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जीएसटी : देसी घी सस्ता और पूजा की अगरबत्ती हुई महंगी
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फोटो 80: बहादुरगढ़ में झज्जर मोड पर स्थित किरयाना स्टोर। संवाद
बहादुरगढ़। त्योहर शुरू होते ही जीएसटी सुधार का असर लोगों की जेब पर साफ नजर आने लगा है। हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से की गई टैक्स दरों में फेरबदल का सीधा असर नवरात्र के दौरान इस्तेमाल होने वाली पूजा सामग्रियों पर भी पड़ा है। जहां एक ओर घी, तेल जैसे उत्पादों के दामों में कटौती हुई है। वहीं दूसरी ओर पूजा में प्रचलित अगरबत्ती समेत कुछ अन्य सुगंधित उत्पादों की कीमतें बढ़ गई हैं। ऐसे में खरीदारों मेें मिलाजुला असर देखने को मिला है।
रेलवे रोड के दुकानदार सुशील कुमार जैन ने बताया कि त्योहारी सीजन में घी और तेल की खपत सामान्य दिनों से कई गुना बढ़ जाती हैं। मंदिरों और घरों में अखंड ज्योति जलाने के लिए घी सबसे अहम तो वहीं दूसरे नंबर पर तेल की मांग ज्यादा रहती है।
जीएसटी में बदलाव के बाद घी और तेल पर 12 प्रतिशत का टैक्स लगता था लेकिन अब उसे 5 फीसदी की श्रेणी में लाया गया है। घी के अलावा भी तेल, मिश्री, नारियल और शहर जैसे पूजा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं पर 12 फीसदी से घटाकर 5 प्रतिशत टैक्स लागू किया गया है।
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ऐसे में आमतौर पर देसी घी समेत इन वस्तुओं का उपयोग करने वालों पर बोझ कम हुआ है इससे आम जनता को खासी राहत मिल रही है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि घी और तेल के सस्ते होने से इस बार बड़ी संख्या में लोग बिना झिझक के अधिक खरीदारी कर रहे हैं।
व्यापारियों का मानना है कि नवरात्र के दौरान पूजा पाठ के सामानों के दाम में कमी देखी गई है। इससे खरीदारी भी बढ़ी है। हालांकि सुगंधित उत्पादों के जीएसटी में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन बाकी वस्तुओं में कमी की वजह से लोग काफी राहत महसूस कर रहे हैं।
किराना स्टोर संचालक शंकर बंसल ने बताया कि 22 सितंबर से पहले एक किलो देसी घी की कीमत 600 रुपये के लगभग रही, ये कीमत 12 फीसदी जीएसटी लागू होने के बाद की है लेकिन 22 सितंबर के बाद जीएसटी में बदलाव करते हुए 5 फीसदी जीएसटी लगने के बाद यही घी 563 रुपये के आसपास आ गया। इसी तरह तिल का तेल 1 लीटर 180 रुपये से घटकर लगभग 169 रुपये पर आ गया। इसी तरह 500 ग्राम शहद 210 रुपये से लगभग 197 रुपये पर आ गया।
जीएसटी की प्रभावी दरें
सामान
पुरानी जीएसटी
नई जीएसटी
घी
12
5
अगरबत्ती
12
18
धूपबत्ती, लोहबान
12
18
कपूर
12
12
पीतल बर्तन
18
12
कृत्रिम फूल माला
12
18
बताशा, मिश्री
18
5
नारियल, अन्य फल
12
5
संवाद
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रेलवे रोड के दुकानदार सुशील कुमार जैन ने बताया कि त्योहारी सीजन में घी और तेल की खपत सामान्य दिनों से कई गुना बढ़ जाती हैं। मंदिरों और घरों में अखंड ज्योति जलाने के लिए घी सबसे अहम तो वहीं दूसरे नंबर पर तेल की मांग ज्यादा रहती है।
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जीएसटी में बदलाव के बाद घी और तेल पर 12 प्रतिशत का टैक्स लगता था लेकिन अब उसे 5 फीसदी की श्रेणी में लाया गया है। घी के अलावा भी तेल, मिश्री, नारियल और शहर जैसे पूजा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं पर 12 फीसदी से घटाकर 5 प्रतिशत टैक्स लागू किया गया है।
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ऐसे में आमतौर पर देसी घी समेत इन वस्तुओं का उपयोग करने वालों पर बोझ कम हुआ है इससे आम जनता को खासी राहत मिल रही है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि घी और तेल के सस्ते होने से इस बार बड़ी संख्या में लोग बिना झिझक के अधिक खरीदारी कर रहे हैं।
व्यापारियों का मानना है कि नवरात्र के दौरान पूजा पाठ के सामानों के दाम में कमी देखी गई है। इससे खरीदारी भी बढ़ी है। हालांकि सुगंधित उत्पादों के जीएसटी में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन बाकी वस्तुओं में कमी की वजह से लोग काफी राहत महसूस कर रहे हैं।
किराना स्टोर संचालक शंकर बंसल ने बताया कि 22 सितंबर से पहले एक किलो देसी घी की कीमत 600 रुपये के लगभग रही, ये कीमत 12 फीसदी जीएसटी लागू होने के बाद की है लेकिन 22 सितंबर के बाद जीएसटी में बदलाव करते हुए 5 फीसदी जीएसटी लगने के बाद यही घी 563 रुपये के आसपास आ गया। इसी तरह तिल का तेल 1 लीटर 180 रुपये से घटकर लगभग 169 रुपये पर आ गया। इसी तरह 500 ग्राम शहद 210 रुपये से लगभग 197 रुपये पर आ गया।
जीएसटी की प्रभावी दरें
सामान
पुरानी जीएसटी
नई जीएसटी
घी
12
5
अगरबत्ती
12
18
धूपबत्ती, लोहबान
12
18
कपूर
12
12
पीतल बर्तन
18
12
कृत्रिम फूल माला
12
18
बताशा, मिश्री
18
5
नारियल, अन्य फल
12
5
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