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खेती नहीं बची तो क्या खाऊंगी और कैसे बेटी को दूध पिलाऊंगी ः जगबीर कौर
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टीकरी बॉर्डर सभा में किसान नेताओं के विचार सुन एकता का प्रदर्शनी करती जगवीर कौर और अन्य छात्राएं?
- फोटो : Bahadurgarh
केंद्र सरकार के तीन कृषि संबंधी कानूनों को निरस्त करने और कानून बनाकर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में मजदूर, कर्मचारी, आढ़ती, वकील, महिलाएं, अध्यापक व विद्यार्थी सभी वर्ग सहयोग कर रहे हैं। छात्राओं का भी आंदोलन में कम सहयोग नहीं है।
पंजाब की छात्राएं शुरू से ही किसान आंदोलन का अंग बन रही हैं। पंजाब के मोगा की जगवीर कौर अपनी दो माह की बेटी इनायत को लेकर एक हफ्ते से टीकरी बॉर्डर पर डटी हैं। घर से सैकड़ों मील दूर नन्हीं बच्ची का पालन-पोषण करना बहुत मुश्किल होने के सवाल पर जगबीर कौर कहती हैं कि अपनी दो माह की बेटी को अपना दूध पिलाने के लिए मुझे अभी ठीक-ठाक पौष्टिक भोजन मिल जाता है। इस नन्हीं जान को कम से कम छह माह तक मां का दूध पिलाना मेरी जिम्मेदारी है। लेकिन जब फसलें नहीं रहेंगी तो मेरे जैसी तमाम मां समय पर अनाज तक को तरस जाएंगी। मां भूखी रहेंगी तो ये बच्चे भी भूखे ही मरेंगे।
जगवीर कौर पंजाब विश्वविद्यालय से पंजाबी में एमए और एमएड करने के बाद डीएम कॉलेज मोगा में एमए अंग्रेजी की छात्रा हैं। कहती हैं, मेरे अभिभावक किसान हैं और मैं भी मूलत: किसान हूं। केंद्र सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों को बर्बाद करने पर तुली है। सरकार के तीनों कृषि संबंधी कानून खेती को बर्बाद कर देंगे। खेती पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए इन तीनों कानूनों का विरोध करना जरूरी है। खेती को बर्बाद करते हम नहीं देख सकते। जगवीर कौर की तरह उनके पति भी पंजाब स्टूडेंट यूनियन से जुड़े हैं। वह भी शुुरुआत से ही किसान आंदोलन में सक्रिय हैं। कल 23 मार्च को वह शहीदी दिवस पर मोगा से युवाओं के जत्थे को लेकर टीकरी बार्डर पहुंचेंगे। इस जत्थे में काफी संख्या में छात्राएं भी शामिल रहेंगी।
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पंजाब स्टूडेंट यूनियन से जुड़ी छात्राएं कई अन्य छात्राएं एक सप्ताह से भी अधिक समय से टीकरी बॉर्डर धरने में शामिल हैं। दिल्ली-रोहतक रोड पर मेट्रो लाइन के पिलर नंबर 775 के पास ठहरी ये सभी छात्राएं दिनभर आंदोलन में हर तरह का सहयोग करती है। फरीदकोट के गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कालेज की छात्रा हरजीत कौर, बरजिंद्रा कॉलेज फरीदकोट से बीए की छात्रा कमलजीत कौर, बठिंडा की बीए की छात्रा किरण, बरजिंद्रा कालेज फरीदकोट से एमए अर्थशास्त्र की छात्रा सुखप्रीत भी 15 दिन से अधिक समय से टीकरी बॉर्डर पर धरनारत हैं।
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पंजाब की छात्राएं शुरू से ही किसान आंदोलन का अंग बन रही हैं। पंजाब के मोगा की जगवीर कौर अपनी दो माह की बेटी इनायत को लेकर एक हफ्ते से टीकरी बॉर्डर पर डटी हैं। घर से सैकड़ों मील दूर नन्हीं बच्ची का पालन-पोषण करना बहुत मुश्किल होने के सवाल पर जगबीर कौर कहती हैं कि अपनी दो माह की बेटी को अपना दूध पिलाने के लिए मुझे अभी ठीक-ठाक पौष्टिक भोजन मिल जाता है। इस नन्हीं जान को कम से कम छह माह तक मां का दूध पिलाना मेरी जिम्मेदारी है। लेकिन जब फसलें नहीं रहेंगी तो मेरे जैसी तमाम मां समय पर अनाज तक को तरस जाएंगी। मां भूखी रहेंगी तो ये बच्चे भी भूखे ही मरेंगे।
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जगवीर कौर पंजाब विश्वविद्यालय से पंजाबी में एमए और एमएड करने के बाद डीएम कॉलेज मोगा में एमए अंग्रेजी की छात्रा हैं। कहती हैं, मेरे अभिभावक किसान हैं और मैं भी मूलत: किसान हूं। केंद्र सरकार पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों को बर्बाद करने पर तुली है। सरकार के तीनों कृषि संबंधी कानून खेती को बर्बाद कर देंगे। खेती पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए इन तीनों कानूनों का विरोध करना जरूरी है। खेती को बर्बाद करते हम नहीं देख सकते। जगवीर कौर की तरह उनके पति भी पंजाब स्टूडेंट यूनियन से जुड़े हैं। वह भी शुुरुआत से ही किसान आंदोलन में सक्रिय हैं। कल 23 मार्च को वह शहीदी दिवस पर मोगा से युवाओं के जत्थे को लेकर टीकरी बार्डर पहुंचेंगे। इस जत्थे में काफी संख्या में छात्राएं भी शामिल रहेंगी।
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पंजाब स्टूडेंट यूनियन से जुड़ी छात्राएं कई अन्य छात्राएं एक सप्ताह से भी अधिक समय से टीकरी बॉर्डर धरने में शामिल हैं। दिल्ली-रोहतक रोड पर मेट्रो लाइन के पिलर नंबर 775 के पास ठहरी ये सभी छात्राएं दिनभर आंदोलन में हर तरह का सहयोग करती है। फरीदकोट के गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कालेज की छात्रा हरजीत कौर, बरजिंद्रा कॉलेज फरीदकोट से बीए की छात्रा कमलजीत कौर, बठिंडा की बीए की छात्रा किरण, बरजिंद्रा कालेज फरीदकोट से एमए अर्थशास्त्र की छात्रा सुखप्रीत भी 15 दिन से अधिक समय से टीकरी बॉर्डर पर धरनारत हैं।