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Jhajjar-Bahadurgarh News: ईंट भट्ठा उद्योग पर महंगाई और मंदी की मार, दाम में नहीं होगी गिरावट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Feb 2026 01:54 AM IST
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Inflation and recession hit the brick kiln industry, prices will not fall.
फोटो नंबर 74: क्षेत्र में स्थापित ईंट भट्ठा। फाइल फोटो
बादली।
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ईंट भट्ठा उद्योग पर महंगाई और मंदी की दोहरी मार पड़ रही है। आठ माह से बंद भट्ठे एक मार्च से शुरू होंगे लेकिन इसके बाद भी ईंटों के दामों में गिरावट की संभावना नहीं है। मिट्टी के दाम बढ़ने के साथ ही ईंट पकाई में दोगुना खर्चा बढ़ गया है।
फरवरी में जहां ईंट 6,200 रुपये प्रति हजार हैं। वहीं नई ईंट निकलने के बाद भी भाव बराबर होंगे। बीते दो वर्ष में मिट्टी के दाम लगभग दोगुना महंगे हो चुके हैं जिसका सीधा असर ईंट के दाम बढ़े हैं। इसकी वजह से बिक्री घटी है।
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वही सरकार के ईंट भट्टों को लेकर बनाए गए सख्त नियम भी इस उद्योग के लिए रुकावट साबित हुए हैं। क्षेत्र में लगभग 205 से 225 भट्टे चल रहे हैं। सालाना करीब 70 लाख ईंटों का उत्पादन प्रति ईंट भट्ठा होता है।
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सरकार द्वारा ईंट भट्टों को लेकर लागू की गई नई गाइडलाइन और ईंधन महंगा होने के बाद दर्जनों भट्टे बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। मिट्टी के दाम एक रुपए प्रति ईंट से बढ़कर करीब ढाई रुपए प्रति ईंट हो गए हैं। इसी प्रकार से मजदूरी भी बढ़ी है।
पथाई से लेकर जलाई तक महंगाई की मार से मालिक परेशान और चिंतित है। हालांकि पिछले दो साल में कोयले के भाव कम हुए हैं जो कि 17 हजार रुपये प्रति टन से घटकर 13 हजार रुपये प्रति टन हुआ है। वही ईंट बनाने में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी का भाव भी उच्चतम स्तर पर है।

सरकार द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइन के बाद ईंट भट्टे साल भर के केवल चार महीने ही चल पाते हैं जबकि इससे पूर्व नौ महीने ईंट बनाने का काम चलता था। ऐसे में नए नियमों का सीधा असर ईंट उत्पादन पर हुआ है। डीजल के दाम भी बढ़े हैं।
भट्ठा संचालक दीपक और प्रवीन का कहना है कि सरकार को भट्टा उद्योग के लिए जीएसटी व कोयले के दामों में अतिरिक्त छूट देनी चाहिए।

मिट्टी/मजदूरी 2023 2025 2026
मिट्टी एक हजार दो हजार ढाई हजार (प्रति टन)
पथाई 800 850 एक हजार (प्रति टन)
भराई/निकासी 450 500 550 (प्रति टन)
जलाई लेबर 150 170 200 (प्रति टन)
कोयला 17 हजार 13 हजार 15 हजार (प्रति टन)
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