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तीन माह बाद स्कूलों में दिखी चहल-पहल, छठीं से 8वीं तक के खुले स्कूल
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स्कूल खुलने के बाद पढ़ने के लिए जातीं छात्राएं। संवाद
- फोटो : Jhjhar
प्रदेश सरकार के आदेश के क्रम में शुक्रवार को छठीं से आठवीं तक के स्कूल खुले। पहले दिन सरकारी स्कूलों में 50 प्रतिशत व निजी विद्यालयों में करीब 49 प्रतिशत विद्यार्थी पहुंचे। करने के लिए स्कूल खोले हैं। एमआईएस पोर्टल के अनुसार वरिष्ठ माध्यमिक, उच्च विद्यालयों में छठी से आठवीं तक के 19410 विद्यार्थी पहले दिन स्कूल आए।
स्कूल में पहुंचने वाले हर बच्चे की गेट पर स्क्रीनिंग करवाई गई। इसके अलावा एक विद्यार्थी को एक बेंच पर बैठाने की व्यवस्था की गई है। सभी कमरों में सैनिटाइजर का छिड़काव स्कूलों की तरफ से करवाया गया है। इसके अलावा स्कूलों में सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजर, मास्क की भी व्यवस्था की गई है, ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
स्कूलों में छठी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी स्कूलों में पहुंच रहे हैं। अब स्कूलों कक्षाएं नियमित रूप से लगाई जा रही हैं ताकि नियमित रूप से पढ़ाई हो सके।
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- बीपी राणा, जिला शिक्षा अधिकारी, झज्जर
बहादुरगढ़ में पहले दिन कम रही हाजिरी
पहले दिन क्षेत्र के अनेक स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति काफी कम रही। कोरोना के कारण अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने में कम रुचि दिखाई। कक्षाएं शुरू होने का निर्धारित समय 9 बजे है, पर कई स्कूल प्रमुखों ने बच्चों को 20 या 30 मिनट पहले ही बुला लिया गया था। माध्यमिक कक्षाओं के बच्चों की उपस्थिति 35 से 50 फीसदी रही।
सहमति पत्र लाने वाले विद्यार्थियों को दिया प्रवेश
स्कूलों में उन्हीं विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया जो अपने अभिभावकों की लिखित सहमति लेकर आए। सभी बच्चे फेस मास्क के साथ आए थे, हालांकि कई बच्चों ने अपने मास्क नाक से नीचे किए हुए थे।
घर से पानी लेकर आए बच्चे
राणा प्रताप स्कूल के मुख्य अध्यापक सतीश शर्मा ने बताया कि निर्देशों को सही ढंग से लागू करने के लिए उनके स्कूल में बच्चों को 20 मिनट पहले ही बुला लिया गया था। सभी बच्चे पानी की बोतल भरकर साथ लाए थे। खाली होने के बाद बच्चों की बोतलों में स्कूल से ही पानी भरा गया। बच्चों को एक-दूसरे से हाथ नहीं मिलाने और स्टेशनरी व पुस्तकों का आदान-प्रदान नहीं करने के लिए बार-बार समझाया गया।
स्वयं बच्चों को लेकर आए अभिभावक
आर्य नगर की गली नंबर-5 के निवासी 7वीं कक्षा के छात्र मनीष कुमार ने कहा कि बहुत दिन घर में ही रहे, अब पूरा दिन घर में मन नहीं लगता। रानी कुमारी ने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई करने से कई प्रश्न समझ नहीं आते। कक्षाओं में ही अच्छी पढ़ाई होती है।
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स्कूल में पहुंचने वाले हर बच्चे की गेट पर स्क्रीनिंग करवाई गई। इसके अलावा एक विद्यार्थी को एक बेंच पर बैठाने की व्यवस्था की गई है। सभी कमरों में सैनिटाइजर का छिड़काव स्कूलों की तरफ से करवाया गया है। इसके अलावा स्कूलों में सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजर, मास्क की भी व्यवस्था की गई है, ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
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स्कूलों में छठी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थी स्कूलों में पहुंच रहे हैं। अब स्कूलों कक्षाएं नियमित रूप से लगाई जा रही हैं ताकि नियमित रूप से पढ़ाई हो सके।
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- बीपी राणा, जिला शिक्षा अधिकारी, झज्जर
बहादुरगढ़ में पहले दिन कम रही हाजिरी
पहले दिन क्षेत्र के अनेक स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति काफी कम रही। कोरोना के कारण अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने में कम रुचि दिखाई। कक्षाएं शुरू होने का निर्धारित समय 9 बजे है, पर कई स्कूल प्रमुखों ने बच्चों को 20 या 30 मिनट पहले ही बुला लिया गया था। माध्यमिक कक्षाओं के बच्चों की उपस्थिति 35 से 50 फीसदी रही।
सहमति पत्र लाने वाले विद्यार्थियों को दिया प्रवेश
स्कूलों में उन्हीं विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया जो अपने अभिभावकों की लिखित सहमति लेकर आए। सभी बच्चे फेस मास्क के साथ आए थे, हालांकि कई बच्चों ने अपने मास्क नाक से नीचे किए हुए थे।
घर से पानी लेकर आए बच्चे
राणा प्रताप स्कूल के मुख्य अध्यापक सतीश शर्मा ने बताया कि निर्देशों को सही ढंग से लागू करने के लिए उनके स्कूल में बच्चों को 20 मिनट पहले ही बुला लिया गया था। सभी बच्चे पानी की बोतल भरकर साथ लाए थे। खाली होने के बाद बच्चों की बोतलों में स्कूल से ही पानी भरा गया। बच्चों को एक-दूसरे से हाथ नहीं मिलाने और स्टेशनरी व पुस्तकों का आदान-प्रदान नहीं करने के लिए बार-बार समझाया गया।
स्वयं बच्चों को लेकर आए अभिभावक
आर्य नगर की गली नंबर-5 के निवासी 7वीं कक्षा के छात्र मनीष कुमार ने कहा कि बहुत दिन घर में ही रहे, अब पूरा दिन घर में मन नहीं लगता। रानी कुमारी ने कहा कि ऑनलाइन पढ़ाई करने से कई प्रश्न समझ नहीं आते। कक्षाओं में ही अच्छी पढ़ाई होती है।