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नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के आधे भाग में अब फिर कोविड अस्पताल

Sat, 10 Apr 2021 11:40 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 10 Apr 2021 11:40 PM IST
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Half of the National Cancer Institute, now Kovid Hospital
एनसीआई बाढ़सा। - फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। कोरोना संक्रमण के एक बार फि र केस बढ़ने शुरू हो गए हैं। मरीजों को इलाज मिलने में कठिनाई होने लगी है। गंभीर रोगियों के लिए समस्या अधिक बढने लगी है। बादली के बाढ़सा स्थित नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (एनसीआई) के लगभग आधे भाग में अब फिर कोविड-19 सेंटर शुरू कर दिया गया है।
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली गैर कोरोना मरीजों का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान है। इसकी ओपीडी बाढ़सा स्थित झज्जर एम्स में भी चलती है। इसके अलावा एम्स झज्जर के साथ एनसीआई भी है। इसमें कैंसर के सैकड़ों मरीजों का इलाज होता है। नई दिल्ली एम्स से रेफर किए गए सैकड़ों रोगियों को यहां भर्ती किया जाता है। लेकिन कोरोना की पिछली लहर में एनसीआई को कोरोना सेंटर (अस्पताल) के रूप में बदल दिया गया था। तब एम्स नई दिल्ली, बहादुरगढ़ और झज्जर से भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा रेफर किए गए कोरोना के अनेक मरीजों को यहां भर्ती किया जाता था। यहां कोरोना के 8000 से अधिक रोगियों का इलाज हुआ। संक्रमण का फैलाव घटता गया तो इस कोरोना सेंटर को लगभग बंद कर दिया गया था। यहां कैंसर रोगियों को भर्ती कर उनका इलाज किया जाने लगा। लेकिन अब फिर संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है तो एनसीआई के करीब आधे भाग में फिर से कोरोना सेंटर आरंभ कर दिया गया है। यहां अब फिर कोरोना का इलाज होने लगा है।
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एम्स नई दिल्ली, एनसीआई और एम्स झज्जर के काफी डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की ड्यूटी कोरोना सेंटर में लगाई जा रही है। इसलिए दूसरी बीमारियों के पीड़ितों का इलाज होने में मुश्किलें आना निश्चित है। हालांकि इन मरीजों को चिकित्सा परामर्श आदि उपलब्ध करवाने के लिए टेलिमेडिसिन सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि कैंसर मरीजों को कोरोना सेंटर वाले परिसर में भर्ती रखा जाएगा तो उन्हेें कोरोना होने की आशंका अधिक रहेगी। इसलिए मरीजों को भर्ती करना उचित नहीं। केवल आपातकाल स्थिति वाले मरीजों को ही दूसरे परिसरों में दाखिल किया जाएगा।
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