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वादा पूरा नहीं करने पर जड़ा ताला
झज्जर
Updated Fri, 25 Jul 2014 01:02 AM IST
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पीएचसी बिरोहड़ के स्टॉफ को वादे के अनुसार दस दिन में नहीं बदलने से खफा ग्रामीण गुरुवार को अस्पताल के सामने धरने पर बैठ गए और एक बार फिर अस्पताल पर ताला जड़ दिया।
इससे स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं। ग्रामीणों ने स्टॉफ को अस्पताल के अंदर नहीं जाने दिया और गेट पर ही रोके रखा। बिरोहड़ के ग्रामीणों द्वारा ताला लगाए जाने की खबर जब सेहलंगा व कालियावास के लोगाें को मिली तो उन्होंने ने भी ग्रामीणों का सहयोग किया और गेट पर आ डटे। सूचना पर सीएमओ पहुंचे। उन्होंने अस्थाई कर्मचारियों का तो तबादला कर दिया, मगर बाकी के तबादले को अपने अधिकार से बाहर बताया और ग्रामीणों को इस मामले में शिक्षामंत्री से मिलने की सलाह दी।
इसके बाद ग्रामीणों ने दोपहर में 12 बजे ताला खोला। हालांकि उन्होंने अपने स्तर पर पीएससी के अधिकांश स्टॉफ का डेपुटेशन कर दिया।
ग्रामीण 15 जुलाई को सेहलंगा के 18 वर्षीय छात्र उमेश को घायलावस्था में अस्पताल ले गये थे, किंतु वहां कोई भी कर्मचारी न मिलने से ग्रामीण भड़क गये थे। समय पर उपचार न मिलने से घायल उमेश की मृत्यु हो गई थी। विरोध में ग्रामीणों ने पीएचसी में ताला लगा दिया था और पूरा स्टाफ बदले जाने की मांग की थी। उस समय अधिकारियों ने स्टाफ बदलने के लिए दस दिन का समय मांगा था।
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इस बात पर ग्रामीणों ने पीएचसी का ताला खोल दिया था। ग्रामीणों ने कहा था कि अगर 10 दिन में तबादला नहीं किया गया तो ग्रामीण पुन: ताला जड़ने को मजबूर होंगे। समय सीमा पूरा होते ही ग्रामीण सुबह पीएचसी के सामने जमा हो गए और ताला जड़ दिया। बाद मे सेहलंगा और कालियावास गांव के ग्रामीण भी बिरहोड़ पहुंच गये और प्रशासन के खिलाफ रोष जताते हुए जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों को अंदर नहीं जाने दिया। सूचना पाकर झज्जर से सीएमओ रमेश धनखड़, एसएमओ जगदीश जाखड़, तहसीलदार और नायब तहसीलदार मातनहेल मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया।
इस पर ग्रामीणों का कहना था कि 15 दिन पूर्व भी हमें स्टाफ का तबादला किये जाने का आश्वासन दिया गया था, किंतु कोई कार्रवाई नहीं की गई। हमें तुरंत प्रभाव से कार्रवाई चाहिए, जिसके बाद बाद सीएमओ डॉ. रमेश धनखड़ ने ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए चौकीदार प्रदीप व सोमवीर को छोड़कर सभी अस्थाई कर्मचारियों व चिकित्सक के तबादले को कर दिए। साथ ही कहा कि स्थाई कर्मचारियों के तबादले उनके हाथ में नहीं है, इसके लिए ग्रामीणों को मंत्री गीता भुक्कल के पास शिकायत दर्ज करवाने की सलाह दी। शिकायत पर सीएमओ झज्जर द्वारा भी हस्ताक्षर करने के बाद ग्रामीणों ने दोपहर 12 बजे ताला खोला।
अधिकांश स्टॉफ का किया डेपुटेशन:
सीएमओ डॉ. रमेश धनखड़ ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत को देखते हुए पीएचसी बिरोहड़ में तैनात मेडिकल आफिसर, डेंटल सर्जन, तीन एएनएम, तीन स्टॉफ नर्स सहित अन्य तकनीकी स्टॉफ को वहां से डेपुटेशन पर दूसरे स्थानों पर भेज दिया गया है, जबकि बिरोहड़ में शुक्रवार से दूसरे डॉक्टरों की तैनाती कर दी जाएगी। चूंकि तबादला करने का अधिकार उनके पास नहीं है, इसलिए ग्रामीणों से उन्होंने साफ कह दिया कि वे सिर्फ डेपुटेशन कर सकते हैं। जो उन्होंने कर दिया है।
