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Jhajjar-Bahadurgarh News: होली के दिन गांव में लड़के या बछड़े के जन्म के बाद ही शुरू होगा होलिका दहन

Mon, 02 Mar 2026 02:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Mon, 02 Mar 2026 02:48 AM IST
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Holika Dahan will commence only after the birth of a boy or a calf in the village on the day of Holi.
01jjrp04- गांव में स्थापित की गई नंदी की प्रतिमा। स्रोत-ग्रामीण
साल्हावास। दशकों पूर्व झांसवा गांव में होलिका दहन की आग में झुलसकर दो सांड की मौत हो गई थी। इसके बाद झांसवा और उससे सटे मोहनबाड़ी गांव में होलिका दहन आज तक नहीं होता। लोगों का संकल्प है कि होली के दिन गांव में किसी लड़के या बछड़े के जन्म होने के बाद ही होलिका दहन शुरू होगा।
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दशकों से दोनों गांव के लोग अपने पूर्वजों की परंपरा का निष्ठा से पालन कर रहे हैं। यहां के ग्रामीणों को होली के दिन गांव में किसी महिला के लड़का या गाय के बछड़ा को जन्म दिए जाने का इंतजार है। हालांकि दोनों गांवों में होलिका पर्व जरूर मनाया जाता है।
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दो सांडों की मौत ने सबको झकझोर दिया
मोहनबाड़ी निवासी पूर्व एसीपी राजबीर जाखड़, कर्नल रणधीर सिंह, ब्लॉक समिति चेयरमैन दीपक झांसवा, एसआई रामकुमार, रमेश, सुरेंद्र, सचिव सुरेंद्र सिंह एवं कुलदीप जाखड़ ने बताया कि दशकों पहले होलिका दहन की अग्नि में दो सांड़ जलकर मर गए थे। इस हादसे ने सबको झकझोर दिया था।
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ऐसे मनती है होली

झांसवा व मोहनबाड़ी गांव में होली से एक दिन पूर्व गांव की महिलाएं गांव के बीचों-बीच बने बाबा भैया मंदिर में पूजा पाठ करती हैं। होलिका के स्थान पर गोबर से बने उपले, बिड़कले इकट्ठे करके महिलाएं होली पूजन करती हैं लेकिन किसी प्रकार का कोई दहन नहीं किया जाता है।



बैल की याद में बनवाई प्रतिमा
होलिका दहन के समय आग में झुलसे बैलों की याद में दोनों गांवों में दशकों पूर्व प्रतिमा बनाई गई है। झांसवा गांव के ग्रामीणों ने बताया कि लगभग तीस वर्ष पहले यहां बैल की प्रतिमा बनाई गई थी। मोहनबाड़ी का निकास झांसवा से है इसलिए वहां पर बैल की प्रतिमा बाद में बनाई गई। आज भी लोग जब इस कथा को सुनते हैं तो आंखें नम हो जाती हैं। होली पर्व दोनों ही गांव एक साथ मनाते आ रहें हैं। दोनों ही गांव संकल्प पूरा होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब देखना यह है कि यह संकल्प कब तक पूरा हो पाता है।
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