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सरकारी गाड़ियों से हटने लगा हरियाणा सरकार का स्टीकर, निजी वाहन चालक उड़ा रहे धज्जियां
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एचएसआईआईडीसी में खड़ी सरकारी गाड़ी से ‘हरियाणा सरकार’ का स्टीकर हटाते कर्मचारी।
- फोटो : Bahadurgarh
अब किसी भी गाड़ी पर नंबर प्लेट के अलावा कुछ भी लिखा तो उन चालकों की शामत आएगी। चाहे वह सरकारी हो या निजी वाहन। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पिछले दिनों दिए आदेश के बाद सरकारी वाहनों पर लिखे शब्दों को हटाने का सिलसिला तो शुरू हो गया है, लेकिन निजी वाहन चालक हाईकोर्ट के आदेशों को मानने के लिए तैयार है। फिलहाल पुलिस की ओर से लोगों को अपने वाहनों पर कोई भी पद (डेजीगनेशन) न लिखने के लिए जागरूक किया जा रहा है। यदि फिर भी चालक नहीं मानते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
चाहे सरकारी वाहन हो या निजी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जो आदेश दिए हैं उनमें साफ-साफ कहा गया है कि किसी भी वाहन पर डेजीगनेशन (पद) नहीं लिखा जाएगा। यदि कोई वाहन चालक इन आदेशों का पालन नहीं करता है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद बहादुरगढ़ में सरकारी विभागों के चालकों ने वाहनों पर लिखे शब्दों को हटाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को एचएसआईआईडीसी में खड़ी विभाग की गाड़ी पर लिखा हरियाणा सरकार का स्टीक वाहन चालक हटाते नजर आए। चंडीगढ़ के बाद हरियाणा में भी सरकार की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों को लागू करवाने के फैसले के बाद हरियाणा में कई जगह तो ट्रैफिक पुलिस ने नए नियम के मुताबिक कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन बहादुरगढ़ पुलिस अभी भी कार्रवाई नहीं कर पा रही है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार किसी भी वाहन पर प्रेस, एडवोकेट, आर्मी, पुलिस, सरकारी विभाग या ऑफिसर का नाम, मेयर, पार्षद, सरपंच या किसी भी तरह का सिंबल नहीं लगाया जा सकता। सरकारी वाहनों से झंडी भी उतारी जाएगी।
उच्च न्यायालय के आदेश
24 जनवरी को उच्च न्यायालय ने वाहनों पर वीआईपी सिंबल लगाने के संबंध में आदेश जारी किए थे। इसमें कहा गया था कि कोई भी वाहन सड़क पर वीआईपी सिंबल के साथ नहीं दौड़ेगा। यह वीआईपी सिंबल वाहनों पर स्टीकर, उस पर अंकित शब्दों और झंडियों के हैं। कोर्ट के आदेश पर चंडीगढ़ के साथ कई जिलों में इस पर कार्रवाई तो शुरू कर दी गई है, लेकिन बहादुरगढ़ में कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
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हाईकोर्ट के आदेश अभी हमारे पास नहीं पहुंचे हैं, लेकिन फिर भी चालकों को वाहनों के ऊपर लिखे आर्मी, पुलिस, मेयर, पार्षद व सरपंच के प्रति जागरूक किया जा रहा है। यदि वाहन चालक इनको नहीं हटाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पहली बार होने वाला चालान 500 रुपये का होगा तो दूसरी बार एक हजार रुपये का चालान किया जाएगा।
बलवान सिंह, ट्रैफिक एसएचओ, बहादुरगढ़।
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चाहे सरकारी वाहन हो या निजी। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जो आदेश दिए हैं उनमें साफ-साफ कहा गया है कि किसी भी वाहन पर डेजीगनेशन (पद) नहीं लिखा जाएगा। यदि कोई वाहन चालक इन आदेशों का पालन नहीं करता है तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद बहादुरगढ़ में सरकारी विभागों के चालकों ने वाहनों पर लिखे शब्दों को हटाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को एचएसआईआईडीसी में खड़ी विभाग की गाड़ी पर लिखा हरियाणा सरकार का स्टीक वाहन चालक हटाते नजर आए। चंडीगढ़ के बाद हरियाणा में भी सरकार की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों को लागू करवाने के फैसले के बाद हरियाणा में कई जगह तो ट्रैफिक पुलिस ने नए नियम के मुताबिक कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन बहादुरगढ़ पुलिस अभी भी कार्रवाई नहीं कर पा रही है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार किसी भी वाहन पर प्रेस, एडवोकेट, आर्मी, पुलिस, सरकारी विभाग या ऑफिसर का नाम, मेयर, पार्षद, सरपंच या किसी भी तरह का सिंबल नहीं लगाया जा सकता। सरकारी वाहनों से झंडी भी उतारी जाएगी।
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उच्च न्यायालय के आदेश
24 जनवरी को उच्च न्यायालय ने वाहनों पर वीआईपी सिंबल लगाने के संबंध में आदेश जारी किए थे। इसमें कहा गया था कि कोई भी वाहन सड़क पर वीआईपी सिंबल के साथ नहीं दौड़ेगा। यह वीआईपी सिंबल वाहनों पर स्टीकर, उस पर अंकित शब्दों और झंडियों के हैं। कोर्ट के आदेश पर चंडीगढ़ के साथ कई जिलों में इस पर कार्रवाई तो शुरू कर दी गई है, लेकिन बहादुरगढ़ में कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
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हाईकोर्ट के आदेश अभी हमारे पास नहीं पहुंचे हैं, लेकिन फिर भी चालकों को वाहनों के ऊपर लिखे आर्मी, पुलिस, मेयर, पार्षद व सरपंच के प्रति जागरूक किया जा रहा है। यदि वाहन चालक इनको नहीं हटाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पहली बार होने वाला चालान 500 रुपये का होगा तो दूसरी बार एक हजार रुपये का चालान किया जाएगा।
बलवान सिंह, ट्रैफिक एसएचओ, बहादुरगढ़।