फोटो नंबर : 24जेजेआरपी:12 व 13: बिरोहड़ में पीएचसी केबाहर जमा ग्रामीण
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इससे स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं। ग्रामीणों ने स्टॉफ को अस्पताल के अंदर नहीं जाने दिया और गेट पर ही रोके रखा। बिरोहड़ के ग्रामीणों द्वारा ताला लगाए जाने की खबर जब सेहलंगा व कालियावास के लोगाें को मिली तो उन्होंने ने भी ग्रामीणों का सहयोग किया और गेट पर आ डटे। सूचना पर सीएमओ पहुंचे। उन्होंने अस्थाई कर्मचारियों का तो तबादला कर दिया, मगर बाकी के तबादले को अपने अधिकार से बाहर बताया और ग्रामीणों को इस मामले में शिक्षामंत्री से मिलने की सलाह दी।
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इसके बाद ग्रामीणों ने दोपहर में 12 बजे ताला खोला। हालांकि उन्होंने अपने स्तर पर पीएससी के अधिकांश स्टॉफ का डेपुटेशन कर दिया।
ग्रामीण 15 जुलाई को सेहलंगा के 18 वर्षीय छात्र उमेश को घायलावस्था में अस्पताल ले गये थे, किंतु वहां कोई भी कर्मचारी न मिलने से ग्रामीण भड़क गये थे। समय पर उपचार न मिलने से घायल उमेश की मृत्यु हो गई थी। विरोध में ग्रामीणों ने पीएचसी में ताला लगा दिया था और पूरा स्टाफ बदले जाने की मांग की थी। उस समय अधिकारियों ने स्टाफ बदलने के लिए दस दिन का समय मांगा था।
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इस बात पर ग्रामीणों ने पीएचसी का ताला खोल दिया था। ग्रामीणों ने कहा था कि अगर 10 दिन में तबादला नहीं किया गया तो ग्रामीण पुन: ताला जड़ने को मजबूर होंगे। समय सीमा पूरा होते ही ग्रामीण सुबह पीएचसी के सामने जमा हो गए और ताला जड़ दिया। बाद मे सेहलंगा और कालियावास गांव के ग्रामीण भी बिरहोड़ पहुंच गये और प्रशासन के खिलाफ रोष जताते हुए जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों को अंदर नहीं जाने दिया। सूचना पाकर झज्जर से सीएमओ रमेश धनखड़, एसएमओ जगदीश जाखड़, तहसीलदार और नायब तहसीलदार मातनहेल मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया।
इस पर ग्रामीणों का कहना था कि 15 दिन पूर्व भी हमें स्टाफ का तबादला किये जाने का आश्वासन दिया गया था, किंतु कोई कार्रवाई नहीं की गई। हमें तुरंत प्रभाव से कार्रवाई चाहिए, जिसके बाद बाद सीएमओ डॉ. रमेश धनखड़ ने ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए चौकीदार प्रदीप व सोमवीर को छोड़कर सभी अस्थाई कर्मचारियों व चिकित्सक के तबादले को कर दिए। साथ ही कहा कि स्थाई कर्मचारियों के तबादले उनके हाथ में नहीं है, इसके लिए ग्रामीणों को मंत्री गीता भुक्कल के पास शिकायत दर्ज करवाने की सलाह दी। शिकायत पर सीएमओ झज्जर द्वारा भी हस्ताक्षर करने के बाद ग्रामीणों ने दोपहर 12 बजे ताला खोला।
अधिकांश स्टॉफ का किया डेपुटेशन:
सीएमओ डॉ. रमेश धनखड़ ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत को देखते हुए पीएचसी बिरोहड़ में तैनात मेडिकल आफिसर, डेंटल सर्जन, तीन एएनएम, तीन स्टॉफ नर्स सहित अन्य तकनीकी स्टॉफ को वहां से डेपुटेशन पर दूसरे स्थानों पर भेज दिया गया है, जबकि बिरोहड़ में शुक्रवार से दूसरे डॉक्टरों की तैनाती कर दी जाएगी। चूंकि तबादला करने का अधिकार उनके पास नहीं है, इसलिए ग्रामीणों से उन्होंने साफ कह दिया कि वे सिर्फ डेपुटेशन कर सकते हैं। जो उन्होंने कर दिया है।
फोटो नंबर : 24जेजेआरपी:12 व 13: बिरोहड़ में पीएचसी केबाहर जमा ग्रामीण