में किसानों को मजबूत करने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का जो दावा सरकार की ओर से किया जा रहा है, वह झूठा तथा सरासर धोखाधड़ी पूर्ण है, क्योंकि इस कानून में किसानों की फसल की कीमत तय करने की बात कही गई है। लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य की नहीं अर्थात फसल के उचित दाम मिलने की संभावना नहीं है। इस कानून के अनुसार किसान को संबंधित व्यापारी या कंपनी से ही खाद, बीज, कीटनाशक और अन्य चीजें खरीदनी होंगी।
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विक्रम ने कहा कि केंद्र सरकार के निर्देशानुसार विवाद का निपटारा सरकारी अधिकारी करेंगे जो सामान्यत: ताकतवर और प्रभावशाली लोगों के पक्ष में काम करते हैं। उन्होंने माजीसा एग्रो प्रोडक्ट कंपनी द्वारा वहां के किसानों के साथ किए गए धोखे का उदाहरण दिया और कहा कि यह कानून किसानों के हित में बिल्कुल नहीं है इसलिए इसे तुरंत रद्द किया जाए।