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Jhajjar-Bahadurgarh News: .ग्राहकों से गुलजार हुए बाजार

Tue, 06 Aug 2024 06:26 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 06 Aug 2024 06:26 AM IST
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Hariyali Teej...markets buzzing with customers
मिठाईयों की खरीदारी करते लोग।
बहादुरगढ़। हरियाली तीज के साथ अब त्योहारों का मौसम शुरू हो जाएगा। बाजारों में तीज की रौनक सोमवार से ही दिखने लगी। घेवर की खुशबू और मेहंदी का क्रेज बाजारों में देखने को मिल रहा है।
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इस बार तीज का त्योहार 7 अगस्त को मनाया जाएगा। सावन के पवित्र माह में आने वाले तीज पर शिव और पार्वती की पूजा की जाती है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं। खास तौर पर शादी के बाद ही पहली तीज काफी धूमधाम से मनाई जाती है। तीज पर्व से पहले महिलाओं के लिए बाजारों में खरीदारी का सीजन शुरू हो गया है। सोमवार को बाजारों में भीड़भाड़ रही। ब्यूटी पार्लरों में मेहंदी लगाने के लिए 5 और 6 अगस्त को हाउसफुल की स्थिति है। शहर के मेन बाजार, रेलवे रोड, नाहरा-नाहरी रोड के अलावा झज्जर रोड पर महिलाएं मेहंदी लगवाने के लिए पहुंच रही हैं। मिठाईयों की दुकानों पर कई तरह के घेवर महक रहे हैं। मावा घेवर, रबड़ी घेवर, मलाई घेवर, ड्राई फू्रट घेवर के अलावा सादा घेवर भी खूब पसंद किया जा रहा है। घेवर के अलग-अलग दुकानों पर 450 रुपये से एक हजार रुपये प्रति किलो के रेट मिल रहे हैं। घेवर के साथ फैनी भी बाजारों में खूब बिक रही है।
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सालों पुरानी सिंधारा की परंपरा आज भी बरकरार
देश में सर्दी, गर्मी, बरसात और बसंत के अनुसार अलग-अलग तीज त्योहार मनाने का चलन रहा है। शहर की लालंचद कॉलोनी निवासी 82 वर्षीय बुजुर्ग कमला देवी ने बताया कि सावन के बीच हर किसी को घेवर का इंतजार रहता है। विवाहित बेटियों को उनकी ससुराल में मिठाई सहित कपड़े देने की परंपरा सालों पुरानी है। समाज के लोग अपनी बेटियों को अनेक तरह के उपहार देते हैं। तीज के दिन नए कपड़े पहने जाते हैं और घर की महिलाएं हाथों में मेहंदी लगाती हैं। भाई अपनी बहनों के घर घेवर लेकर जाते हैं। उन्होंने कहा कि गांव भले ही शहरीकरण के दायरे में आ गए हैं, लेकिन आज भी शहरी और ग्रामीण खेत्र में लोग सिंधारा को बरकरार रखे हुए हैं। हालांकि शहरों में झूला झूलने का चलन जरूर कम हो गया है, लेकिन गांवों में यह प्रथा अभी भी जारी है।
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