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‘उपद्रव के दोषियों को तस्वीरों के साथ सामने लाया जाएगा’
ब्यूरो/अमर उजाला/झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sun, 29 May 2016 12:46 AM IST
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OP dhankhard
- फोटो : Bureau
शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा है कि उपद्रव का जलजला कहां से आया और साजिश कहां रची गई, यह सब जानते हैं। कौन कहां पर जिम्मेदार था, इसकी तस्वीर अभी आनी बाकीहै। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर निशाना साधते हुए शर्मा ने कहा कि उपद्रव के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों को वीडियो और तस्वीरों के साथ सामने लाया जाएगा।
शिक्षा मंत्री भगवान परशुराम जयंती पर कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद पत्रकारों से रू-ब-रू थे। इसी दौरान प्रदेश में प्रचलित एक लोक कहावत को उद्धृत करते हुए उन्होंने अटपटी बात भी कह दी। बोले, नानी खसम करके भाग गई और भुगतना धोते न पड़ रहा है। इसको स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार की गलत नीतियों की वजह से शिक्षा विभाग में बीस हजार शिक्षकों को सड़कों पर लाकर खड़ा कर दिया गया। पिछली सरकार में फर्जीवाड़े के तहत लगाए गए कंप्यूटर टीचरों के वेतन का भुगतान सरकार को 82 करोड़ देकर करना पड़ा है। अपनी चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए पूर्व सरकार ने सारा ड्रामा रचा।
उन्होंने कहा कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने ऊपर राजनीतिक प्रतिशोध व दुर्भावना से प्रेरित होकर झूठे मुकदमे दर्ज किए जाने की बात कहते है। लेकिन, पिछले दस वर्ष के शासनकाल में उन्होंने जिस प्रकार से तानाशाही का रवैया अपनाया था वह किसी से छिपा हुआ नहीं है। हुड्डा को यह नहीं भूलना चाहिए कि न्याय की कुर्सी पर बैठकर जो अन्याय करता है उसे एक न एक दिन उसका फल भुगतना ही पड़ता है।
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शिक्षा मंत्री भगवान परशुराम जयंती पर कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद पत्रकारों से रू-ब-रू थे। इसी दौरान प्रदेश में प्रचलित एक लोक कहावत को उद्धृत करते हुए उन्होंने अटपटी बात भी कह दी। बोले, नानी खसम करके भाग गई और भुगतना धोते न पड़ रहा है। इसको स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार की गलत नीतियों की वजह से शिक्षा विभाग में बीस हजार शिक्षकों को सड़कों पर लाकर खड़ा कर दिया गया। पिछली सरकार में फर्जीवाड़े के तहत लगाए गए कंप्यूटर टीचरों के वेतन का भुगतान सरकार को 82 करोड़ देकर करना पड़ा है। अपनी चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए पूर्व सरकार ने सारा ड्रामा रचा।
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उन्होंने कहा कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने ऊपर राजनीतिक प्रतिशोध व दुर्भावना से प्रेरित होकर झूठे मुकदमे दर्ज किए जाने की बात कहते है। लेकिन, पिछले दस वर्ष के शासनकाल में उन्होंने जिस प्रकार से तानाशाही का रवैया अपनाया था वह किसी से छिपा हुआ नहीं है। हुड्डा को यह नहीं भूलना चाहिए कि न्याय की कुर्सी पर बैठकर जो अन्याय करता है उसे एक न एक दिन उसका फल भुगतना ही पड़ता है।
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